Amazon-Flipkart Order Cancellation Charges: फेस्टिव सीजन से पहले ई-कॉमर्स कंपनियों Amazon और Flipkart ने बड़ा फैसला लिया है. दोनों प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले सेलर्स के लिए फीस और जुर्माने के स्ट्रक्चर में बदलाव किया गया है. ग्राहक की मर्जी के बिना ऑर्डर कैंसिल होने पर अब मोटा जुर्माना लगेगा. 10,000 रुपये तक के ऑर्डर पर ये जुर्माना 1,000 रुपये तक हो सकता है.
भले ही प्रॉफिट मार्जिन 100-50 रुपये या उससे भी कम हो, कैंसिलेशन फीस अब कैटेगरी बेस्ड रेफरल चार्ज से जुड़ी नहीं होगी, बल्कि ऑर्डर वैल्यू के हिसाब से तय होगी. सेलर्स इसे छोटे और मध्यम कारोबारियों पर वित्तीय बोझ के रूप में देख रहे हैं.
FIRST INDIA के ट्रस्टी विनोद कुमार का कहना है कि ऑनलाइन सेलर ग्राहकों के लिए समय पर ऑर्डर पूरा करना चाहते हैं, लेकिन लॉजिस्टिक या दूसरी वजहों से भी ऑर्डर में देरी होती है. ऐसे में त्योहारी सीजन से ठीक पहले कैंसिलेशन, डिस्पैच और पेनल्टी बढ़ाना छोटे कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है.
Amazon ने बदली कैंसिलेशन फीस
Amazon India ने अपने सेलर फोरम पर जारी नोटिस में कहा है कि Easy Ship और Self Ship सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं के लिए ऑर्डर कैंसिलेशन फीस के कैलकुलेशन का तरीका बदल दिया गया है. Easy Ship मॉडल में विक्रेता अपने पास सामान रखते हैं, ऑर्डर मिलने पर उसे पैक करते हैं और Amazon के पिकअप कर्मचारी को सौंपते हैं. इसके बाद Amazon प्रॉडक्ट की डिलीवरी करता है. वहीं, Self Ship मॉडल में पैकिंग और डिलीवरी की जिम्मेदारी सेलर की होती है और वह अपने कूरियर या डिलीवरी नेटवर्क का इस्तेमाल करता है.
पहले कैंसिलेशन फीस कैटेगरी के आधार पर लगने वाले रेफरल चार्ज से जुड़ी होती थी. अब इसे ऑर्डर वैल्यू के प्रतिशत के रूप में तय किया गया है. ये फीस स्ट्रक्चर 17 अगस्त 2026 से ही लागू कर दिया गया है.
- 10,000 रुपये से कम के ऑर्डर पर 10 प्रतिशत फीस यानी अधिकतम 1,000 रुपये तक.
- 10,001 से 50,000 रुपये तक के ऑर्डर पर 8 प्रतिशत फीस यानी अधिकतम 4,000 रुपये तक.
- 50,001 से 1 लाख रुपये तक के ऑर्डर पर 5 प्रतिशत फीस यानी अधिकतम 5,000 रुपये तक.
- 1 लाख रुपये से अधिक के ऑर्डर पर 2 प्रतिशत फीस.
- यही नहीं, अभी और सुनिए... इन चार्जेस के ऊपर 18% GST भी लगेगा.
ऑर्डर कैंसिल करने से पहले सेलर 100 बार सोचेंगे!
अमेजन के मुताबिक, ये फीस तब लागू होगी, जब सेलर, आपके रिक्वेस्ट के अलावा किसी अन्य कारण से ऑर्डर कैंसिल करता है.
अगर सेलर अनुमानित शिपिंग तारीख के 24 घंटे के भीतर सामान भेजकर शिपमेंट की पुष्टि नहीं करता और ऑर्डर अपने-आप कैंसिल हो जाता है, तब भी चार्ज लगाया जाएगा.
Amazon ने 7 सितंबर 2026 से Fulfilment Center, Easy Ship और Seller Flex चैनलों पर क्लोजिंग फीस बढ़ाने की भी घोषणा की है.
500 रुपये तक की कीमत वाले उत्पादों पर फीस 1 रुपये और 500 रुपये से महंगे उत्पादों पर 3 रुपये बढ़ेगी. कंपनी ने इसका कारण फ्यूल और लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी बताया है.
