अनिल अग्रवाल संग बेटी‍ प्रिया अग्रवाल का ऐसा है रिश्‍ता, बरसों पहले दिया वो मंत्र, जो बिजनेस बढ़ाने में आएगा काम?

Anil Agarwal और बेटी Priya Agarwal की कहानी एक सफल पिता की ओर से अपनी अगली पीढ़ी को दिए गए उन मूल्यों की कहानी है, जो विरासत में मिलने वाली संपत्ति से कहीं ज्‍यादा कीमती हैं.

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Anil Agarwal and Priya Agarwal

अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के बेटे अग्निवेश अग्रवाल (Agnivesh Agarwal) के असामयिक निधन के बाद कहा जा रहा है कि वेदांता (Vedanta Group) में अब बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्‍बर (Priya Agarwal) की भूमिका बढ़ सकती है. प्रिया (Anil Agarwal Daughter Priya Agarwal Hebbar) फिलहाल हिंदुस्‍तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc Ltd.) की चेयरपर्सन हैं. इसके साथ ही वो वेदांता लिमिटेड में नॉन-एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर भी हैं. पिता अनिल अग्रवाल के साथ प्रिया का रिश्‍ता केवल बाप-बेटी का नहीं, बल्कि एक गुरु-शिष्‍या जैसा भी है. 

अनिल अग्रवाल ने अपने जीवन में जो संघर्ष किया, जो सीखा, वो अपनी बेटी प्रिया को भी सिखाते रहे. अनिल अग्रवाल ने अपनी बेटी को जीवन के कठिन संघर्षों का सामना करने के लिए हमेशा प्रेरित किया है. अब जबकि ऐसी स्थिति आ गई है कि वेदांता ग्रुप का बिजनेस बढ़ाने में प्रिया की भूमिका बढ़ सकती है, तो पिता की दी हुई सीख उनके काफी काम आने वाली है. 

'काम में बढ़िया रहो, बाधाएं खुद दूर होंगी'

अनिल अग्रवाल की बेटी प्रिया उन दिनों लंदन के स्‍कूल में पढ़ाई कर रही थीं. उन दिनों छात्रों के बीच प्रिया को भेदभाव (Discrimination) का सामना करना पड़ा था. बेटी ने पिता को ये बात बताई. तब एक पिता के तौर पर अनिल अग्रवाल ने बेटी को सांत्‍वना नहीं दी, बल्कि एक व्यावहारिक और शक्तिशाली मंत्र दिया. उन्होंने प्रिया से कहा, 'अपने काम में बढ़िया रहो, बाकी सब बाधाएं खुद-ब-खुद दुरुस्त हो जाएंगी'. उनकी ये सीख प्रिया के जीवन का आधार बनी. ये किस्‍सा अनिल अग्रवाल ने ही अपने एक इंटरव्‍यू में बताया था.

कंधे से कंधा मिलाकर चल रही बेटी प्रिया 

वेदांता ग्रुप के मुखिया ने बताया कि उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्‍बर, अब उनके व्यापारिक और सामाजिक कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है. वो वेदांता ग्रुप में ESG ट्रांसफॉर्मेशन यानी पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस यानी को भी लीड कर रही हैं. उनकी लीडरशिप में चल रही कंपनी हिंदुस्तान जिंक में आज 5 महिला और 4 पुरुष बोर्ड मेंबर्स हैं. देश की पहली ऑल-वुमन माइन रेस्क्यू टीम भी प्रिया के विजन का नतीजा है. उन्‍हें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की यंग ग्लोबल लीडर्स क्लास ऑफ 2024 में शामिल किया गया था.

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पिता से मिली समाजसेवा की भावना

प्रिया विशेष रूप से 'नंद घर' प्रोजेक्ट की देखरेख कर रही है, जिसके माध्यम से भारत के 8 करोड़ बच्चों और लाखों महिलाओं के जीवन को बदलने का लक्ष्य रखा गया है. अनिल अग्रवाल गर्व के साथ कहते हैं कि उनकी बेटी अब जमीन पर बैठकर काम करती है और हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेती है. ये कहानी एक सफल पिता की ओर से अपनी अगली पीढ़ी को दिए गए उन मूल्यों की कहानी है, जो विरासत में मिलने वाली संपत्ति से कहीं ज्‍यादा कीमती हैं.

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एक पुरानी X पोस्‍ट देखिए 

अनिल अग्रवाल को भी समाजसेवा की भावना विरासत में मिली. उन्‍होंने ही बताया था कि  जब उनकी मां और अन्य महिलाएं छठ पूजा के दौरान गंगा जी में अर्घ्य देने जाती थीं, वे देखते थे कि कैसे उनकी मां गंगा जी का पानी अपनी अंजुरी में उठाती थीं और मंत्रोच्चार के साथ वापस गंगा जी में ही अर्पित कर देती थीं. अग्रवाल कहते हैं कि यह दृश्य उनके दिमाग में छप गया था-इसका मतलब था कि 'जो आपसे (प्रकृति/समाज से) लिया है, वह आपको ही वापस देना है'.

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इसी दर्शन ने उन्हें यह सिखाया कि उनके पास मौजूद अपार धन असल में उनका नहीं, बल्कि समाज का है. वे खुद को अपनी संपत्ति का केवल एक 'ट्रस्टी' मानते हैं. उन्होंने संकल्प लिया है कि वे अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा लोक कल्याण के लिए दान करेंगे, क्योंकि इंसान हाथ खाली लेकर आता है और खाली हाथ ही जाता है. वे कहते हैं कि जो लिया है उसे यहीं लौटाना है, क्योंकि साथ तो कुछ लेकर जाना नहीं है. 

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