पता है, आपकी सोसाइटी वाले गुप्ता जी, इन दिनों मजे में हैं और 2 बिल्डिंग छोड़ उनके पड़ोस में रहने वाले सिन्हा जी टेंशन में चल रहे हैं. सिन्हा जी के यहां LPG सिलेंडर खत्म होने वाला है. बुकिंग हो गई है, लेकिन डिलीवरी में देरी होगी. वहीं गुप्ता जी के यहां PNG कनेक्शन लगा है, सो उन्हें सिलेंडर की चिंता ही नहीं है. ये किसी एक सोसाइटी का हाल नहीं है. आप समझ ही गए होंगे!
देश में LPG सिलेंडर की इसी किल्लत के बीच हमलोग एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं. हमारी रसोई का ईंधन बदल रहा है. जहां कभी LPG सिलेंडर हर घर की मजबूरी था, वहीं अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) तेजी से लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है. कभी रसोई की शान माने जाने वाला लाल सिलेंडर (LPG) मौजूदा संकट के बीच पाइप वाली गैस यानी PNG (Piped Natural Gas) के सामने अपनी चमक खो रहा है. पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भारतीय उपभोक्ताओं ने एक बड़ा और कड़ा सबक लिया है. यही वजह है कि आज दिल्ली से लेकर मुंबई तक, घरों और कमर्शियल संस्थानों में PNG कनेक्शन लेने की होड़ मची है.
हालात ऐसे हैं कि गैस कंपनियों के कॉल सेंटर लगातार बज रहे हैं और हर दिन सैकड़ों लोग नए कनेक्शन के लिए 'कतार' में हैं. दिल्ली-एनसीआर में PNG सेवा देने वाली कंपनी IGL यानी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के फोन लगातार घनघना रहे हैं. इनक्वायरी कॉल में 300 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है. GAIL यानी गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया का भी करीब-करीब यही हाल है.
NDTV इंडिया डिजिटल ने इन कंपनियों के अधिकारियों से इस संबंध में बात की तो पता ला कि कंपनियों ने बढ़ती मांग के मुताबिक तैयारियां भी कर रखी है.
क्यों बदल रहा है कंज्यूमर का मूड?
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण है LPG की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता. मध्य पूर्व में जारी तनाव और खासकर ईरान द्वारा होरमुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के बाद वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है. भारत अपनी करीब 62% LPG जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और इसमें से 90% सप्लाई इसी रूट से आती है. ऐसे में थोड़ी सी भी रुकावट का असर सीधे घरेलू किचन तक पहुंचता है. इसके उलट PNG को अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प माना जा रहा है.
देश में PNG उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. कुल घरेलू PNG कनेक्शन करीब 1.59 करोड़ के आसपास पहुंच चुके हैं. वहीं, सिर्फ IGL के पास ही करीब 30 लाख उपभोक्ता हैं, जो इसे इस सेगमेंट का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनाता है. हाल के दिनों में आई तेजी ने इस सेक्टर को नई ऊंचाई दी है. कॉल वॉल्यूम, कनेक्शन रिक्वेस्ट और इंस्टॉलेशन- हर पैरामीटर पर रिकॉर्ड ग्रोथ देखने को मिल रही है.
कंपनियों के ऑफर्स ने भी बढ़ाई रफ्तार
PNG की बढ़ती लोकप्रियता में कंपनियों के आकर्षक ऑफर्स का भी बड़ा योगदान है.
- IGL (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड): 31 मार्च से पहले कनेक्शन लेने पर 500 रुपये तक की मुफ्त गैस
- MGL (महानगर गैस लिमिटेड): 500 रुपये का रजिस्ट्रेशन चार्ज पूरी तरह माफ, कमर्शियल कनेक्शन पर 1 से 5 लाख तक की सिक्योरिटी डिपॉजिट खत्म
- GAIL गैस: घरेलू कनेक्शन पर 500 रुपये की मुफ्त गैस
- BPCL: कमर्शियल कनेक्शन पर सिक्योरिटी डिपॉजिट पूरी तरह माफ
इन ऑफर्स की वजह से उपभोक्ताओं का शुरुआती खर्च कम हो गया है, जिससे लोग तेजी से PNG की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
दिल्ली-NCR में IGL का प्लान: लगाई गईं अतिरिक्त टीमें
दिल्ली-एनसीआर में गैस सप्लाई करने वाली इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के आंकड़े इस ट्रेंड की सबसे बड़ी मिसाल हैं. कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (PNG मार्केटिंग) अमनदीप सिंह के मुताबिक, IGL को अब हर दिन 300 से ज्यादा नए कनेक्शन के रिक्वेस्ट मिल रहे हैं. पहले जहां रोजाना करीब 100 कॉल आते थे, अब यह आंकड़ा 300 के पार पहुंच गया है- यानी 200% से ज्यादा की उछाल. कुल कॉल्स में तो 200 से 300 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने अतिरिक्त टीमें लगाई हैं और अब हर दिन 1,500 से ज्यादा कनेक्शन इंस्टॉल करने का लक्ष्य रखा गया है.
