बजट से पहले क्‍यों सहमा रहता है बाजार? क्‍या कहते हैं 10 साल के आंकड़े

Share Market after Budget: अनिश्चितताओं के चलते बजट से पहले आमतौर पर मार्केट डाउन रहता है. हालांकि बजट पेश होने के बाद शानदार तेजी बाजार में रहती है.

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Share Market after Budget: शेयर बाजार में आजकल एक ही चर्चा है,'बजट 2026'. अब बस कुछ ही घंटों में पता चल जाएगा कि वित्त मंत्री के पिटारे में से क्या निकलता है. इसके साथ ही दलाल स्ट्रीट पर धड़कनें तेज हो गई हैं. शुक्रवार को सेंसेक्स 297 अंक लुढ़का और निफ्टी भी 25,320 के स्तर पर सहमा हुआ बंद हुआ. लेकिन सवाल यह है कि बजट से पहले बाजार इतना नर्वस क्यों हो जाता है? इस खबर में आपको उन 4 वजहों के बारे में बताते हैं, जो बजट से पहले बाजार को परेशान करने वाली हो सकती हैं. 

अनिश्चितता का डर

शेयर बाजार को अनिश्चितता शब्द बिल्कुल पसंद नहीं है. बजट में सरकार क्या नया नियम लाएगी, यह कोई नहीं जानता. निवेशकों के मन में डर रहता है कि क्या किसी सेक्टर (जैसे ऑटो या बैंकिंग) के लिए कोई निगेटिव खबर आएगी? जब तक तस्वीर साफ नहीं होती, बड़े निवेशक पैसा लगाने के बजाय 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपनाते हैं.

न्यूज पर बेचो की कहावत

बाजार में एक पुरानी कहावत है: "Buy on rumor, sell on news." बजट से एक-दो महीने पहले ही कई लोग इस उम्मीद में खरीदारी शुरू कर देते हैं कि बजट अच्छा होगा. जब बजट का दिन पास आता है, तो वे अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचना शुरू कर देते हैं. इस मुनाफावसूली की वजह से कीमतें गिरने लगती हैं.

राजकोषीय घाटा की चिंता

बड़े विदेशी निवेशक (FIIs) यह देखते हैं कि सरकार अपनी कमाई से ज्यादा खर्च तो नहीं कर रही. अगर बजट में सरकार के कर्ज बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तो अर्थव्यवस्था की सेहत बिगड़ने के डर से विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालने लगते हैं, जिससे बाजार गिर जाता है.

भारी उम्मीदों का बोझ

कभी-कभी बाजार बजट से इतनी ज्यादा उम्मीदें लगा लेता है कि सरकार के लिए उन्हें पूरा करना मुश्किल होता है. अगर बजट अच्छा भी हो, लेकिन वह बाजार की 'बहुत ज्यादा' उम्मीदों पर खरा न उतरे, तो भी निवेशक निराश होकर बिकवाली करने लगते हैं.

शुक्रवार को कैसी रही बाजार की चाल

शुक्रवार का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव से भरा रहा. जहां टाटा स्टील 4.57% टूटकर सबसे ज्यादा बिकावाली वाला शेयर रहा, वहीं आईसीआईसीआई बैंक और इन्फोसिस ने भी बाजार पर दबाव बनाया.

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क्यों गिरे दिग्गज? 

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़त और रुपये की कमजोरी ने आईटी सेक्टर की कमर तोड़ दी. वहीं, डॉलर के मजबूत होने से सोना-चांदी और मेटल शेयरों में भी निवेशकों ने बिकवाली की.

कौन खरीद रहा, कौन बेच रहा?

  • विदेशी निवेशक ने गुरुवार को ₹393.97 करोड़ के शेयर बेचे.
  • घरेलू संस्थागत निवेशकों ने मोर्चा संभाला और ₹2,638.76 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को बहुत बड़ी गिरावट से बचा लिया.

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि, "वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ के दबाव के बीच, अब सबकी नजरें राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक ग्रोथ के रोडमैप पर हैं जो बजट से साफ होगा.".

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