भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक ऐसी खबर आई है जो सुनने में तो चौकाती है, लेकिन इसके पीछे की वजह काफी पेंचीदा है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी से खिसक कर छठे पायदान पर आ गया है.फिर भी लेकिन हाल के महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने ग्लोबल रैंकिंग में भारत का खेल बिगाड़ दिया है.हालांकि अच्छी बात यह है कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
दुनिया की टॉप अर्थव्यवस्थाओं की सूची में भारत छठे नंबर पर
IMF के ताजा नॉमिनल GDP (Nominal GDP) आंकड़ों के अनुसार भारत अब अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान और यूनाइटेड किंगडम के बाद छठे स्थान पर है.वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट कुछ इस तरह है...
- अमेरिका करीब 30.8 ट्रिलियन डॉलर
- चीन करीब 19.6 ट्रिलियन डॉलर
- जर्मनी करीब 4.7 ट्रिलियन डॉलर
- जापान करीब 4.4 ट्रिलियन डॉलर
- यूनाइटेड किंगडम करीब 4.0 से 4.3 ट्रिलियन डॉलर
- भारत करीब 3.9 से 4.2 ट्रिलियन डॉलर
नोट- यह रैंकिंग लोकल करेंसी को मौजूदा डॉलर एक्सचेंज रेट पर बदलकर तय की जाती है.
रफ्तार में तेज, लेकिन रैंकिंग में पीछे क्यों ?
अगर आप सोच रहे हैं कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई है, तो जवाब है 'नहीं'. भारत की रैंकिंग नीचे आने का मतलब यह नहीं है कि देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है. इसकी असल में दो बड़ी वजह है...
1.कमजोर होता रुपया
हाल के महीनों में रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई है. जब देश की जीडीपी को अमेरिकी डॉलर में बदला जाता है, तो रुपये की कमजोरी के कारण वह आंकड़ा छोटा नजर आता है और वैश्विक रैंकिंग प्रभावित होती है.
2.GDP बेस ईयर में बदलाव
भारत ने हाल ही में GDP कैलकुलेशन का बेस ईयर अपडेट किया है. यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इससे कागज पर नॉमिनल जीडीपी का आंकड़ा पहले के मुकाबले कम दिखने लगा है. इस तकनीकी बदलाव का भी भारत की वैश्विक रैंकिंग पर असर पड़ा है.
रुपये की कमजोरी का असर कैसे पड़ता है? एक्सपर्ट ने समझाया
इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस की सीआईओ पूनम टंडन के मुताबिक ,भारत की 7-8% की ग्रोथ के बावजूद करेंसी वैल्यू में उतार-चढ़ाव की वजह से रैंकिंग प्रभावित हुई है.डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था का आकार छोटा दिखता है, जबकि असल में भारत की ग्रोथ रेट 7–8 प्रतिशत के आसपास मजबूत बनी हुई है. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और युद्ध जैसी स्थितियां खत्म होने के बाद रुपये में मजबूती आ सकती है. साथ ही विदेशी निवेश (FPI)बढ़ने से भी रुपये को सहारा मिल सकता है और रुपया जल्द ही मजबूती पकड़ेगा.
रुपये की कमजोरी का असर आयात, महंगाई और निवेश पर
विभावंगल अनुकूलकारा के मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्य का कहना है कि रुपये की कमजोरी से वैश्विक रैंकिंग में बदलाव को घबराने वाली स्थिति नहीं माना जाना चाहिए.इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि सावधानी की तरह देखना चाहिए. भारत की अर्थव्यवस्था कंज्यूमर खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सर्विस सेक्टक की मजबूती के कारण सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है. हालांकि रुपये की कमजोरी का असर अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर नहीं, केवल इंपोर्ट (आयात) लागत और महंगाई पर थोड़ा असर पड़ता है.
भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत
2027 तक फिर चौथे स्थान पर पहुंच सकता है भारत
सरकारी अधिकारियों और कई आर्थिक अनुमानों के मुताबिक यह गिरावट सिर्फ कुछ समय के लिए है. भारत जल्द ही अपनी रैंकिंग वापस सुधार सकता है.आईएमएफ का अनुमान है कि भारत की ग्रोथ 6-7% बनी रहेगी, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. अनुमान है कि भारत 2027 तक वापस चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है और 2030 की शुरुआत तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है.
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