तेल से चावल तक, भारत–ईरान कारोबार का पूरा हिसाब, युद्ध के बीच क्यों बढ़ी अहमियत?

Iran-Israel Conflict Impact: भारत–ईरान व्यापार सिर्फ आयात–निर्यात का मामला नहीं, बल्कि सूखे मेवे और रणनीतिक कनेक्टिविटी का जोड़ है. ऐसे में युद्ध का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है.

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Iran-Israel War Impact: ईरान पर इजरायल के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने मिडिल ईस्ट में टेंशन चरम पर पहुंचा दी है. इसके बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की चिंताएं भी बढ़ी हैं. हालांकि भारत और ईरान के बीच सीधा द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ सालों में कम हुआ है, लेकिन ईरान से खरीदे जा रहे ड्राई फ्रूट्स के लिहाज से यह युद्ध भारत के इम्पोर्ट बिल को बिगाड़ सकता है. चलिए इस खबर में आपको बताते हैं कि ईरान से भारत क्या खरीदता है और क्या-क्या एक्सपोर्ट हो रहा है. 

Iran-Israel War Impact

ईरान से क्या खरीदता है भारत?

वित्त वर्ष 2024-25 में ईरान के साथ भारत का कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर रहा, जो 2018-19 के 17.03 अरब डॉलर की तुलना में कम है. इस कमी की अहम वजह ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध माने जा सकते हैं, जिससे कच्चे तेल के आयात में भारी कमी आई है. अभी की बात करें तो भारत, ईरान से सेब, पिस्ता, खजूर और कीवी जैसे एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का आयात करता है. 2024-25 में ईरान से भारत का आयात केवल 0.44 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक आयात का बहुत ही कम हिस्सा है.

इसके अलावा एलपीजी, मेथनॉल और कुछ पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स भी ईरान से आयात किए जाते रहे हैं, जिनका इस्तेमाल रिफाइनिंग में होता है.

Iran-Israel Conflict Impact

ईरान को क्या बेचता है भारत?

दूसरी तरफ निर्यात के मोर्चे पर तस्वीर दिलचस्प है. ईरान भारतीय बासमती चावल का बड़ा खरीदार रहा है. साथ ही भारत से ईरान चीनी, चाय, सूती कपड़े, दवाईयां बेचे जाते हैं. इसके अलावा भारतीय जेनेरिक दवाइयां और मेडिकल इक्विपमेंट ईरान में बड़ी डिमांड रखते हैं. 

चाबहार पोर्ट और लॉजिस्टिक्स की चुनौती

भारत के लिए ईरान केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि मध्य एशिया तक पहुंचने का रास्ता भी है. चाबहार बंदरगाह के जरिए होने वाला आयात-निर्यात भारत की योजना का हिस्सा है. ईरान के साथ चल रहा यह युद्ध से भारत की कनेक्टिविटी प्रभावित होने का डर है. 

कुल मिलाकर, भारत–ईरान व्यापार सिर्फ आयात–निर्यात का मामला नहीं, बल्कि कृषि निर्यात और रणनीतिक कनेक्टिविटी का जोड़ है. ऐसे में युद्ध का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है.

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