अक्षय तृतीया: 4 लाख जौहरी 50-50 ग्राम सोना बेचें तो भी आज 16,000 करोड़ का कारोबार, चांदी का भी गणित समझ लीजिए

Gold Silver Sale on Akshaya Tritiya: 4,000 करोड़ के चांदी के व्यापार का मतलब 1.57 लाख किलो चांदी है, जो प्रति जौहरी औसतन मात्र 400 से 800 ग्राम की बिक्री दर्शाता है. सोने का कैलकुलेशन अंदर है, खबर में.

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Akshaya Tritiya Gold Silver Buying: आज आपके शहर में भी सोने-चांदी की खरीद को लेकर रौनक दिख रही होगी न!

आज अक्षय तृतीया पर देशभर में लोग सोने-चांदी की खरीदारी कर रहे हैं. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने रविवार को कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों के बावजूद 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है. यह पिछले साल के लगभग 16,000 करोड़ रुपये के अनुमानित कारोबार से उल्लेखनीय वृद्धि है. भारत में अक्षय तृतीया को पारंपरिक रूप से सोना खरीदने के लिए सबसे शुभ मुहूर्तों में से एक माना जाता है. यह मान्यता है कि इस दिन किया गया निवेश स्थायी समृद्धि लाता है.

कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

कैट (CAIT) के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "सोना बाजार में अभी भी हावी है, लेकिन कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण खरीदारी के तरीके में बड़ा बदलाव आया है." पिछले साल सोना जहां ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास था, वहीं इस साल यह ₹1.58 लाख के करीब पहुंच गया है. इसी तरह चांदी ₹85,000 प्रति किलो से उछलकर ₹2.55 लाख प्रति किलो के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है.

वॉल्यूम में गिरावट, वैल्यू में बढ़ोतरी

कैट से जुड़े संगठन 'ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन' (AIJGF) के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, कारोबार की कुल वैल्यू तो बढ़ी है लेकिन बेची गई धातु की वास्तविक मात्रा कम हुई है.

  1. अनुमानित ₹16,000 करोड़ के सोने के व्यापार का मतलब वर्तमान कीमतों पर लगभग 10,000 किलोग्राम (10 टन) सोना है. 
  2. देशभर के 2 से 4 लाख जौहरियों में बांटने पर यह प्रति जौहरी औसतन केवल 25 से 50 ग्राम बैठता है, जो मात्रा में भारी गिरावट का संकेत है.
  3. वहीं 4,000 करोड़ के चांदी के व्यापार का मतलब 1.57 लाख किलो चांदी है, जो प्रति जौहरी औसतन मात्र 400 से 800 ग्राम की बिक्री दर्शाता है.

बदल रहा है ग्राहकों का मिजाज

CAIT के अनुसार, कीमतों में इस तेज उछाल ने ग्राहकों के व्यवहार को बदल दिया है. मांग कम होने के बजाय, ऊंची कीमतें खरीदारों को अधिक 'कैलकुलेटेड' और 'वैल्यू-ड्रिवन' खरीदारी की ओर धकेल रही हैं. कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने बताया कि देशभर के जौहरियों ने भी अपनी रणनीतियां बदल दी हैं. उन्होंने कहा, 'अब ग्राहकों का झुकाव हल्के वजन (Lightweight) और पहनने योग्य ज्वेलरी के साथ-साथ चांदी और हीरे के उत्पादों की ओर बढ़ा है. मेकिंग चार्जेस में कटौती और मुफ्त सोने के सिक्के जैसे आकर्षक ऑफर भी ग्राहकों की दिलचस्पी बनाए रखने में मदद कर रहे हैं.'

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डिजिटल गोल्ड की ओर रुझान

प्रवीण खंडेलवाल ने निष्कर्ष निकाला कि ये आंकड़े एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करते हैं- कीमतें बढ़ने से व्यापार की 'वैल्यू' तो बढ़ रही है, लेकिन वास्तविक खपत (Consumption) घट रही है. यही कारण है कि बाजार में हल्के गहनों और छोटे सिक्कों की लोकप्रियता बढ़ी है. इसके अलावा, कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए लोग डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और ईटीएफ (ETF) जैसे निवेश विकल्पों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं.

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