केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने जा रही हैं. संयोग है कि ये बजट 8वें वेतन आयोग के औपचारिक गठन के 3 महीने बाद आ रहा है. सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनर्स के पेंशन समेत अन्य बिंदुओं पर अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए आयोग को 18 महीने का समय दिया गया है. जाहिर है कि सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी अगले वित्त वर्ष (FY 2027) में लागू हो पाए, इसकी संभावना कम है. बावजूद इसके वित्त मंत्री का बजट भाषण देश के 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अहम हो सकता है. कर्मचारी और पेंशनर्स उनके भाषण को गौर से सुनना चाहेंगे, ताकि उन्हें 8वें वेतन आयोग से जुड़ा कोई संकेत मिल सके.
किस एक बात पर नजर रखें कर्मचारी और पेंशनर्स?
1.1 करोड़ सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए वित्त मंत्री का बजट भाषण महत्वपूर्ण हो सकता है. अगर सरकार बजट में संशोधित वेतन और पेंशन के वित्तीय बोझ को संभालने के लिए किसी फंड का प्रावधान करती है, तो ऐसे में आयोग की सिफारिशों के जल्द लागू होने की अटकलें तेज हो जाएंगी. ऐसी स्थिति में, वेतन आयोग, कर्मचारी-पेंशनर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ अपनी बातचीत तेज कर सकता है. सबकुछ ठीक रहा तो आयोग मई 2027 की डेडलाइन से पहले ही अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है.
सरकारी खजाने पर होगा असर
जब 2017 में 7वां वेतन आयोग लागू किया गया था, तब सरकारी खजाने पर करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था. उस समय बेसिक सैलरी और पेंशन बढ़ाने के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, असल बढ़ोतरी केवल 14.3% ही रही थी, क्योंकि तब महंगाई भत्ता (DA) जो 125% था, उसे घटाकर शून्य कर दिया गया था. इस बार माना जा रहा है कि सरकारी खजाने पर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बोझ पड़ सकता है.
जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो DA और DR (जो बेसिक पे का एक हिस्सा होते हैं) को शून्य कर दिया जाता है और फिर महंगाई के हिसाब से हर छह महीने में इन्हें बढ़ाया जाता है.
8वें वेतन आयोग में क्या होगा अलग?
8वें वेतन आयोग के मामले में, अगर 'फिटमेंट फैक्टर' कम भी रखा जाता है, तो भी वेतन में प्रभावी बढ़ोतरी अधिक हो सकती है. इसका कारण यह है कि वर्तमान में DA और DR सिर्फ 58% हैं (7वें वेतन आयोग के समय यह 125% थे). कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की संख्या बढ़ने के कारण इस बार सरकारी खजाने पर बोझ ज्यादा होगा.
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, अगर फिटमेंट फैक्टर 1.8 रखा जाता है, तो सरकार पर 2.4 लाख करोड़ से 3.2 लाख करोड़ रुपये तक का वित्तीय बोझ पड़ सकता है. यह 7वें वेतन आयोग (1.02 लाख करोड़) की तुलना में कहीं अधिक है.
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