कानपुर में 108 साल पहले बना JK ग्रुप, जुग्गीलाल कमलापत सिंघानिया ने कैसे कॉटन मिलों से खड़ा किया कारोबार

Vijaypat Singhania News Today: राजस्थान के झुंझनू जिले के सिंघानिया से आया मारवाड़ी कारोबारी का परिवार कानपुर आया. फिर इसे कर्मभूमि मानकर मिलों की नींव रखी. आज जेके ग्रुप न केवल देश बल्कि देश में विदेश में भी कामयाबी के झंडे गाड़ चुका है. विजयपत सिंघानिया भी इसी समूह के दिग्गज कारोबारी थे.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
JK Group of Companies
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • जेके ग्रुप की स्थापना लाला जुग्गीलाल सिंघानिया और उनके पुत्र लाला कमलापत सिंघानिया ने की थी,
  • जेके ग्रुप की पहली औद्योगिक इकाई जेके कॉटन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स कानपुर में सन् 1921 में स्थापित हुई थी
  • कमलापत सिंघानिया ने स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित होकर भारतीय स्वामित्व वाली मिलों को विकसित करने का निश्चय किया
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

JK Group of Companies:  जेके ग्रुप भारत के नामचीन पारिवारिक कारोबारी समूहों में से एक है, जिसकी नींव आजादी के पहले पड़ी और टाटा, बिरला की तरह पूरे देश में जिसने अपना सिक्का जमाया. जेके ग्रुप (JK Group) भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में से एक है. इसकी नींव लाला जुग्गीलाल सिंघानिया और उनके पुत्र लाला कमलापत सिंघानिया ने रखी थी, जिससे इस समूह का नाम 'JK' पड़ा. कानपुर की कॉटन मिलों से शुरू हुआ जेके समूह का कारोबार फिर अगली पीढ़ियों में कोलकाता, मुंबई जैसे शहरों में धाक जमाने के साथ विदेश तक फैला. जेके समूह की स्थापना के बाद आज सिंघानिया समूह की चौथी पीढ़ी बिजनेस संभाल रही है.

पहली पीढ़ी - लाला जुग्गी लाल सिंघानिया

लाला जुग्गीलाल सिंघानिया ने कानपुर में एक छोटे व्यापार से शुरुआत की थी. शुरुआत में ब्याज पर पैसे देने समेत परिवार के पारंपरिक व्यापार को आगे बढ़ाया और बड़े उद्योग खड़े करने का सपना देखा. जुग्गीलाल सिंघानिया का परिवार मूलतः राजस्थान के झुंझुनू जिले के सिंघाना (Singhana) कस्बे के रहने वाले थे और इस कारण उनका सरनाम सिंघानिया पड़ा. 1850 के आसपास लाला जुग्गीलाल के पूर्वज विनायक दास जी बेहतर कामकाज की तलाश में राजस्थान छोड़कर उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद आ गए. उस वक्त मारवाड़ी व्यापारी गंगा के किनारे व्यापारिक केंद्रों की ओर पलायन कर रहे थे. विनायक दास जी के पुत्र सेठ स्वरूप चंद और उनके पोते जुग्गीलाल ने कानपुर को कारोबार का केंद्र बनाया. 

कानपुर में कारोबार की नींव

कमलापत सिंघानिया ने महसूस किया कि केवल अंग्रेजों के लिए कच्चा माल जुटाने से देश और परिवार का भला नहीं होगा. उन्होंने 'स्वदेशी' आंदोलन से प्रेरित होकर खुद की मिलें लगाने का निश्चय किया. लाला जुग्गीलाल और उनके बेटे लाला कमलापत सिंघानिया ने 1918 में 'जुग्गीलाल कमलापत' (Juggi Lal Kamlapat) के नाम से एक व्यापारिक फर्म बनाई, जिसे JK कहा गया. पहला बड़ा कारखाना 1921) में समूह ने अपनी पहली बड़ी औद्योगिक इकाई जेके कॉटन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स कानपुर में स्थापित की. ट्रेडिंग को छोड़कर मैन्युफैक्चरिंग (उत्पादन) में कदम रखा. यह पूरी तरह भारतीय मालिकाना वाली पहली बड़ी मिलों में से एक थी. 1918 से 1930 के बीच उन्होंने जेके जूट और जेके. आयरन जैसी कई अन्य मिलें खोलीं, जिससे यह उत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक घराना बन गया.

