मार्क जुकरबर्ग की बढ़ी टेंशन, Meta की मार्केट वैल्यू में $310 बिलियन की भारी गिरावट, AI पर पानी की तरह पैसा बहाना पड़ा भारी

Meta Platforms Stock Crash: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्सकी मार्केट वैल्यू में $310 बिलियन की भारी गिरावट आई है. जानें क्यों AI पर बेतहाशा खर्च और 'सोशल मीडिया एडिक्शन' के कानूनी केस मार्क जुकरबर्ग के लिए सिरदर्द बन गए हैं.

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Meta Shares Crash: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी Meta को इस महीने जबरदस्त झटके लगे हैं.

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms Inc.) के लिए साल की शुरुआत जितनी शानदार थी, फिलहाल हालात उतने ही खराब नजर आ रहे हैं. इस महीने मेटा के शेयरों में 17% की भारी गिरावट आई है, जो अक्टूबर 2022 के बाद इसका सबसे खराब प्रदर्शन है. सिर्फ मार्च के महीने में ही कंपनी ने अपनी मार्केट वैल्यू से $280 बिलियन गंवा दिए हैं, और कुल मिलाकर यह गिरावट $310 बिलियन यानी करीब ₹25.80 लाख करोड़ तक पहुंच गई है.

भारी-भरकम कानूनी पचड़े और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर पानी की तरह पैसा बहाने की जुकरबर्ग की जिद ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है.

आसान भाषा में समझें मेटा की इस गिरावट की 3 सबसे बड़ी वजहें ...

1.  AI पर भारी खर्च ने बढ़ाई निवेशकों की धड़कन

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग मेटावर्स से ध्यान हटाकर पूरी तरह AI पर फोकस कर रहे हैं लेकिन इसके लिए होने वाला खर्च डराने वाला है.  वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य मान रहे हैं और इस पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं. लेकिन निवेशकों को डर है कि यह खर्च कंपनी के मुनाफे को निगल सकता है. ठीक वैसा ही डर जैसा साल 2022 में 'मेटावर्स' पर खर्च को लेकर देखा गया था. पिछले हफ्ते ही शेयरों में 11% की बड़ी गिरावट देखी गई, जो इसी डर का नतीजा है.

इस साल कंपनी का कैपेक्स (Capex) 77% बढ़कर $123.5 बिलियन होने का अनुमान है. इसकी वजह से कंपनी का फ्री कैश फ्लो, जो 2025 में $46 बिलियन था, इस साल 83% घटकर $8 बिलियन से भी कम रह सकता है. इसी भारी खर्च को मैनेज करने के लिए कंपनी सैकड़ों नौकरियां भी कम कर रही है.

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2. कानूनी पचड़ों ने बढ़ाई टेंशन

सिर्फ भारी खर्च ही नहीं, मेटा इस वक्त कई कानूनी चुनौतियों का भी सामना कर रही है. न्यू मैक्सिको की एक जूरी ने पाया कि मेटा ने टीनएजर्स को सोशल नेटवर्क की सिक्योरिटी के बारे में गुमराह किया. इसके अलावा, मेटा और अल्फाबेट (Google) को 'सोशल मीडिया एडिक्शन' से जुड़े एक मामले में भी जिम्मेदार ठहराया गया है.   कैलिफोर्निया में भी कई मामले ट्रायल के लिए तैयार हैं, जो लंबे समय तक कंपनी के शेयरों पर दबाव बनाए रखेंगे.डेटा प्राइवेसी और रेगुलेटरी दबावों के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है. उन्हें लग रहा है कि भविष्य में आने वाली कानूनी अड़चनें कंपनी के रेवेन्यू पर असर डाल सकती हैं.

3. अक्टूबर 2022 जैसे बुरे दौर की वापसी?

इस महीने मेटा के शेयर 17% तक टूट चुके हैं. यह गिरावट अक्टूबर 2022 की याद दिलाती है जब मेटा के रेवेन्यू आउटलुक ने सबको निराश किया था. उस वक्त जुकरबर्ग ने निवेशकों से धैर्य रखने की अपील की थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार एक बार फिर रिस्क-ऑफ मोड में चला गया है.

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सोशल मीडिया पर सख्त रेगुलेशन से खतरा

वॉल स्ट्रीट के एक्सपर्ट अब मेटा की तुलना तंबाकू इंडस्ट्रीसे करने लगे हैं. जैसे कभी सख्त रेगुलेशन ने सिगरेट कंपनियों के मुनाफे को सुखा दिया था, वैसा ही खतरा अब सोशल मीडिया पर मंडरा रहा है. कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि इन कानूनी फैसलों के बाद मेटा और गूगल को अपनी सेवाएं पूरी तरह से रिडिजाइन करनी पड़ सकती हैं या भारी-भरकम सेटलमेंट अमाउंट देना पड़ सकता है.

गिरावट के बाद भी क्यों बुलिश हैं एक्सपर्ट्स?

हैरानी की बात यह है कि इतनी गिरावट के बाद भी कई बड़े निवेशक मेटा को सबसे सस्ता और आकर्षक मान रहे हैं. मेटा का शेयर फिलहाल अपनी भविष्य की कमाई के मुकाबले 16 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो मार्च 2023 के बाद सबसे कम है. ब्लूमबर्ग द्वारा ट्रैक किए गए 80 एनालिस्ट में से 72 ने अब भी इसे 'बाय' (Buy) रेटिंग दी है. उन्हें उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में शेयर 61% तक उछल सकता है क्योंकि कंपनी अपनी AI इन्वेस्टमेंट को भुनाना अच्छे से जानती है.

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