मिडिल ईस्ट में बढ़ते जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी उथल-पुथल का असर अब केवल वैश्विक तेल बाजारों तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर अब भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट पर पड़ता दिख रहा है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मिडिल ईस्ट के इस टेंशन ने घर बनाने की कॉस्ट और खरीदारों के सेंटिमेंट, दोनों में बड़ा बदलाव आया है. आने वाले समय में रियल एस्टेट में महंगाई का असर देखने को मिलेगा.
कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में बड़ी बढ़ोतरी
रियल एस्टेट कंपनी अनारॉक की एक रिपोर्ट बताती है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट की वजह से जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है. इसकी वजह से सीमेंट, स्टील आदि को पहुंचने में अब पहले से 10–20 दिन ज्यादा लग रहे हैं. इसके अलावा शिपिंग का खर्च भी बढ़ गया है. हर कंटेनर पर करीब 1.5 लाख से 3.5 लाख रुपये तक ज्यादा देना पड़ रहा है. वहीं, समुद्री ईंधन महंगा होने से कच्चे माल, खासकर स्टील की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी हो गई है. स्टील की कीमत अब 72 हजार रुपये प्रति टन से भी ऊपर पहुंच गई है.
डेवलपर्स के लिए मुश्किल समय
रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची इमारत बनाने की कॉस्ट प्रति वर्ग फुट करीब 50 रुपये बढ़ने वाली है. मुंबई जैसे शहर में जहां पहले से ही 10,000 से ज्यादा लग्जरी फ्लैट बन रहे हैं, ये बढ़ी हुई लागत पूरे प्रोजेक्ट को काफी महंगा कर सकती है. इससे डेवलपर्स की प्लानिंग और बजट दोनों पर दबाव पड़ेगा.
लग्जरी मार्केट और NRI खरीदारों पर असर
मुंबई का प्रीमियम प्रॉपर्टी मार्केट काफी हद तक एनआरआई खरीदारों पर निर्भर करता है. कुल लग्जरी बिक्री में उनका हिस्सा 15% से 22% होता है. लेकिन अभी रुकावट और आर्थिक अनिश्चितता की वजह से कई NRI खरीदार वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं, यानी वे खरीदने से पहले हालात साफ होने का इंतजार कर रहे हैं. 5 से 10 करोड़ रुपये वाले सेगमेंट में खरीदार अब पहले की तुलना में ज्यादा सोच-समझकर सौदे फाइनल कर रहे हैं. मार्केट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है पर लोग प्रॉपर्टी साइट्स पर सिर्फ देखने जा रहे हैं, इन्हें कोल्ड विजिट्स कहा जा रहा है, जिसमें वो तुरंत खरीदने से बच रहे हैं.
तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का खतरा
दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर जाता है. यहां टेंशन बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ गया है. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ जाती है. यानी महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है अगर ये स्थिति ज्यादा समय तक चली, तो होम लोन की ब्याज दरें कम होने की उम्मीद भी कम हो जाएगी. ये खबर खास तौर पर मिडिल क्लास के घर खरीदने वालों के लिए बुरी खबर होगी, क्योंकि इससे उनका बजट बिगड़ना तय है.














