बैंक नोट से जुड़ी बड़ी खबर: जिस कागज की बनती है करेंसी, उसके लिए 1800 करोड़ रुपये के प्रस्‍ताव को मंजूरी

उच्च सुरक्षा वाला कागज वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड और फाइबर से युक्त होता है, जो नकली नोटों की संभावना को रोकता है.

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बैंक नोट से जुड़े बड़े प्रोजेक्‍ट को मंजूरी
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नोटों की छपाई के लिए उच्च सुरक्षा वाले कागज का उत्पादन बढ़ाने के 1800 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. यह कागज मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित सिक्योरिटी पेपर मिल में उत्पादित किया जाएगा. बुधवार को कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके तहत प्रिंटिग मिल में नई सिलिंड्रिकल मोल्ड वॉटरमार्क बैंकनोट (CWBN) लाइन सालाना 6,000 टन हाई क्‍वालिटी वाले टिकाऊ कागज का उत्पादन करेगी. यह कागज नोट, गैर-न्यायिक स्टांप पेपर और पासपोर्ट के लिए इस्‍तेमाल होता है.

करेंसी नोट की बढ़ती मांग के बीच बड़ा फैसला 

कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने 7 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी. यह नई मशीनरी 1970 के दशक से चालू तीन पुरानी लाइनों में से दो की जगह लेगी. सिक्योरिटी पेपर मिल SPMCIL के अधीन है. यह वर्तमान में करेंसी पेपर के प्रोडक्‍शन में एकाधिकार रखती है. आर्थिक वृद्धि और डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच करेंसी नोटों की मांग भी बढ़ी है. इसलिए यह आधुनिकीकरण करना आवश्यक था.

नकली नोटों पर लगाम लगाने के लिए ये फैसला अहम  

उच्च सुरक्षा वाला कागज वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड और फाइबर से युक्त होता है, जो नकली नोटों की संभावना को रोकता है. नोटबंदी के बाद मुद्रा की मांग बढ़ी है. यह परियोजना आयात पर निर्भरता घटाएगी. मध्य प्रदेश में रोजगार सृजित करेगी और आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप है. 

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