भारतीय आईटी सेक्टर में इन दिनों भारी हलचल देखने को मिल रही है. कभी शेयर बाजार की शान मानी जाने वाली दिग्गज कंपनी इंफोसिस (Infosys) को तगड़ा झटका लगा है. कंपनी न केवल देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों की लिस्ट से बाहर हो गई है, बल्कि इसकी मार्केट वैल्यू में भी भारी गिरावट आई है. सिर्फ इंफोसिस ही नहीं, आईटी किंग TCS भी इस बिकवाली की लहर से बच नहीं पाई है. आखिर क्या है इस गिरावट की वजह और क्यों निवेशक अब आईटी शेयरों से दूरी बना रहे हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं...
इंफोसिस को ₹2 लाख करोड़ का झटका
शेयर बाजार में कभी सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली इंफोसिस (Infosys) के लिए यह साल काफी भारी पड़ रहा है. कंपनी ने इस साल अपनी मार्केट वैल्यू में ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा गंवा दिए हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इंफोसिस अब भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों की लिस्ट से बाहर हो गई है. शुक्रवार को कंपनी के शेयरों में करीब 7% की भारी गिरावट आई, जिससे इस साल अब तक की कुल गिरावट 30% तक पहुंच गई है. फिलहाल इंफोसिस का मार्केट कैप गिरकर करीब ₹4.9 लाख करोड़ रह गया है.
TCS भी टॉप 5 की लिस्ट स बाहर, LIC ने ली एंट्री
आईटी शेयरों में गिरावट का यह असर सिर्फ इंफोसिस तक सीमित नहीं है. देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), जो कभी नंबर 2 पर मजबूती से जमी रहती थी, अब फिसलकर 6वें नंबर पर आ गई है. आईटी सेक्टर की इस गिरावट के बीच एलआईसी (LIC) ने बाजी मारी है और ₹5.1 लाख करोड़ की वैल्यू के साथ टॉप 10 में अपनी जगह बना ली है.
मुनाफा बढ़ा, फिर भी क्यों गिरा शेयर?
हैरानी की बात यह है कि इंफोसिस का मार्च तिमाही का नेट प्रॉफिट बढ़ा है. कंपनी ने ₹8,501 करोड़ का मुनाफा कमाया, जो उम्मीद से बेहतर था. लेकिन निवेशकों को डर कंपनी के आने वाले साल (FY27) को लेकर है. इंफोसिस ने भविष्य के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान बहुत ही कम (1.5% से 3.5%) रखा है. बाजार को उम्मीद थी कि ग्रोथ ज्यादा होगी, लेकिन इस कमजोर गाइडेंस ने निवेशकों का भरोसा तोड़ दिया.
क्या AI बन गया है आईटी कंपनियों के लिए खतरा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आईटी सेक्टर में यह गिरावट सिर्फ कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल है. कंपनियां अब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI Impact on IT) और ऑटोमेशन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. इंफोसिस खुद टोपाज (Topaz) जैसे एआई प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है. लेकिन चुनौती यह है कि एआई की वजह से पुराना काम कम हो रहा है और प्रोडक्टिविटी बढ़ने से क्लाइंट्स अब कम पैसे दे रहे हैं.
ग्लोबल टेंशन और खर्च में कटौती
दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल और जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण विदेशी क्लाइंट्स अब खर्च करने में सावधानी बरत रहे हैं. बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और टेलीकॉम जैसे सेक्टर में क्लाइंट्स अब नए प्रोजेक्ट्स के बजाय पुराने खर्चों को कम करने पर ध्यान दे रहे हैं. हालांकि, इंफोसिस ने पिछले साल करीब $14.9 बिलियन के बड़े डील साइन किए हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर उतारने में समय लग रहा है.
निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने?
शेयर की कीमत गिरने से अब इसका वैल्यूएशन 18 गुना फॉरवर्ड अर्निंग के आसपास आ गया है. ब्रोक्रेज फर्म्स का कहना है कि पूरी इंडस्ट्री अब एक ऐसे दौर में है जहां पहले जैसी तेज ग्रोथ हासिल करना मुश्किल होगा. इंफोसिस कम मुनाफे वाले सौदों से बाहर निकल रही है और खुद को एडवाांस टेक्नोलॉजी के साथ ढालने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसका असर दिखने में अभी काफी वक्त लगेगा.
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