दूसरी पीढ़ी में लाला कमलापत सिंघानिया

लाला कमलापत सिंघानिया (1884–1937) को जेके ग्रुप का असली संस्थापक माना जाता है. उन्होंने कानपुर में कई कॉटन मिलें स्थापित कीं. वर्ष 1921 में जेके कॉटन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स की स्थापना. उन्होंने कपड़ा, ऊन और लोहे के क्षेत्र में व्यापार को फैलाया. उस वक्त कानपुर ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश सेना के लिए चमड़े और कपड़ों का एक बड़ा केंद्र बन रहा था. कानपुर को मिलों के कारण भारत के मैनचेस्टर शहर की संज्ञा भी दी गई. शुरुआत में वो कपास (Cotton) और अनाज के आढ़ती (Brokers) के रूप में काम करते थे. फिर अंग्रेजों की मिलों के लिए कच्चा माल जुटाने लगे.

Advertisement

तीसरी पीढ़ी में कमलापत सिंघानिया के तीन बेटे

कमलापत सिंघानिया के तीन बेटों के बीच व्यापार अलग-अलग शहरों में तेजी से आगे बढ़ा और जेके ग्रुप एक नेशनल ब्रांड बना. पद्मपत सिंघानिया ने कानपुर मुख्यालय संभाला और एल्युमीनियम (JK Aluminium) व सीमेंट के क्षेत्र में कदम रखा. कैलाशपत सिंघानिया ने व्यापार को मुंबई तक फैलाया. उन्होंने विख्यात रेमंड (Raymond) ब्रांड की शुरुआत की. लक्ष्मीपत सिंघानिया ने व्यापार को कोलकाता में स्थापित किया. उन्होंने जेके टायर और जेके पेपर मिल्स जैसे कारोबार पर फोकस किया. कैलाशपत सिंघानिया के बेटे विजयपत सिंघानिया थे. 

JK Group

ये भी पढ़ें - Vijaypat Singhania: जब 'पतंग-सा' एयरक्राफ्ट लेकर लंदन से अकेले अहमदाबाद के लिए उड़ चले विजयपत सिंघानिया, जुनून देख एयरफोर्स ने भी किया सलाम

Advertisement

जेके समूह की चौथी पीढ़ी

1. जेके ऑर्गनाइजेशन (दिल्ली-कानपुर ग्रुप)

जेके के इस समूह का नेतृत्व भरत हरी सिंघानिया और उनके परिवार के पास है. इनकी प्रमुख कंपनियां जेके टायर (JK Tyre), जेके पेपर (JK Paper) और फेनर इंडिया शामिल है. सीमेंट में (JK Lakshmi Cement) और डेयरी उत्पाद (Umang Dairies), जेके इंश्योरेंस भी शामिल हैं.

2. जे.के. सीमेंट (यदुपति सिंघानिया ग्रुप)

पद्मपत सिंघानिया के वंशजों ने इस हिस्से को संभाला. यदुपति सिंघानिया (जिनका 2020 में निधन हो गया) ने इसे भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनियों में से एक बनाया. उनकी प्रमुख कंपनी जे.के. सीमेंट (JK Cement) है.

3. रेमंड ग्रुप (मुंबई ग्रुप)

यह कैलाशपत सिंघानिया की अगली पीढ़ियों के पास है. वर्तमान में गौतम सिंघानिया इसके अध्यक्ष हैं. रेमंड (कपड़ा), रियल एस्टेट, और इंजीनियरिंग (JK Files & Engineering) की कंपनी इस ग्रुप के पास है. यह दुनिया के सबसे बड़े सूट बनाने वाले कपड़े के निर्माताओं में से एक है.

ये भी पढ़ें - Vijaypat Singhania: जब विजयपत सिंघानिया के एयरक्राफ्ट पर चल गईं थी गोली, ये किस्सा कर देगा हैरान

Advertisement

सिंघानिया परिवार की पांचवीं पीढ़ी 

रेमंड ग्रुप: इसका नेतृत्व गौतम सिंघानिया कर रहे हैं. इन्होंने टेक्सटाइल के साथ-साथ रियल एस्टेट और इंजीनियरिंग में बड़ा निवेश किया है.
जेके टायर, जेके पेपर, जेके लक्ष्मी सीमेंट: इसका नेतृत्व हर्ष पति सिंघानिया, भरत हरी सिंघानिया और अंशुमान सिंघानिया जैसे सदस्य कर रहे हैं.
जेके सीमेंट (कानपुर): यदुपति जी के बाद अब उनके उत्तराधिकारी माधवकृष्ण सिंघानिया आदि इसे देख रहे हैं.
 

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Iran Israel War: ईरान बॉर्डर पर पहुंची Trump की सेना? | Bharat Ki Baat Batata Hoon