कचरा नहीं, खजाना है ये! गन्ने के वेस्ट से ऐसे खड़ा कर सकते हैं करोड़ों का ग्रीन बिजनेस, सरकार भी करेगी सपोर्ट

शुगरकेन (गन्ना) का पल्प वेस्ट आज इको-फ्रेंडली ट्रे और बॉक्स बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है. इनकी खास बात यह है कि ये ट्रे और बॉक्स पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल होते हैं और सिर्फ 7 दिनों में मिट्टी में मिल जाते हैं.

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Sugarcane Waste Business: कचरे से करोड़ों का बिजनेस

जिस चीज को आज तक हम कचरा समझकर फेंक देते थे, वही अब करोड़ों का इंटरनेशनल बिजनेस बन सकता है. शुगरकेन (गन्ना) का पल्प वेस्ट आज इको-फ्रेंडली ट्रे और बॉक्स बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है. इनकी खास बात यह है कि ये ट्रे और बॉक्स पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल होते हैं और सिर्फ 7 दिनों में मिट्टी में मिल जाते हैं. जब पूरी दुनिया प्लास्टिक पैकेजिंग से दूरी बना रही है, तब यह वेस्ट-टू-वेल्थ आइडिया आने वाले समय का एक बड़ा और सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल बनकर उभर रहा है.

क्या है शुगरकेन पल्प पैकेजिंग? (What is Sugarcane Pulp Packaging?)

शुगरकेन से जूस निकालने के बाद जो रेशा बचता है, उसे पल्प कहते हैं. इसी पल्प से बायोडिग्रेडेबल ट्रे, फूड बॉक्स और कंटेनर बनाए जाते हैं. ये प्रोडक्ट्स दिखने में मजबूत होते हैं और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित होते हैं.

क्यों बढ़ रही है इसकी डिमांड? (Why is the Demand Growing?)

आज प्लास्टिक पैकेजिंग पर दुनिया भर में बैन लग रहा है. कैफे, रेस्टोरेंट, ईको-ब्रांड्स और फूड चेन सस्टेनेबल ऑप्शन ढूंढ रहे हैं. शुगरकेन पल्प पैकेजिंग इसी जरूरत को पूरा करती है, इसलिए इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है.

कच्चा माल और लागत (Raw Material & Cost)

शुगरकेन पल्प वेस्ट 3 से 5 रुपये प्रति किलो में आसानी से मिल जाता है. इस बिजनेस को शुरू करने के लिए लगभग 50,000 रुपये के छोटे मोल्ड की जरूरत होती है. एक कंटेनर बनाने की लागत सिर्फ 1 से 3 रुपये आती है.

मुनाफा और इंटरनेशनल मार्केट (Profit & International Market)

क्वालिटी के हिसाब से यही कंटेनर इंटरनेशनल मार्केट में 5 से 12 रुपये प्रति पीस तक बिकता है. यानी मार्जिन काफी अच्छा है और सही प्लानिंग के साथ यह बिजनेस कुछ ही समय में बड़े लेवल पर पहुंच सकता है.

सरकार की मदद और स्कीम्स (Government Support & Schemes)

MSME और वेस्ट टू वेल्थ मिशन के तहत सरकार इस तरह के बिजनेस को सपोर्ट भी देती है. सब्सिडी, लोन और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं इस स्टार्टअप को और आसान बना देती हैं. कम लागत और बढ़ती ग्लोबल डिमांड के साथ शुगरकेन पल्प पैकेजिंग का यह मॉडल सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि पर्यावरण को बचाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है. सही प्लानिंग और सरकारी सहयोग के साथ यह बिजनेस आने वाले समय में लाखों नहीं, करोड़ों की कमाई का रास्ता खोल सकता है. 

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