स्मार्टफोन कंपनियों से 'सीक्रेट कोड' मांगने की खबर पर सरकार ने तोड़ी चुप्पी, वायरल दावे को बताया फेक, आपकी प्राइवेसी पर कोई खतरा नहीं

सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार एप्पल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों पर उनके फोन का 'सोर्स कोड' शेयर करने के लिए दबाव बना रही है.सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह गलत और गुमराह करने वाला बताया है.

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Smartphone Source Code News:सरकार ने बताया कि मोबाइल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कंपनियों के साथ बातचीत करना एक सामान्य प्रक्रिया है.
नई दिल्ली:

PIB Fact Check: पिछले कुछ दिनों से मोबाइल की दुनिया में एक खबर तेजी से फैल रही है कि भारत सरकार एप्पल और सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियों पर दबाव बना रही है कि वे अपने फोन का 'सोर्स कोड' यानी वो गुप्त कोडिंग जिससे फोन चलता है, सरकार के साथ शेयर करें. कहा जा रहा था कि सरकार सुरक्षा के नाम पर फोन के सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव कराना चाहती है. इस खबर ने स्मार्टफोन यूजर्स के बीच खलबली मचा दी .

लेकिन PIB Fact Check ने इस दावे की सच्चाई सामने ला दी है.पीआईबी ने इसे पूरी तरह 'फेक' (Fake) बताया है और साफ किया है कि सरकार ने ऐसा कोई भी प्रस्ताव पेश नहीं किया है.

सरकार ने इन सभी खबरों को पूरी तरह गलत और गुमराह करने वाला बताया है. सरकार का कहना है कि लोगों के बीच डर पैदा करने के लिए इस खबर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि सच्चाई कुछ और ही है.

खबर को सनसनीखेज बनाने की कोशिश

आईटी मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने बिना किसी सबूत के यह दावा किया है. सरकार ने साफ किया कि इन रिपोर्ट्स में न तो किसी मोबाइल कंपनी का बयान है और न ही कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं की बात सुनी गई है. 

मंत्रालय के अनुसार, खबर को सनसनीखेज बनाने के लिए जानबूझकर अधूरी जानकारी दी गई है. सरकार का मकसद नागरिकों की प्राइवेसी यानी निजी जानकारी को सुरक्षित रखना है, न कि उसे खतरे में डालना.

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सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बातचीत 

सरकार ने बताया कि मोबाइल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कंपनियों के साथ बातचीत करना एक सामान्य प्रक्रिया है. आईटी मंत्रालय समय-समय पर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के साथ मीटिंग करता रहता है. इन बैठकों में फोन की सेफ्टी, नेटवर्क की ताकत, भारतीय भाषाओं का सपोर्ट और सिक्योरिटी मानकों जैसे विषयों पर चर्चा होती है. सरकार का कहना है कि यह बातचीत कोई नई नहीं है और सालों से चली आ रही है, ताकि यूजर्स का डेटा सुरक्षित रहे और साइबर हमलों से बचा जा सके.

कंपनियों की संस्था (ICEA) ने क्या कहा?

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों की संस्था (ICEA) ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा है कि सरकार के साथ चल रही ये बातचीत किसी नए नियम का हिस्सा नहीं है और न ही यह कोई अचानक लिया गया फैसला है. यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें कंपनियां और सरकार मिलकर तकनीकी चुनौतियों को समझने की कोशिश करते हैं. इसलिए ग्राहकों को यह सोचकर परेशान होने की जरूरत नहीं है कि रातों-रात उनके फोन की सुरक्षा या कोडिंग में कोई बड़ा बदलाव होने जा रहा है.

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सरकार और कंपनियों के बीच तालमेल का भरोसा

आईटी मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि वे कंपनियों की हर तकनीकी दिक्कत और परेशानी को सुनने के लिए तैयार हैं. सरकार का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित माहौल बनाना है जहां देश की सुरक्षा भी बनी रहे और कंपनियों को काम करने में भी कोई दिक्कत न आए. मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि वह सभी पक्षों की बातों को खुले मन से सुनेगा और देश के साथ-साथ कंपनियों के हित में ही फैसला लेगा. फिलहाल, सोर्स कोड शेयर करने जैसा कोई भी अनिवार्य नियम नहीं लाया गया है.
 

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