भारत-अमेरिका समझौता क्यों है 'फादर ऑफ ऑल डील्स'? समझिए- किन-किन सेक्टरों को होगा इससे फायदा

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में ट्रेड डील हुई है. इसके साथ ही भारतीय इम्पोर्ट पर टैरिफ भी घटकर 18% हो गया है. जानकार इसे 'फादर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हुआ है जिसमें अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है
  • फिक्की अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि इस डील से टेक्सटाइल, जेम्स ज्वेलरी और लेदर सेक्टर को सबसे अधिक लाभ होगा
  • कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के अनुसार भारत का टेक्सटाइल निर्यात इस डील से 20% तक बढ़ सकता है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

भारत और अमेरिका के बीच आखिरकार ट्रेड डील हो ही गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय इम्पोर्ट पर लगाए टैरिफ को घटाकर भी 18% कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ट्रंप ने तीन दिन पहले फोन पर बात की थी और इसके बाद डील का ऐलान किया. अमेरिका के साथ ये डील ऐसे वक्त हुई, जब कुछ दिन पहले ही भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ट्रेड डील हुई थी. भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा गया. लेकिन अब जब अमेरिका और भारत के साथ ये डील हुई तो एक्सपर्ट ने इसे 'फादर ऑफ ऑ डील्स' कहा है.

इस डील को लेकर फिक्की (FICCI) के अध्यक्ष और आरपीजी ग्रुप के वाइस चेयरमैन अनंत गोयनका ने कहा कि 'भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जो सहमति बनी है, वह भारतीय उद्योग जगत के लिए एक ट्रिपल बोनांजा है. इससे पहले भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ, फिर एक स्थिर और महत्वपूर्ण बजट संसद में पेश किया गया. हमारा आंकलन है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से एक्सपोर्ट और अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए नई संभावनाएं बनी हैं.'

वहीं, देश के एक्सपोर्टरों के सबसे बड़े संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) ने  इसे 'फादर ऑफ ऑल डील्स' करार देते हुए इसे गेम-चेंजर बताया है.

फिक्की के अध्यक्ष ने क्या कहा?

एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील से सबसे ज्यादा फायदा टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और लेदर सेक्टर को होगा. उन्होंने कहा कि ये व्यापार समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण रीसेट का प्रतीक है. 

उन्होंने कहा कि इस समझौते में व्यापार विश्वास को मजबूत करने और द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने की क्षमता है. अगर इसे सही तरीके से लागू किया जाता है तो इससे भारत का निर्यात बढ़ सकता है और बाजार पहुंच को व्यापक बना सकता है और दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच निरंतर सहयोग के रणनीतिक महत्व को रेखांकित कर सकता है.

टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 20% बढ़ सकता है: CITI

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज (CITI) का अनुमान है कि इस डील से भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 20% तक बढ़ सकता है.

Advertisement

CITI के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि 'यूरोपीय डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा गया. लेकिन अमेरिका के साथ हुआ सौदा ग्रांडमदर ऑफ ऑल डील्स है. भारत पर 50% टैरिफ एक ही बार में घटकर 18% हो गया है और अब यह अन्य सभी पड़ोसियों और कपड़ा प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में सबसे कम है. भारतीय परिधान और घरेलू कपड़ा निर्यात सेक्टर स्वर्ण युग में प्रवेश कर रहा है, जहां हमारे पास अपने सभी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में समान या बेहतर खेल का मैदान होगा. हम पांच या 10 फीसदी बढ़ोतरी की बात नहीं कर रहे हैं. यदि आप अगले 5 से 6 वर्षों में क्षमता निर्माण करने में सक्षम हैं, तो मैं परिधान निर्यात में 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी देख सकता हूं.'

उन्होंने कहा कि इस अवसर का फायदा उठाने के लिए टेक्सटाइल सेक्टर में एक्सपोर्टरों को अपनी वर्तमान क्षमताएं बढ़ानी होंगी, जिससे वो अमेरिका जैसे बड़े बाजार में मिले नए अवसर का फायदा उठा सकें.

Advertisement

क्यों है ये फादर ऑफ ऑल डील्स?

FIEO के अध्यक्ष एससी रल्हन ने भारत-अमेरिका समझौते को 'फादर ऑफ ऑल डील्स' बताया है. उन्होंने कहा कि 'अमेरिका ने सभी भारतीय निर्मित उत्पादों पर टैरिफ को घटाकर 18% करने पर सहमति व्यक्त की है, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और बढ़ावा देने और मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण और बड़ी उपलब्धि है. ये भारतीय निर्यातकों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर और गेम-चेंजर है, क्योंकि यह समझौता अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और सभी क्षेत्रों में भारत के निर्यात विकास को एक मजबूत प्रोत्साहन प्रदान करेगा.'

एक्सपोर्टरों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को दर्शाता है और भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से MSME के लिए बड़े स्तर पर नए अवसर खोलता है. एक्सपोर्टरों को उम्मीद है कि इस समझौते के लागू होने के बाद उन ऑर्डरों में बढ़ोतरी होगी जिन्हें पहले रोक दिया गया था.

Advertisement

FIEO का अनुमान है कि इस ट्रेड डील से इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा और परिधान, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, चमड़े के उत्पाद, रत्न और आभूषण, और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को टैरिफ घटने से काफी फायदा होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि कम टैरिफ न केवल मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करेंगे बल्कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में ज्यादा गहराई से एकीकृत होने में भी मदद करेंगे. यह समझौता क्षमता विस्तार को प्रोत्साहित करेगा, नए निवेश आकर्षित करेगा और एक्सपोर्ट के सेक्टर में रोजगार पैदा करने में मदद करेगा.

Featured Video Of The Day
Rahul Gandhi vs Ravneet Bittu: रवनीत बिट्टू को 'गद्दार' बोल फंसे राहुल गांधी | Parliament Session