- इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने AI को लेबर मार्केट के लिए सुनामी बताया है.
- अगले दो से पांच सालों में वैश्विक स्तर पर लगभग 40% नौकरियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से प्रभावित हो सकती हैं.
- भारत में लगभग 25% नौकरियों पर AI का असर होगा और कुछ पुरानी नौकरियां खत्म हो सकती हैं.
AI Impact on Jobs: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने NDTV को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि एआई पूरी दुनिया के लेबर मार्केट के लिए एक सुनामी की तरह आ रहा है. अगले 2 से 5 सालों में दुनिया भर की करीब 40 प्रतिशत नौकरियों पर इसका असर पड़ेगा. भारत की बात करें तो यहां की लगभग 25 प्रतिशत नौकरियां एआई की वजह से प्रभावित हो सकती हैं.
इसमें कुछ पुरानी नौकरियों का खत्म होना और कुछ में बड़े बदलाव आना शामिल है, हालांकि इस दौरान नए तरह के अवसर भी पैदा होंगे.
भारत की GDP को होगा सीधा फायदा
भले ही नौकरियों को लेकर चिंता जताई जा रही हो, लेकिन भारतीय इकोनॉमी के लिए एआई एक अच्छी खबर भी लेकर आया है. IMF चीफ के मुताबिक, अगर भारत में एआई का सही इस्तेमाल होता है, तो इससे देश की जीडीपी (GDP) में 0.7 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिल सकती है. यह आंकड़ा भारत जैसी बड़ी और तेजी से बढ़ती इकोनॉमी के लिए बहुत मायने रखता है. भारत ने जिस तरह से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल आईडी को तैयार किया है, वह उसे दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले एआई के लिए ज्यादा तैयार बनाता है.
15 साल में बदल गया है भारत का चेहरा
क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने भारत के पिछले कुछ सालों के सफर की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि 10-15 साल पहले के मुकाबले आज का भारत बिल्कुल अलग और बहुत ज्यादा डायनामिक दिखता है. भारत ने टैक्स और बैंकिंग सेक्टर में जो बड़े सुधार किए हैं, उन्होंने देश को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने में मदद की है. अमेरिका और यूके जैसे देशों के साथ हुए समझौते भारत को और ज्यादा मजबूत बना रहे हैं. उनकी नजर में भारत अब आर्थिक मौकों के लिए पूरी तरह खुला हुआ है.
एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की है जरूरत
एआई के दौर में टिके रहने के लिए IMF चीफ ने भारत सरकार को एजुकेशन सेक्टर में कुछ बड़े सुझाव दिए हैं. उनका कहना है कि अब सिर्फ किताबी जानकारी काफी नहीं होगा, बल्कि स्टूडेट्ल को Learn to Learn स्किल सीखनी होगी. एजुकेशन सिस्टम में ऐसी फ्लेक्सिबिलिटी लानी होगी ताकि लोग नई टेक्नोलॉजी के साथ खुद को जल्दी ढाल सकें. सरकार को इस बात पर ध्यान देना होगा कि लोग एआई के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें.
इन सेक्टर में नौकरियों की भरमार
एआई आने का मतलब यह नहीं है कि सारे काम बंद हो जाएंगे. आईएमएफ चीफ का मानना है कि जैसे-जैसे एआई की वजह से लोगों की कमाई बढ़ेगी, वे बाकी सर्विस पर ज्यादा पैसा खर्च करेंगे. इससे रेस्टोरेंट, खेल, एंटरटेनमेंट और टूरिज्म जैसे सेक्टर में नौकरियों की भरमार हो जाएगी. उन्होंने सलाह दी है कि हमें इस नए दौर में लोगों को ज्यादा प्रोटेक्शन और काम करने के नए तरीके देने होंगे.एआई एक चुनौती जरूर है, लेकिन भारत की तैयारी इसे एक बड़े मौके में बदल सकती है.
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