मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए क्विक रिस्पांस टीम का गठन भी किया गया है. केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल की अध्यक्षता में बुलाई गयी एक हाई-लेवल मीटिंग में ये अहम फैसले लिए गए.
बैठक में नौवहन महानिदेशक ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि इस समय क्षेत्र की क्या स्थिति है और भारतीय झंडे वाले जहाजो और भारतीय नाविकों की हालत कैसी है. फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आसपास के समंदर में मिसाइल, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक दखल जैसी गतिविधियां और सुरक्षा खतरे बढ़े हैं. इसलिए मंत्रालय ने भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था को सक्रिय कर दिया है.
भारतीय झंडे वाले जहाजों की निगरानी शुरू
मंत्रालय ने भारतीय झंडे वाले जहाजों की वास्तविक समय में निगरानी शुरू कर दी है. एमएमडीएसी डीजीकॉम सेंटर के जरिए 24x7 निगरानी की व्यवस्था की गई है. जहाजों, उनके मालिकों और प्रबंधकों के लिए कुछ जरूरी रिपोर्टिंग नियम भी तय किए गए हैं. भारतीय नौसेना, विदेश मंत्रालय, समुद्री बचाव केंद्र और विदेशों में भारतीय दूतावास आपस में लगातार तालमेल बनाए हुए हैं.
प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों को हर तरह की जरूरी मदद दी जा रही है. केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा कि, "भारत सरकार मुश्किल समय में अपने नाविकों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है. मंत्रालय भारतीय जहाजों और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है. चाहे वो ऑपरेशन से जुड़ी मदद हो, कूटनीतिक सहयोग हो या मानवीय सहायता. भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए देश और विदेश के सभी जरूरी साझेदारों के साथ मिलकर काम करता रहेगा."
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