DA Hike: सरकार ने लाखों कर्मचारियों और पेंशन होल्डर्स को खुश करते हुए DA में 2 फीसदी का इजाफा तो कर दिया है, पर कहीं ना कहीं टैक्स की देनदारी आपको परेशान कर सकती है. सवाल ये है कि क्या डीए बढ़ने पर टैक्स भी बढ़ेगा? कई टैक्सपेयर्स के मन में ये सवाल है. चलिए इस खबर में इन सभी सवालों के जवाब देते हैं.
क्या है महंगाई भत्ता (DA)?
पहले ये जानिए डीए होता है. दरअसल डीए यानी महंगाई भत्ता बेसिक सैलरी का ही एक हिस्सा होता है. हर साल महंगाई की दर बढ़ती है, इसी के अनुसार सरकार महंगाई भत्ते को बढ़ाती है. चाहे सरकारी कर्मचारी हो या पेंशन होल्डर्स, सभी को इसका फायदा मिलता है. आसान भाषा में कहें महंगाई भत्ता रोजमर्रा के खर्चों को कवर करने के लिए बनाया गया है. हर 6 महीने में सरकार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स को देखते हुए इसमें चेंज करती है.
महंगाई भत्ते पर टैक्स का असर
अपने सवाल पर आएं तो बिल्कुल महंगाई भत्ता बढ़ने से टैक्स की देनदारी बढ़ती है. जैसा आपको पहले बताया कि महंगाई भत्ता बेसिक सैलरी का ही एक हिस्सा होता है. जब डीए बढ़ता है तो सैलरी में सीधे तौर पर इजाफा होता है. ऐसे में रिजीम के अनुसार और स्लैब के अनुसार सैलरी पर टैक्स लगता है. कह सकते हैं डीए पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आता है. डिपार्टमेंट की तरफ से इस पर कोई छूट या डिडक्शन नहीं मिलती.
डीए पर कितना टैक्स
महंगाई भत्ते पर कितना टैक्स लगेगा, इसके लिए अलग से कोई फॉर्मूला नहीं है. रिजीम में स्लैब के हिसाब से इसका कैलकुलेशन किया जाता है. बेसिक पे अगर आपकी बढ़ती है तो टैक्स के दायरे में भी इजाफा होगा. हां, अगर आप पुरानी रिजीम में है और अच्छा खासा निवेश किया हुआ है तो इसका फायदा आपको मिल जाएगा. टैक्स की देनदारी कुछ हद तक कम हो जाएगी.
क्या प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को मिलेगा इसका फायदा?
अभी सरकारी कर्मचारियों को ही महंगाई भत्ते का फायदा मिलता है. प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने वाले कर्मचारियों के लिए कोई नियम नहीं है. उनके लिए कंपनी महंगाई की दर को कवर करने के लिए सैलरी में इंक्रीमेंट हर साल करती रहती हैं.













