8th Pay Commission: कर्मचारियों की लॉटरी! 'फैमिली यूनिट' के नए फॉर्मूले से ₹18,000 से सीधे ₹69,000 होगी बेसिक सैलरी?

8th Pay Commission Salary Hike: 8वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट'को 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग तेज है. जानें इस नए गणित से केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में कितना बड़ा उछाल आने वाला है...

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8th Pay Commission Latest News: फैमिली यूनिट के नए फॉर्मूले से कर्मचारियों की सैलरी में होगा 50% का इजाफा!

8th Pay Commission News: आठवें वेतन आयोग को लेकर देश भर के सरकारी कर्मचारियों में सुगबुगाहट तेज हो गई है . देश के करीब  50 लाख मौजूदा सरकारी कर्मचारी और 70 लाख के करीब पेंशनर्स अपनी सैलरी -पेंशन में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंजतार रहे हैं. कर्मचारियों की सैलरी-पेशन रिवीजन को लेकर 8वें वेतन आयोग की तैयारी शुरू हो चुकी है और इसी बीच एक ऐसा फॉर्मूला सामने आया है, जिससे लाखों कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में बड़ा इजाफा हो सकता है. कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने एक बेहद खास मांग रख दी है. उन्होंने मांग की है कि सैलरी तय करने में इस्तेमाल होने वाले फैमिली यूनिट के नियम को बदला जाए.

केंद्रीय कर्मचारियों की जेब में आएंगे 50% ज्यादा पैसे!

अब तक न्यूनतम बेसिक सैलरी (Minimum Basic Pay) तय करने के लिए सिर्फ 3 फैमिली यूनिट को ही आधार माना जाता था, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाकर 5 यूनिट करने की मांग की जा रही है.अगर इस मांग को मंजूरी मिल जाती है, तो सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि DA, HRA और TA जैसे भत्ते भी काफी बढ़ सकते हैं.अगर सरकार 'फैमिली यूनिट' के इस नए गणित और फॉर्मूले को मान लेती है, तो हर लेवल के केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और भत्तों में 50% से ज्यादा का बंपर उछाल देखने को मिलेगा, जिससे सीधे तौर पर लाखों परिवारों की जेब में मोटा पैसा आएगा.

क्या है फैमिली यूनिट का फॉर्मूला?

वेतन आयोग कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी तय करते समय यह देखता है कि एक परिवार का खर्च कितना है. इसी को फैमिली यूनिट कहा जाता है. इसमें परिवार के कितने लोगों का खर्च जोड़ा जाएगा, उसी के आधार पर रहने, खाने, इलाज, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरी जरूरतों का खर्च निकाला जाता है. फिर उसी हिसाब से मिनिमम बेसिक सैलरी तय की जाती है.

7वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट 3 मानी गई थी. इसमें कर्मचारी को 1 यूनिट, पति या पत्नी को 0.8 यूनिट और दो बच्चों को 0.6-0.6 यूनिट माना गया था. यानी कुल 3 यूनिट के हिसाब से न्यूनतम सैलरी तय की गई थी.

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फैमिली यूनिट में बदलाव को लेकर क्या है मांग?

कर्मचारी संगठनों और नेशनल काउंसिल  ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की मांग है कि अब फैमिली यूनिट को 3 की जगह 5 किया जाए. उनका कहना है कि आज के समय में कई कर्मचारी अपने माता-पिता और कई मामलों में सास-ससुर की भी जिम्मेदारी उठाते हैं. इसलिए परिवार का असली खर्च पहले से काफी बढ़ गया है और सैलरी तय करते समय इसे भी शामिल किया जाना चाहिए.

फैमिली यूनिट के नए फॉर्मूले में कर्मचारी को 1 यूनिट, पति या पत्नी को 1 यूनिट, दो बच्चों को 0.8-0.8 यूनिट और माता-पिता या जरूरतमंद सास-ससुर को 0.8 यूनिट देने की मांग की गई है. इस तरह कुल फैमिली यूनिट करीब 5 मानी जाएगी.

18,000 रुपये से बढ़कर 27,600 रुपये होगी सैलरी?

जानकारों का कहना है कि अगर पहले ही फैमिली यूनिट 3 की जगह 5 के आसपास होती, तो 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये की जगह करीब 27,600 रुपये हो सकती थी. यानी सिर्फ फैमिली यूनिट का गणित बदलने से बेसिक सैलरी में करीब 50 प्रतिशत तक का फर्क आ सकता है.

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हर लेवल के कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

इस बदलाव का फायदा सिर्फ लेवल-1 के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा. अगर न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो पूरे पे मैट्रिक्स पर उसका असर पड़ेगा. यानी हर पे लेवल के केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ सकती है.

DA, HRA और TA भी बढ़ेंगे

बेसिक सैलरी बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उससे जुड़े दूसरे भत्ते भी अपने आप बढ़ जाएंगे. महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) की गणना भी बेसिक सैलरी के आधार पर होती है. इसलिए बेसिक पे बढ़ने पर कर्मचारियों की कुल सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

फिटमेंट फैक्टर पर भी पड़ेगा असर

सैलरी स्ट्रक्चर न्यूनतम बेसिक सैलरी पर तैयार होता है. इसलिए अगर फैमिली यूनिट बढ़ती है, तो फिटमेंट फैक्टर भी बढ़ सकता है.

NC-JCM ने अपने सुझाव में 5 यूनिट वाले परिवार के आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.833 रखने का प्रस्ताव दिया है.कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इलाज, मकान, बच्चों की पढ़ाई, बिजली, पानी, फ्यूल और रोजमर्रा के खर्च काफी बढ़ गए हैं. ऐसे में पुराना फैमिली यूनिट फॉर्मूला अब मौजूदा जरूरतों के हिसाब से सही नहीं है. इसलिए नए खर्च को देखते हुए सैलरी तय करने का तरीका भी बदला जाना चाहिए.

8वें वेतन आयोग में इस मांग पर रहेगी नजर

फिलहाल 8वां वेतन आयोग अलग-अलग विभागों से सैलरी, भत्तों और दूसरी जानकारी जुटा रहा है. जुलाई में होने वाली बैठकों में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. अगर वेतन आयोग कर्मचारी संगठनों की इस मांग को मंजूरी देता है, तो यह लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इसलिए फिलहाल इसे एक प्रस्ताव के तौर पर ही देखा जा रहा है.

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