ईरान युद्ध से सऊदी-रूस की तेल कंपनियों को बड़ा फायदा, हर घंटे हो रही 250 करोड़ रुपये तक की बंपर कमाई

Iran War Impact on Oil Prices : मिडिल ईस्ट संकट के बीच तेल कंपनियों को रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा हो रहा है. ग्लोबल तनाव के बीच हर घंटे ₹250 करोड़ की एक्स्ट्रा कमाई हो रही है. जिसमें सऊदी अरामको और रूस की दिग्गज कंपनियों को बड़ा फायदा मिला है.

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Middle East War Update: दुनिया की टॉप 100 एनर्जी कंपनियों ने मार्च महीने में मिलकर करीब $23 अरब का अतिरिक्त मुनाफा कमाया.
नई दिल्ली:

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव का सीधा फायदा दुनिया की बड़ी तेल और गैस कंपनियों को मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते मार्च महीने में टॉप एनर्जी कंपनियों ने मिलकर हर घंटे करीब $30 मिलियन  यानी लगभग 250 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कमाई की. इस अचानक बढ़ी कमाई ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या ऐसे समय में कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाया जाना चाहिए.

मार्च में तेल कंपनियों को मिला $23 अरब का अतिरिक्त मुनाफा

The Guardian की रिपोर्ट, जिसमें Rystad Energy और Global Witness के डेटा का हवाला दिया गया है, बताती है कि दुनिया की टॉप 100 एनर्जी कंपनियों ने मार्च महीने में मिलकर करीब $23 अरब का अतिरिक्त मुनाफा कमाया.यह बढ़ोतरी उस समय देखने को मिली जब 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी.

सऊदी अरामको को 2026 में मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

इस अतिरिक्त कमाई में सबसे आगे सऊदी अरामको रहने की उम्मीद है. अनुमान है कि अगर मौजूदा कीमतों का ट्रेंड जारी रहता है, तो कंपनी को 2026 में अकेले $25.5 अरब तक का अतिरिक्त मुनाफा हो सकता है.सऊदी अरामको पिछले कई सालों से मजबूत कमाई करती रही है और 2016 से 2023 के बीच कंपनी की औसत दैनिक कमाई करीब $250 मिलियन प्रति दिन रही है.

रूस की बड़ी एनर्जी कंपनियों को भी बड़ा फायदा

रूस की प्रमुख एनर्जी कंपनियां जैसे Gazprom, Rosneft और Lukoil भी इस स्थिति से बड़ा फायदा उठा सकती हैं.अनुमान है कि इन कंपनियों की टोटल एक्स्ट्रा कमाई साल के अंत तक $23.9 अरब तक पहुंच सकती है. यह बढ़ोतरी खास तौर पर युद्ध जैसे माहौल में बने मजबूत एक्सपोर्ट से जुड़ी हुई है.

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Strait of Hormuz में सप्लाई चिंता से बढ़ी तेल की कीमतें

तेल बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह सप्लाई को लेकर चिंता भी रही. खास तौर पर  स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज ( Strait of Hormuz) के आसपास संभावित बाधाओं ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी थी.यह इलाका दुनिया के लिए बेहद अहम तेल ट्रांजिट रूट माना जाता है, इसलिए यहां तनाव बढ़ते ही कीमतों पर असर तुरंत दिखाई देता है.

अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाने की मांग फिर तेज

तेल कंपनियों की इस तेज कमाई के बाद कई जगहों पर यह बहस फिर शुरू हो गई है कि क्या सरकारों को ऐसे विंडफॉल प्रॉफिट पर अतिरिक्त टैक्स लगाना चाहिए.साथ ही, बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए भी कदम उठाने की मांग तेज हो गई है.

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US-Iran तनाव कम होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में गिरावट

आज यानी गुरुवार 16 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज के आसपास जहाजों को गुजरने देने की संभावना जताए जाने से सप्लाई बाधा की चिंता कुछ कम हुई है.इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ( Brent crude ) की कीमत 44 सेंट (0.5%) गिरकर $94.49 प्रति बैरल रह गई, जबकि WTI क्रूड की कीमत 70 सेंट (0.8%) गिरकर $90.59 प्रति बैरल पर आ गई.
 

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