Flipkart का 3-Layer पेनल्टी स्ट्रक्चर
Flipkart ने 23 अगस्त 2026 से ऑर्डर फुलफिलमेंट में देरी के लिए तीन-स्तरीय पेनल्टी व्यवस्था लागू की है.
- तय Dispatch By Date तक शिपमेंट पिकअप के लिए तैयार न होने पर 30 रुपये प्रति शिपमेंट जुर्माना लगेगा.
- सेलर की ओर से ऑर्डर कैंसिल करने की स्थिति में 60 रुपये प्रति शिपमेंट जुर्माना लगेगा.
- लगातार 3 डिस्पैच डेडलाइन चूकने के बाद ऑर्डर अपने-आप कैंसिल होने पर भी 60 रुपये जुर्माना लगेगा.
- ऑर्डर में देरी के बाद उसके कैंसिल होने पर 90 रुपये प्रति शिपमेंट जुर्माना लगाया जाएगा.
MSME सेलर्स इसे बोझ मान रहे, कंपनी क्या कह रही?
पहले Flipkart डिस्पैच डेडलाइन चूकने पर सेलर का अकाउंट कुछ समय के लिए लॉक कर देता था. नए नियमों में ये प्रावधान हटाकर सीधे पेनल्टी पर जोर दिया गया है. हालांकि, Flipkart पर सेलिंग शुरू करने के तीन महीने तक नए सेलर्स को इस पॉलिसी से बाहर रखा गया है.
Flipkart से जुड़े लोगों के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य विक्रेताओं को बेहतर योजना बनाने और समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है. अच्छे डिस्पैच अनुपालन वाले विक्रेताओं को तेज पेमेंट और मुफ्त विज्ञापन क्रेडिट जैसे लाभ भी दिए जा सकते हैं.
Amazon के प्रवक्ता के मुताबिक, सेलर्स की ओर से कैंसिल होने वाले ऑर्डर की संख्या, कुल ऑर्डर के 1 फीसदी से भी कम है. यानी 100 में से 1 ऑर्डर ही कैंसिल होते हैं. कंपनी ने कहा कि उसके सिस्टम में उन मामलों से सेलर को सुरक्षा देने के उपाय हैं, जिनमें कैंसिलेशन उनकी गलती से नहीं, बल्कि दूसरी वजहों से हुआ हो.
हालांकि, कुछ सेलर्स का कहना है कि कई बार डिलीवरी कर्मचारी निर्धारित पिकअप के लिए नहीं पहुंचते, फिर भी कैंसिलेशन की जिम्मेदारी सेलर्स पर डाल दी जाती है. एक सेलर ने यह भी कहा कि समान ऑर्डर पर Amazon के फुलफिलमेंट नेटवर्क और Easy Ship विक्रेताओं के बीच कुल फीस का अंतर 45 रुपये प्रति यूनिट तक हो सकता है.
इस मसले पर एक्सपर्ट की क्या राय है?
Forum for Internet Resellers, Sellers and Traders यानी FIRST INDIA के ट्रस्टी विनोद कुमार ने कहा कि ऑनलाइन विक्रेता समय पर ऑर्डर पूरा करने और बेहतर ग्राहक सेवा की जरूरत को समझते हैं. लेकिन त्योहारी सीजन से ठीक पहले कैंसिलेशन, डिस्पैच और अन्य पेनल्टी में बढ़ोतरी छोटे कारोबारियों के लिए चिंता का विषय है.
उन्होंने कहा कि हर देरी या कैंसिलेशन विक्रेता की गलती से नहीं होता. लॉजिस्टिक्स की समस्या, प्लेटफॉर्म में तकनीकी दिक्कत, अचानक बढ़ी मांग और ग्राहक से जुड़े कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं.
कुमार के मुताबिक, Sellers को ई-कॉमर्स व्यवस्था का डिफॉल्ट वित्तीय बोझ उठाने वाला नहीं बनाया जाना चाहिए. मार्केटप्लेस को जिम्मेदारी तय करने में पारदर्शिता, उचित रेश्यो में पेनल्टी, फीस बदलाव की पर्याप्त पूर्व सूचना और गलत चार्ज को चुनौती देने की सरल व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए.
ये भी पढ़ें: दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद या गुरुग्राम... जानिए NCR के किस शहर में कम हुए फ्लैट के दाम