जापान का यह फैसला कैसे तय करेगा आपके निवेश की दिशा, यहां समझ लीजिए

जापान अपने इंटरेस्ट रेट को बढ़ा सकता है. यह फैसला न केवल जापान, बल्कि क्रिप्टोकरेंसी, ETF, रियल एस्टेट, स्टॉक मार्केट और स्टार्टअप्स को भी प्रभावित कर सकता है. दरअसल, दुनिया की कई बड़ी मार्केट्स में सबसे ज्यादा निवेश जापान से जुड़ा हुआ है.

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दुनियाभर के निवेशकों के लिए शुक्रवार यानी 19 दिसंबर 2025 की तारीख बहुत अहम माना जा रहा है. इसकी मुख्य वजह जापान का संभावित इंटरेस्ट रेट पर फैसला है, जो न केवल जापान, बल्कि क्रिप्टोकरेंसी, ETF, रियल एस्टेट, स्टॉक मार्केट और स्टार्टअप्स को भी प्रभावित कर सकता है. असल में, दुनिया की कई बड़ी मार्केट्स में सबसे ज्यादा निवेश जापान से जुड़ा हुआ है, इसलिए पूरी दुनिया की नजर फिलहाल जापान पर टिकी हुई हैं. 

कितना है जापान का निवेश?

जापान ने 1980 के दशक के अंत में एक बड़े फाइनेंशियल क्राइसिस और 1990 के दशक की शुरूआत में डिफ्लेशन का सामना किया था. इस दौरान प्रॉपर्टी और शेयर मार्केट क्रैश हो आगे थे. अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए बैंक ऑफ जापान ने पिछले करीब 30 सालों तक आक्रामक मौद्रिक नीति अपनाई, जहां इसने इंटरेस्ट रेट को जीरो या माइनस में रखा. 

इसका नतीजा यह हुआ कि जापान में करेंसी सस्ती हो गई. निवेशकों ने येन में कर्ज लिया, उसे डॉलर में बदला और अमेरिका सहित दुनियाभर की मार्केट्स, जैसे - शेयर, कमोडिटीज, रियल एस्टेट और स्टार्टअप्स में निवेश कर दिया. ऑफिसियल डेटा के अनुसार, जापान ने करीब 3 ट्रिलियन डॉलर विदेशी मार्केट्स में लगाया हुआ है. हालांकि,  कई अनुमान इस अमाउंट को 20 ट्रिलियन डॉलर तक बताते हैं.

हाल ही में बैंक ऑफ जापान ने संकेत दिया है वह करीब 550 बिलियन डॉलर के ETFs धीरे-धीरे बेच सकता है. इस बयान ने बाजारों में घबराहट पैदा कर दी, क्योंकि पहले कहा गया था कि ऐसी बिक्री 100 सालों में चरणबद्ध तरीके से होगी ताकि बाजार पर दबाव न पड़े.

ब्याज दर बढ़ी तो क्या होगा असर

मौजूदा समय में तस्वीर इसलिए बदल रही है, क्योंकि जापान में भी महंगाई बढ़ने लगी है. जहां बैंक ऑफ जापान का लक्ष्य 2% महंगाई का था, वहीं यह आंकड़ा 3% के आसपास मंडरा रहा है. ऐसे में जापान को भी ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. अगर जापान में ब्याज दर बढ़ती है, तो निवेशक फिर से जापान का रुख कर सकते हैं और अमेरिका तथा इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालना शुरू हो सकता है. अमेरिकी बाजारों में ही जापानी निवेश 1.2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, तो सोचिए, अगर यह निवेश वापस जाने लगा, तो बाजारों पर कितना दबाव पड़ेगा.

क्रिप्टो पर भी दवाब 

इतिहास गवाह है कि जब-जब जापान में ब्याज दरों में बढ़ोतरी हुई है, तब-तब बिटकॉइन में 20–25% तक की गिरावट देखने को मिली है. भले ही अभी कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ हो, लेकिन मार्केट्स पहले से ही इसे लेकर अनुमान लगाने लगे हैं. यही वजह है कि क्रिप्टो सहित तमाम जोखिम भरे एसेट्स में कमजोरी दिख रही है.

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कुल मिलाकर, 19 दिसंबर को जापान की ओर से आने वाला कोई भी फैसला आपके पोर्टफोलियो की दिशा तय कर सकता है, चाहे आप शेयर बाजार में हों, क्रिप्टो में या रियल एस्टेट में. निवेशकों के लिए यह निगरानी और सतर्क रहने समय है.

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