GAIL का प्लान: 2 महीने में 45,000 नए कनेक्शन
GAIL गैस के चीफ मैनेजर (कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन) सैकत चक्रवर्ती के अनुसार, कंपनी देशभर में घरेलू PNG को प्राथमिकता दे रही है. फिलहाल GAIL के करीब 11 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं और अगले दो महीनों में 45,000 नए कनेक्शन जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने बताया कि देश में करीब 60 लाख घर ऐसे हैं, जहां पाइपलाइन पहले से पहुंच चुकी है और उन्हें तुरंत PNG कनेक्शन दिया जा सकता है. यानी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है, बस कंज्यूमर के ‘स्विच' करने की देर है.
देश भर में PNG कनेक्शंस और कंज्यूमर बेस बढ़ने की राह में कुछ बाधाओं की ओर भी चक्रवर्ती ध्यान दिलाते हैं. वे कहते हैं कि केंद्र सरकार का फोकस जिस कदर इस ओर बढ़ा है, वो गति हासिल करने में स्थानीय प्रशासन के स्तर पर दिक्कतें आती रही हैं. कारण कि सड़क काटकर पाइप बिछाने, रात में काम करने वगैरह की अनुमति स्थानीय प्रशासन से लेनी होती है, जो बहुत आसानी और बहुत तेजी से नहीं मिल पाता. हालांकि उन्होंने ये भी बताया कि केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर गया है.
केंद्र सरकार दे रही बढ़ावा, राज्यों को भी निर्देश
केंद्र सरकार ने भी PNG ट्रेंड को तेजी देने के लिए कदम उठा रही है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के विस्तार में तेजी लाई जाए. रोड कटिंग और परमिशन चार्ज माफ करने, नोडल अधिकारी नियुक्त करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि पाइपलाइन तेजी से बिछाई जा सके. साथ ही सरकार ने घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के उपभोक्ताओं को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है. होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और हॉस्टल जैसे बड़े उपभोक्ताओं को खास तौर पर LPG से PNG में शिफ्ट होने की सलाह दी जा रही है.
PNG vs LPG: क्यों ‘नो टेंशन' है पाइप गैस?
PNG को ‘नो टेंशन गैस' कहा जाने लगा है और इसके पीछे ठोस वजहें हैं:
- सप्लाई की चिंता खत्म: सिलेंडर खत्म होने का डर नहीं
- सतत गैस फ्लो: पाइपलाइन के जरिए लगातार सप्लाई
- सेफ्टी: लीकेज की स्थिति में गैस हवा में फैल जाती है, विस्फोट का खतरा कम
- कम झंझट: बुकिंग, डिलीवरी, स्टोरेज का झंझट खत्म
- बिलिंग में पारदर्शिता: जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान
यही वजह है कि अब उपभोक्ता इसे लंबे समय के लिए बेहतर विकल्प मान रहे हैं.
LPG की जगह ले सकता है PNG, अगर...
हालांकि PNG को स्थिर विकल्प माना जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों से अछूता नहीं है. भारत अपनी करीब 50% प्राकृतिक गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. यह गैस अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों से आती है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम होती है. ICRA के अनुसार, घरेलू उत्पादन PNG सप्लाई को कुशन देता है और अगर ज्यादा लोग PNG अपनाते हैं तो सिस्टम मांग को बेहतर तरीके से संभाल सकता है.
कुल मिलाकर LPG संकट ने एक बात साफ कर दी है, वो ये कि ऊर्जा के मामले में ‘कन्वीनियंस' और ‘रिलायबिलिटी' अब उपभोक्ता के फैसले का केंद्र बन चुके हैं. PNG ने दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है. अगर सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और कंपनियों की पहल इसी तरह जारी रहीं, तो आने वाले समय में भारत के शहरी किचन में सिलेंडर की जगह पाइपलाइन गैस ले सकती है.
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