मस्‍क की दीवानगी देख दुनिया ने समझा 'मूर्ख-पागल', कबाड़ खरीदने निकले थे, बना डाली 2.2 ट्रिलियन डॉलर की SpaceX

एलन मस्‍क आज दुनिया के सबसे रईस आदमी हैं. Bloomberg Billionaires Index के मुताबिक, उनके आस-पास कोई नहीं. SpaceX के IPO की बदौलत वे दुनिया के पहले खरबपति बन चुके हैं. लेकिन SpaceX के 2.2 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनने के पीछे की कहानी दिलचस्‍प है.

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Elon Musk SpaceX Success Story: एलन मस्‍क की कामयाबी की कहानी
Source: NDTV Graphics/Canva

करीब 25 साल पहले की बात है. कॉलेज में एलन मस्‍क के रूममेट रहे एडियो रेसी ने कहा- 'भाई! कुछ भी कर ले, पर ये रॉकेट बनाने का सपना बेवकूफी है. एडियो ने तो कैलिफोर्निया के एक होटल में स्‍पेस एक्‍सपर्ट्स को केवल इसलिए जुटा लिया था, ताकि मस्‍क को ये समझाया जा सके कि प्राइवेट स्पेसफ्लाइट में पैसा लगाना कुएं में पैसे फेंकने जैसा है. लेकिन मस्‍क कहां ही मानने वाले थे. आज जब आप एलन मस्क को दुनिया के पहले 'ट्रिलियनेर' (100 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा के मालिक) के रूप में देख रहे हैं, तो आपको क्‍या लगता है कि ये सब बहुत आसान रहा होगा?

उस दिन होटल के एक कमरे में उनके रूममेट थे, कई सारे स्‍पेस एक्‍सपर्ट्स थे, उन्‍होंने सुनी सबक, लेकिन की अपने मन की. आज उसी 'दीवानगी', उसी 'पागलपन' का नतीजा है- 2.2 ट्रिलियन डॉलर (करीब 187 लाख करोड़ रुपये) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX). 

मस्‍क को भी महज 10% ही उम्‍मीद थी!

टेक्सास में SpaceX की ऐतिहासिक लिस्टिंग के मौके पर 54 वर्षीय मस्क ने भी माना कि उन्हें खुद इस कंपनी के कामयाब होने की सिर्फ 10% उम्मीद थी. मस्क ने कहा, 'मैंने लोगों से साफ कह दिया था कि ये आइडिया शायद फेल हो जाएगा, लेकिन हमें एक कोशिश जरूर करनी चाहिए.' 

स्‍क्रैप खरीदने रूस गए तो मिली दुत्‍कार 

शुरुआत बेहद मामूली थी. न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क और उनके दोस्त सिर्फ मंगल ग्रह (Mars) पर एक छोटा सा ग्रीनहाउस भेजना चाहते थे, ताकि लोग वहां हरी पत्तियां उगते देखें और अमेरिकी सरकार स्पेस बजट बढ़ा दे. इसके लिए मस्क पुराना और सस्ता इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल खरीदने रूस गए. लेकिन रूसियों ने उन्हें दुत्कार कर भगा दिया.

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मस्‍क के पास नया रॉकेट बनाने का न तो अनुभव था और न ही उतना बजट. इसलिए वे रूस (Russia) गए थे. वहां उनका मकसद कोई नया या आधुनिक रॉकेट खरीदना नहीं था, बल्कि वे रूस की पुरानी और रिटायर हो चुकी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) को सस्ते दाम में खरीदना चाहते थे, ताकि उनमें बदलाव करके अपना काम निकाल सकें. आम बोलचाल में सेना या सरकार के ऐसे पुराने, रिटायर हो रहे सामान को खरीदने की कोशिश के लिए 'कबाड़' या 'स्क्रैप' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. 

जब मस्क रूसियों के पास पुरानी मिसाइलें खरीदने गए, तो वहां के अधिकारियों ने मस्क को कोई गंभीर बिजनेसमैन नहीं समझा. उन्होंने मस्क को खाली हाथ और दुत्कार कर भगा दिया था. रूसियों की नजर में भी वो डील किसी कबाड़ या फालतू चीज से ज्यादा नहीं था, जिसे वो एक नए लड़के को बेचने को तैयार नहीं थे. लौटती फ्लाइट में मस्क ने अपने साथियों से कहा, 'अगर कोई मिसाइल नहीं देगा, तो रॉकेट हम खुद बनाएंगे.'

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तीन लगातार फेलियर और आखिरी दांव

स्पेसएक्स के शुरुआती दिन बेहद डरावने थे. कंपनी का पहला छोटा रॉकेट था 'फाल्कन 1' (Falcon 1). प्रशांत महासागर के एक द्वीप से इसके पहले दो लॉन्च बुरी तरह फेल रहे. कंपनी के पास पैसे खत्म हो रहे थे.

elon musk spacex ipo launch

NYT की रिपोर्ट में मस्क के पुराने दोस्त रॉबर्ट जुब्रिन याद करते हैं कि तीसरा लॉन्च भी फेल हो गया. तब मस्क के पास सिर्फ एक आखिरी शॉट के पैसे बचे थे. अगर चौथा लॉन्च भी फेल हो जाता, तो वो SpaceX का परमानेंट द एंड हो जाता. लेकिन सितंबर 2008 में चौथे प्रयास ने इतिहास रच दिया- फाल्कन 1 सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंच गया.

नासा का साथ और स्टारलिंक का राज

इस कामयाबी के बाद अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने SpaceX पर भरोसा जताया और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक सामान पहुंचाने का बड़ा टेंडर दे दिया. इसके बाद तो मस्क ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2010 में बड़ा रॉकेट 'फाल्कन 9' आया और फिर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने का सिलसिला शुरू हुआ. मस्‍क की अब तो निकल पड़ी थी.

मस्क ने अंतरिक्ष में भेजने का खर्च इतना कम कर दिया कि पूरी दुनिया के सैटेलाइट मस्क के रॉकेट से जाने लगे. इसी सस्ते ट्रांसपोर्ट का फायदा उठाकर 2019 में मस्क ने 'स्टारलिंक' (Starlink) की शुरुआत की. आज दुनिया के कोने-कोने में सैटेलाइट से हाई-स्पीड इंटरनेट देने वाली ये कंपनी SpaceX की सबसे बड़ी कमाई का जरिया है.

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मस्‍क मंगल ग्रह पर बस्‍ती बसाना चाहते हैं.

मस्‍क का सपना, मंगल पर मोहल्‍ला 

मस्क का सपना अब सिर्फ सामान भेजना नहीं, बल्कि इंसानों की नई बस्ती बसाना है. इसके लिए दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट 'स्टारशिप' (Starship) तैयार हो रहा है. हालांकि मस्क के वादे के मुताबिक 2025 तक मंगल मिशन मुमकिन नहीं दिख रहा और नासा के अनुसार इंसानों का मंगल पर पहुंचना 2030 के मध्य तक ही संभव होगा, लेकिन मस्क की जिद जारी है. हाल ही में इसका 12वां टेस्ट काफी हद तक सफल रहा.

स्पेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि मस्क ने अंतरिक्ष के लिए एक ऐसा 'हाईवे' बना दिया है, जिस पर चलकर आने वाले समय में दुनिया की एक पूरी नई इकोनॉमी खड़ी होने वाली है. जो कल तक एक मजाक था, आज वो दुनिया का सबसे बड़ा सच बन चुका है.

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Source: NDTV Research/ NYT/  

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