मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का सीधा असर अब तेल की कीमतों पर दिखने लगा है. अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मच गया है. सोमवार को जैसे ही बाजार खुला, कच्चे तेल (Crude Oil Price) की कीमतों ने पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. ईरान के पास स्थित होर्मुज स्ट्रेट जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां जहाजों की आवाजाही रुकने से तेल सप्लाई ठप होने का डर पैदा हो गया है.
एक झटके में 13% महंगा हुआ कच्चा तेल
सोमवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 13% की भारी उछाल के साथ $82 प्रति बैरल पर पहुंच गईं. यह जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. वहीं अमेरिकी तेल (WTI) भी $72 के करीब ट्रेड कर रहा है. बाजार में यह अफरा-तफरी इसलिए मची है क्योंकि ईरान के पास मौजूद समुद्री रास्ते से टैंकरों का निकलना बंद हो गया है.
शिपिंग कंपनियों को डर है कि उनके जहाजों पर हमले हो सकते हैं, इसलिए उन्होंने फिलहाल इस रास्ते से दूरी बना ली है.
सप्लाई रुकने से $100 तक पहुंच सकते हैं तेल के दाम
मिडिल ईस्ट का यह समुद्री रास्ता दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन माना जाता है. यहां से न केवल कच्चा तेल बल्कि भारी मात्रा में गैस (LNG) की भी सप्लाई होती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह रास्ता बंद रहा, तो रोजाना 80 लाख से 100 लाख बैरल तेल की कमी हो जाएगी. इस कमी को पूरा करना किसी भी देश के लिए नामुमकिन होगा.
ऐसी स्थिति में तेल की कीमतें $90 से $100 प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा.
भारत के लिए बढ़ सकती है मुश्किल
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भारत का बजट बिगड़ सकता है. भारत के पास फिलहाल पर्याप्त मात्रा में तेल का स्टॉक मौजूद है. हालांकि, ओपेक (OPEC+) देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है, लेकिन अगर समुद्री रास्ता ही बंद रहा तो बढ़ा हुआ उत्पादन भी बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा. मिडिल ईस्ट से चीन, भारत और जापान को होने वाली सप्लाई पर फिलहाल तलवार लटकी हुई है, जो आने वाले दिनों में महंगाई को और बढ़ा सकती है.














