10 लाख रुपये की कार खरीद तो ली पर अब पछता रहे हैं? हर महीने जेब काटेगा ये खर्च, Expert ने क्‍या समझाया?

एसवी वरुण सवाल उठाते हैं कि असली बात यह नहीं कि बैंक लोन देगा या नहीं. असली सवाल है कि क्या आप उस गाड़ी को झेल सकते हैं, या सिर्फ अपनी बचत और शांति कुर्बान कर रहे हैं.

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Car Loan EMI Tension: लोन लेकर कार खरीदने से पहले देख लीजिए ये कैलकुलेशन

कार खरीदी या फाइनेंशियल बर्बादी का टोकन ले लिया? आज हर दूसरा मिडिल क्लास प्रोफेशनल EMI देखकर 10 लाख रुपये की गाड़ी ले तो रहा है लेकिन दो महीने की किस्‍त भरने के बाद ही माथा पकड़ लेता है. स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार एसवी वरुण (SV Varun) बताते हैं कि वो हर महीने ऐसे लोगों से मिलते हैं जिन्होंने बैंक की हां सुनकर गाड़ी तो खरीद ली, लेकिन अब चलाने की कीमत चुका रहे हैं. EMI के कागज पर तो सब आसान लगता है पर असल जिंदगी में ये सिर्फ शुरुआत होती है.

ये कैलकुलेशन बढ़ाती है टेंशन 

10 लाख रुपये की कार पर 5 साल का लोन और 10 प्रतिशत ब्याज लगाइए तो EMI 21,250 रुपये की बैठेगी. लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं होता. इंश्‍योरेंस का खर्च, पेट्रोल का खर्च, मेंटेनेंस खर्च, टोल और पार्किंग वगैरह के खर्चे भी तो हैं. 

  • EMI- 21,250 रुपये
  • बीमा- 3,000 रुपये
  • पेट्रोल- 6,000 रुपये
  • मेंटेनेंस- 2,000 रुपये 
  • टोल, पार्किंग और छोटे-मोटे खर्च- 1,500 रुपये 

तो भइया, टोटल बिल हो गया, 33,750 रुपये. करीब 34 हजार रुपये का ये खर्च हर महीने सिर्फ उस गाड़ी के लिए जिसे आपने शौक से खरीदा था.

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया 

अब जरा सोचिए आपकी इनकम कितनी है. अगर आप 40,000 रुपये महीने कमाते हैं तो 85 फीसदी सैलरी सिर्फ गाड़ी में जा रही है. 
अगर आपकी सैलरी 80,000 रुपये है, तो भी अपनी सैलरी का 55 फीसदी हिस्‍सा केवल गाड़ी में जा रहा है. 
एक लाख रुपये हर महीने कमाकर भी आप 42 फीसदी केवल गाड़ी पर लुटा रहे हैं. 
और ये सब तब, जब आप न बीमार हैं, न कोई इमरजेंसी है, न बच्चों की फीस देनी है. ये खर्चे हुए तो आपको फिर से कर्ज लेने की नौबत आ जाएगी. है कि नहीं? जरा तफसील से सोचिएगा. 

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असल सवाल वो नहीं, जो आप सोच रहे! 

एसवी वरुण सवाल उठाते हैं कि असली बात यह नहीं कि बैंक लोन देगा या नहीं. असली सवाल है कि क्या आप उस गाड़ी को झेल सकते हैं, या सिर्फ अपनी बचत और शांति कुर्बान कर रहे हैं.

गाड़ी खरीदना अब शोऑफ से ज्‍यादा इमोशनल हाई बन चुका है. पर उस हाई के बाद हर महीने जो सच्चाई आती है, वो सिर्फ पछतावे की EMI होती है. वरुण कहते हैं, अगली बार शोरूम में कदम रखें तो खुद से पूछिए- क्या मैं गाड़ी खरीद रहा हूं या धीरे-धीरे फाइनेंशियली डूबने का प्लान बना रहा हूं. 

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