अमेरिका की एक अदालत ने अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी की ओर से अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) की तरफ से दायर प्रतिभूति धोखाधड़ी (Securities Fraud) के मुकदमे को खारिज करने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है. अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अदालत के डिप्टी से संपर्क कर प्री मोशन कॉन्फ्रेंस की तारीख तय कर लें.
अमेरिकी अदालत ने क्या आदेश दिया है
न्यूयार्क के इस्टर्न डिस्ट्रिक कोर्ट की ओर से सात अप्रैल को भेजे गए ईमेल में इसकी जानकारी दी गई है. इस ईमेल में कहा गया है कि अदालत को प्रतिवादियों का पत्र प्राप्त हुआ है. इसमें उन्होंने शिकायत को खारिज करने के अपने प्रस्तावित आवेदन (Motion to Dismiss) से पहले एक प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस (Pre-motion Conference) की मांग की है. अदालत इस अनुरोध को स्वीकार करती है और पक्षों को निर्देश देती है कि वे आपस में विचार-विमर्श कर अदालत के डिप्टी से ईमेल पर संपर्क कर प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस की तारीख तय करें. यह आदेश निकोलस जी गरौफिस की ओर से सात अप्रैल को जारी किया गया है.
अदाणी ग्रुप ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग की तरफ से दायर प्रतिभूति धोखाधड़ी (Securities Fraud) के मुकदमे को खारिज करने की अपील की थी. इसमें 30 अप्रैल को केस खारिज करने की याचिका से पहले, अदालत में दाखिल अर्जी में दलील दी गई है कि यह मामला अमेरिका के क्षेत्राधिकार से बाहर है. याचिका में कहा गया है कि SEC कोई भी गलत गतिविधि साबित नहीं कर पाया है.
अदाणी ग्रुप ने अपनी याचिका में क्या कहा है
इस याचिका में कहा गया है कि अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) की 2021 में बॉन्ड बिक्री को लेकर SEC के दावे में कई कानूनी कमियां हैं. वकीलों का तर्क है कि इस मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट के पास व्यक्तिगत क्षेत्राधिकार नहीं है क्योंकि उनका न तो अमेरिका के साथ कोई पर्याप्त संपर्क रहा है और न ही बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया में इनकी कोई सीधी भागीदारी थी.
बता दें SEC ने नवंबर 2024 में अमेरिका के प्रतिभूति कानूनों के तहत दर्ज कराए मामले में आरोप लगाया था कि अदाणी ने भारत के सरकारी अधिकारियों से संबंधित कथित रिश्वतखोरी मामले की जानकारी न देकर निवेशकों को गुमराह किया था. अदाणी ग्रुप आरोपों को खारिज करता रहा है.
अपनी याचिका में अदाणी के वकीलों की दलील थी कि 750 मिलियन डॉलर की बॉन्ड सेल अमेरिका से बाहर रूल 144ए के तहत नियम एस की छूट के अंतर्गत की गई थी. इस दौरान प्रतिभूतियां गैर अमेरिकी अंडरराइटर्स को बेची गई थीं, जिन्हें बाद में क्वालिफाइड इंस्टिट्यूशनल बायर्स को री-सोल्ड किया गया था.
SEC ने क्या सबूत दिखाए हैं
दलील दी गई है कि SEC की शिकायत में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि गौतम अदाणी ने बॉन्ड जारी करने की मंजूरी दी थी, किसी प्रमुख बैठक में हिस्सा लिया या फिर अमेरिकी निवेशकों से संबंधित किसी गतिविधि का निर्देश दिया था. SEC ने ऐसे मामले को आधार बनाया है, जो अमेरिकी धरती पर हुआ ही नहीं है.
अदाणी के वकीलों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि SEC अमेरिका में हुए किसी भी लेनदेन का सबूत नहीं दिखा पाया है, जो कि अमेरिका में सुनवाई के लिए अनिवार्य होती है. इसके अलावा SEC ने ये भी नहीं कहा कि किसी निवेशक को नुकसान हुआ हो. ये बॉन्ड 2024 में मैच्योर हो गए थे और ब्याज समेत पूरा पेमेंट किया जा चुका है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि जिस कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को आधार बनाकर ये मुकदमा किया गया था, उसे साबित करने का भी कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है. इन दलीलों के साथ इस मामले को पूरी तरह खारिज करने का अनुरोध किया गया है.
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