AI का असर अब सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है. आज के दौर में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर हर सेक्टर पर दिख रहा है.अगर बात देश के बैंकिंग सिस्टम की करें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से बैंकिंग सेक्टर में भी काफी तेजी से बदलाव होते नजर आ रहे हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये बदलाव सिर्फ फायदा दे रहा है या इसके साथ छिपे खतरे भी बढ़ रहे हैं? Canara Bank की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक AI एक तरफ लोन देना आसान और तेज बना रहा है, तो दूसरी तरफ यह बैंकिंग सिस्टम के लिए नए रिस्क भी खड़े कर रहा है. यानी AI बैंकिंग को सुधार भी रहा है और साथ ही चुनौती भी दे रहा है.
AI से बैंकिंग में बड़ा बदलाव, क्रेडिट सिस्टम पूरी तरह बदल रहा
रिपोर्ट के अनुसार AI सिर्फ बैंकिंग को बेहतर नहीं बना रहा, बल्कि भारत के क्रेडिट पोर्टफोलियो को पूरी तरह बदल रहा है. इसका असर इस बात पर पड़ रहा है कि किसे लोन मिलेगा, रिस्क कैसे तय होगा और मुश्किल समय में बैंक का परफॉर्मेंस कैसा रहेगा.
AI से लोन प्रोसेस तेज, रिटर्न भी ज्यादा
AI के इस्तेमाल से बैंक अब ज्यादा बेहतर रिस्क टूल्स का उपयोग कर रहे हैं. इससे लोन देने की प्रक्रिया तेज हो गई है और AI आधारित पोर्टफोलियो में ग्रोथ और रिटर्न ऑन एसेट्स लगभग 2 गुना ज्यादा देखने को मिल रहा है.
मिनटों में लोन, क्रेडिट रिस्क भी बढ़ा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि AI आधारित लोन पोर्टफोलियो में रिस्क भी ज्यादा है. आरबीआई, CRISIL और ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों के अनुसार इसमें 1.5 से 2 गुना ज्यादा क्रेडिट रिस्क हो सकता है.
AI की मदद से अब लोन अप्रूवल का समय 3-10 दिन से घटकर लगभग तुरंत हो गया है. इससे अनसिक्योर्ड रिटेल लोन, BNPL (Buy Now Pay Later) और माइक्रो-क्रेडिट तेजी से बढ़ रहे हैं.
CIBIL स्कोर से आगे बढ़कर अब रियल टाइम डेटा पर लोन
अब सिर्फ CIBIL स्कोर या फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स ही नहीं, बल्कि GST डेटा, UPI ट्रांजैक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर भी लोन दिया जा रहा है.इससे MSME, गिग वर्कर्स और नए उधार लेने वालों को भी लोन मिलना आसान हो गया है, जो पहले सिस्टम से बाहर थे.
IT-BPO सेक्टर में नौकरी जाने और NPA बढ़ने का खतरा
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात भारत के $280 बिलियन के IT और BPO सेक्टर को लेकर कही गई है.रिपोर्ट के अनुसार ,भारत का 280 बिलियन डॉलर से ज्यादा का IT और BPO सेक्टर AI ऑटोमेशन से खतरे में है. खासकर बेंगलुरू, हैदराबाद और पुणे जैसे टेक शहरों में नौकरी जाने का जोखिम बढ़ रहा है. अगर लोगों की नौकरियां गईं, तो इससे बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स ( NPA) तेजी से बढ़ सकता है, क्योंकि लोग अपने लोन की किस्तें नहीं चुका पाएंगे.
AI मॉडल का ‘ब्लैक बॉक्स' रिस्क, गलत फैसलों का खतरा
AI सिस्टम को अक्सर ब्लैक बॉक्स कहा जाता है क्योंकि इसमें फैसले कैसे लिए जा रहे हैं, यह साफ नहीं होता.अगर ट्रेनिंग डेटा में बायस हुआ, तो इससे रिस्क की गलत कीमत तय हो सकती है और मंदी के समय अचानक लोन देना बंद भी हो सकता है.
Canara Bank का सुझाव, रिस्क कम करने के लिए ये बदलाव जरूरी
रिपोर्ट में कुछ अहम सुझाव भी दिए गए हैं.जिन उधारकर्ताओं पर ऑटोमेशन का खतरा है, उनके लिए लोन-टू-वैल्यू रेशियो 80% की बजाय 60% रखा जाए.इसके अलावा कॉर्पोरेट लोन में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और डेटा को भी गिरवी (collateral) में शामिल किया जाए. वहीं, AI से खर्च बचाने वाली कंपनियों को अपनी बचत का कुछ हिस्सा डेब्ट सर्विस रिजर्व में रखना चाहिए
रिपोर्ट में कहा गया है कि AI का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन इसे पूरी तरह अपने भरोसे छोड़ना सही नहीं होगा.AI के साथ हाइब्रिड मॉडल जरूरी है.बैंकिंग सिस्टम में ह्यूमन ओवरसाइट यानी इंसानी निगरानी भी जरूरी है, ताकि रिस्क को कंट्रोल किया जा सके.














