Budget 2026 Defense: ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया 'धुरंधर' रक्षा बजट, जानिए डिफेंस पर कितना खर्च करेगी सरकार

Budget 2026 Defence Allocation: भारत सरकार ने खासतौर पर हथियार, सैन्य उपकरण और आधुनिक तकनीक की खरीद के लिए अपने कैपिटल बजट को लगातार बढ़ाया है.

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Budget 2026 Defence Allocation: डिफेंस सेक्टर को बजट 2026 में क्या मिला?

Budget 2026 Sector Defence Allocation: भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2027 के लिए बजट पेश किया. रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया. कैपिटल आउटले बजट के तहत रक्षा बलों को आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे. कुल मिलाकर, रक्षा मंत्रालय के बजटीय आवंटन में 15 प्रतिशत की वृद्धि होगी. रक्षा के क्षेत्र में कैपिटल आउटले में 21.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 25-26 में 1.80 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है

  • रक्षा बजट (सिविल) पिछले साल के 28,554.61 करोड़ रुपये की तुलना में 0.45 फीसदी कम किया गया है.
  • रक्षा सेवाओं (रेवेन्यू) और कैपिटल आउटले को क्रमशः 3,65,478.98 करोड़ रुपये और 2,19,306.47 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो 17.24 प्रतिशत और 21.84 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है.
  • रक्षा पेंशन के लिए आवंटन में भी वृद्धि देखी गई, केंद्र ने इस बार 1,71,338.22 करोड़ रुपये आवंटित किए.
नोट- कैपिटल आउटलेट (Capital Outlay) का अर्थ संपत्ति, बुनियादी ढांचे, या उपकरणों जैसी स्थायी संपत्तियों को खरीदने, सुधारने या बढ़ाने के लिए किया गया बड़ा निवेश या पूंजीगत खर्च है.

पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के बाद का यह पहला बजट है. यह पहले से ही माना जा रहा था कि ऑपेरशन सिंदूर की सफलता के बाद सरकार सेनाओं के लिए अब कुछ बड़ा करने वाली है.

भारत सरकार ने खासतौर पर हथियार, सैन्य उपकरण और आधुनिक तकनीक की खरीद के लिए अपने कैपिटल बजट को लगातार बढ़ाया है. ऑपेरशन सिंदूर में ही सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकाने पर हमला कर पाक को घुटने टेकने में मजबूर कर दिया था.

पिछले साल रक्षा क्षेत्र में करीब 5.67 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए

पिछले साल रक्षा मंत्रालय बजट को खर्च के लिए 5.67 लाख करोड़ रुपये (संशोधित करके) मिले थे. अब सरकार ने इसे और बढ़ा दिया है. इसबार बजट में रक्षा क्षेत्र में 5.94 लाख करोड़ खर्च का अनुमान लगाया गया है. इसके बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह हाल के सालों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां हैं. पाकिस्तान और चीन का गठजोड़ तो है ही, उसपर से चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों की वजह से भारत पूरी तरह तैयार रहना चाहता है. इस रिकॉर्ड बजट से भारत की सेनाओं का जोर शोर  से आधुनिकीकरण होगा. 

इस बजट का बड़ा हिस्सा नये हथियार, फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम, रडार और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरण खरीदने पर खर्च होगा.

लगभग आधा बजट सैलरी पर खर्च होता है

सुरक्षा विशेषज्ञों की मानें तो हाल के सालों में भारत को जिस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है उसमें भारत को जीडीपी का 3 से 4 फीसदी रक्षा पर खर्च करना चाहिए. रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने भी जीडीपी का 3 फीसदी खर्च करने का सुझाव दिया है. वैसे भी रक्षा बजट के कुल आवंटन का 46 फीसदी सैलेरी पर खर्च हो जाता है. 24 फीसदी पेंशन पर और केवल 26 फीसदी ही रकम सेनाओं के आधुनिकरण और जरूरतों पर खर्च किया जाता है.

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