- केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में आयकर सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है.
- बजट में हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, बायोफार्मा, पर्यटन और सेमी कंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है.
- 15वें वित्त आयोग प्रमुख एनके सिंह ने बजट को जिम्मेदार, विश्वसनीय और भविष्य की चुनौतियों से निपटने वाला बताया.
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026 पेश किया. इसमें आयकर की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है. लेकिन वित्त मंत्री ने बजट में कई बड़ी घोषणाएं की हैं. इसमें देश में सात नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, बायोफार्मा, पर्यटन, रेयर अर्थ मिनरल्स और सेमी कंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं. विशेषज्ञ इसे भविष्य को ध्यान में रखकर उठाए गए कदम बता रहे हैं. बजट पेश किए जाने के बाद वित्त आयोग के पूर्व प्रमुख और मशहूर अर्थशास्त्री एनके सिंह ने एनडीटीवी के हिमांशु शेखर मिश्र से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के इस बजट को सही, विश्ववसनीय और जिम्मेदारियों से भरा हुआ बजट बताया.
भविष्य की चुनौतियों से निपटने वाला बजट
एनके सिंह ने कहा कि वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किया गया बजट बहुत सराहनीय है. उन्होंने कहा कि सरकार ने जो प्रस्ताव किए हैं, वह आज के समय की चुनौतियों से पार पाने के लिए हैं. उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री ने इकोनॉमिक सर्वे के बारे में तो कुछ नहीं कहा लेकिन उन्होंन फिस्कल डेफिसिट और फिस्कल कंसोलिडेशन पर जो लक्ष्य दिया है, वह मेरे मुताबिक बहुत ही विश्वसनीय है.
एनके सिंह ने कहा कि संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में जीडीपी के लांग टर्म लक्ष्य को साढ़े छह फीसदी से बढ़ाकर सात फीसदी कर दिया गया है. ऐसे में वित्तमंत्री ने फिस्कल कंसोलिडेशन पर जो रोडमैप दिया है, उसका इससे तालमेल बैठ रहा है. उन्होंने बजट को सही, विश्ववसनीय और जिम्मेदारी भरा बजट बताया.
वित्त आयोग के पूर्व प्रमुख ने बताया कि वित्तमंत्री ने कैपिटल एक्सपेंडिचर को एक लाख करोड़ बढ़ाने के साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखा है कि फिजिकल डेफिसिट और कर्ज का जो लक्ष्य रखा गया है, उसके साथ कोई समझौत न करना पड़े.
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में तीन कर्तव्यों का जिक्र किया है.
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या कहा है
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन कर्तव्यों का जिक्र किया.उनका मुताबिक पहला कर्तव्य है- उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हुए, उथल-पुथल भरी वैश्विक स्थिति के प्रति सहनीयता का निर्माण कर आर्थिक विकास को तेज करना और उसे बनाए रखना.
दूसरा कर्तव्य है- लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनके क्षमता का निर्माण करना. भारत की समृद्धि के मार्ग में उन्हें मजबूत भागीदार बनाना.
तीसरा कर्तव्य 'सबका साथ-सबका विकास' के विजन से जुड़ा है. यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र के पास संसाधनों, सुविधाओं और सार्थक भागीदारी के लिए अवसरों तक पहुंच की सुविधा हो.
ये भी पढ़ें: Budget 2026: बजट में चुनावी राज्यों को तोहफा, जानें तमिलनाडु, बंगाल और केरल-असम को क्या-क्या मिला
डिस्क्लेमर: लेखक 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष थे. वो राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके हैं. इस लेख में दिए गए विचार उनके निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.














