जेपी इन्फ्राटेक पर अदाणी समूह के हक पर मुहर, सुप्रीम कोर्ट का स्टे से इनकार

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से JAL पर अदाणी ग्रुप के अधिग्रहण को हरी झंडी मिल गई है. हालांकि कोर्ट ने स्‍पष्‍ट किया है कि मॉनिटरिंग कमेटी यदि कोई बड़ा निर्णय लेना चाहती है, तो उसे पहले (NCLAT) की पूर्व अनुमति लेनी होगी.  

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सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अदाणी ग्रुप के जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड  के लिए तैयार किए गए रिजॉल्यूशन प्लान के अमल पर रोक लगाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से JAL पर अदाणी ग्रुप के अधिग्रहण को हरी झंडी मिल गई है. हालांकि कोर्ट ने स्‍पष्‍ट किया है कि मॉनिटरिंग कमेटी यदि कोई बड़ा निर्णय लेना चाहती है, तो उसे पहले (NCLAT) की पूर्व अनुमति लेनी होगी.  

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जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की दिशा में अदाणी ग्रुप की महत्वपूर्ण कानूनी जीत हासिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वेदांता की उस याचिका पर सुनवाई करने या स्टे देने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें अदाणी ग्रुप के रिजॉल्यूशन प्लान (समाधान योजना) पर रोक लगाने की मांग की गई थी.  

सुप्रीम कोर्ट का रुख 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई जाएगी. कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी दलीलें नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के समक्ष रखें, जहां इस मामले की विस्तृत सुनवाई पहले से ही चल रही है. अदालत ने एनसीएलएटी (NCLAT) को इस विवाद पर तेजी से सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है, जिसकी अंतिम प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू होने वाली है.

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रिजॉल्यूशन प्लान को पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

अदाणी एंटरप्राइजेज द्वारा पेश किए गए इस रिजॉल्यूशन प्लान को कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने काफी पहले ही अपनी भारी सहमति दे दी थी. इसके बाद, नवंबर में कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने भी अदाणी ग्रुप की योजना को पूरी तरह वैध मानते हुए इसे हरी झंडी दिखा दी थी. विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी ग्रुप की योजना जेपी के कर्जदाताओं और कंपनी के भविष्य के लिए सबसे ठोस विकल्प साबित हुई है.

आगे की प्रक्रिया और पारदर्शिता

सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ये निर्देश दिया है कि JAL की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी यदि कोई बहुत बड़ा नीतिगत निर्णय लेना चाहती है, तो वह एनसीएलएटी (NCLAT) की पूर्व अनुमति से ऐसा करे. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप न करने के फैसले से ये साफ हो गया है कि अदाणी ग्रुप की अधिग्रहण प्रक्रिया कानून सम्मत तरीके से आगे बढ़ रही है. 

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