Budget 2026: बीजेपी ने बताया गेम-चेंजर, अखिलेश और कांग्रेस बोली- निराशाजनक

केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रस्तुत होते ही राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तेज़ हो गई हैं. जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बजट को विकसित भारत का संकल्प बताया, वहीं कांग्रेस और सपा ने इसे निराशाजनक बताया.

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नई दिल्ली:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश कर दिया है. बजट के आंकड़े और घोषणाएं सामने आने के बाद जहां केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इसे भारत को विकसित राष्ट्र की दिशा में ले जाने वाला मास्टरप्लान बता रही है, वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी दलों ने इसे फीका, निराशाजनक बताया है. बजट में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कई पहल की घोषणा की गई. 

हर वर्ग को सशक्त करने वाला बजट: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह बजट साबित करता है कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है. शाह ने कहा कि हर क्षेत्र और हर नागरिक को सशक्त करने का विस्तृत ब्लूप्रिंट इस बजट में दिखता है. उन्होंने इसे “विकसित भारत बजट” करार दिया और दावा किया कि यह देश को हर क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति तक पहुंचाने का विजन प्रस्तुत करता है.

गरीब, किसान और युवा फिर उपेक्षित: अखिलेश यादव

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट को लेकर तीखा हमला बोला. उनका कहना है कि जिस सरकार से कोई उम्मीद नहीं, उसके बजट से क्या आशा की जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक के बजट सिर्फ 5% लोगों के हित में बनाए गए हैं, जबकि गरीब, किसान और युवा लगातार हाशिए पर धकेले जा रहे हैं.

अखिलेश ने कहा, “असली बजट वही होता है जो गरीबों के चेहरे पर खुशी लाए.” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार बजट के जरिए अपने लोगों को लाभ पहुंचाती है, लेकिन आम जनता की स्थिति जस की तस बनी रहती है. स्मार्ट सिटी मिशन, प्रदूषण, स्वास्थ्य और किसानों की आय जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

कांग्रेस ने बताया फीका

कांग्रेस ने बताया फीका और निराशाजनक, पारदर्शिता पर भी उठाए सवाल कांग्रेस ने बजट को “पूरी तरह फीका और उम्मीदों पर खरा न उतरने वाला” करार दिया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वित्त मंत्री के 90 मिनट लंबे भाषण के बाद भी योजनाओं और कार्यक्रमों के बजटीय आवंटन की जानकारी सामने नहीं आई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं.

रमेश ने कहा कि देश जिस उम्मीद से बजट की ओर देख रहा था, यह दस्तावेज़ उन अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता. उनका कहना है कि महंगाई, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दों के समाधान के लिए ठोस घोषणाओं का अभाव दिखा.

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बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस 

वित्त मंत्री सीतारमण ने इस बार भी बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है और पूंजीगत निवेश बढ़ाने की घोषणा की है. सरकार का दावा है कि इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. लेकिन विपक्ष का कहना है कि बढ़ता निवेश और बड़े प्रोजेक्ट तभी मायने रखते हैं जब आम आदमी को राहत मिले. बजट पर जारी यह राजनीतिक जंग आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि हर पार्टी अपने-अपने नजरिए से इसे जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है.
 

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