8th Pay Commission: मिनिमम बेसिक सैलरी यानी न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये किया जाए. आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखा जाए. हर साल सैलरी में 3 फीसदी की बजाय 6 फीसदी इंक्रीमेंट हो. फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 की जाए, यानी परिवार में माता-पिता को भी जोड़ा जाए. पेंशन को 'अंतिम वेतन का 50 फीसदी' से बढ़ाकर 67 फीसदी किया जाए. महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव को 180 दिन से बढ़ाकर 240 दिन यानी 6 महीने से बढ़ाकर 8 महीने किया जाए. और भी कई और सुधार किए जाएं.
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें तैयार करने की कवायद के बीच ये सारे सुझाव केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के कॉमन मेमोरेंडम में शामिल किए गए हैं. हाल ही में हुई महत्वपूर्ण मीटिंग के बाद कर्मचारियों-पेंशनस के अहम संगठन NC-JCM (Staff-Side) की ओर से ये कॉमन मेमोरेंडम केंद्रीय वेतन आयोग को दिए गए हैं. ये सुझाव मान लिए जाएं तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है.
NC-JCM ने खोला मांगों का पिटारा
आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के इंतजार के बीच, कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों का पिटारा खोल दिया है. नेशनल काउंसिल (JCM) की स्टाफ साइड के सचिव और सीनियर कर्मचारी नेता शिव गोपाल मिश्रा ने 8वें वेतन आयोग को अपना आधिकारिक मेमोरेंडम (ज्ञापन) सौंप दिया है. इस मेमोरेंडम में वेतन, पेंशन और भत्तों को लेकर ऐसी मांगें रखी गई हैं, जो मान लेने के बाद सरकारी कर्मचारियों के दिन फिर जाएंगे. इस बार कर्मचारी संगठनों ने केवल वेतन वृद्धि की मांग नहीं की है, बल्कि पूरे 'पे-स्ट्रक्चर' (वेतन ढांचे) को ही बदलने का प्रस्ताव दिया है.
न्यूनतम वेतन 283% बढ़ाने का प्रस्ताव
मेमोरेंडम की सबसे चौंकाने वाली और प्रमुख मांग न्यूनतम वेतन को लेकर है. वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) 18,000 रुपये है. जेसीएम (NC-JCM) ने इसे बढ़ाकर सीधे 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है. यानी सीधे तौर पर न्यूनतम वेतन में लगभग 283 प्रतिशत की बढ़ोतरी की मांग की गई है. वहीं, अधिकतम वेतन को 2,15,000 रुपये के स्तर पर रखने का सुझाव दिया गया है.
इस भारी बढ़ोतरी के लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया गया है. फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिससे कर्मचारियों का मूल वेतन तय किया जाता है. यदि सरकार इस फिटमेंट फैक्टर को मान लेती है, तो न केवल वर्तमान कर्मचारियों के वेतन में, बल्कि पेंशनभोगियों की पेंशन में भी जबरदस्त इजाफा होगा.
सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग
अभी तक केंद्रीय कर्मचारियों को सालाना 3 प्रतिशत की दर से वेतन वृद्धि (Increment) मिलती है. लेकिन इस बार कर्मचारी यूनियनों ने इसे दोगुना कर 6 प्रतिशत करने की मांग रखी है. शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन स्तर की आवश्यकताओं को देखते हुए 3 प्रतिशत की वृद्धि नाकाफी है. 6 प्रतिशत का सालाना इंक्रीमेंट यह सुनिश्चित करेगा कि कर्मचारियों का वेतन महंगाई के अनुपात में मजबूती से बढ़ता रहे.
पे-स्केल में 18 लेवल घटाकर सिर्फ 7 किए जाएं
कर्मचारी संगठनों ने वर्तमान वेतन संरचना को सरल बनाने के लिए एक बड़ा सुझाव दिया है. 7वें वेतन आयोग में फिलहाल 18 अलग-अलग 'पे लेवल' हैं. मेमोरेंडम में इन्हें मर्ज (विलय) करके केवल 7 व्यापक पे-स्केल बनाने का प्रस्ताव है. प्रस्ताव के अनुसार,
- पे-लेवल 2 और 3 को मिलाकर एक नया 'पे-स्केल 2' बनाया जाए.
- पे-लेवल 4 और 5 को जोड़कर नया 'पे-स्केल 3' बने.
- इसी तरह पे-लेवल 6, 7, 8, 9 और 10 को भी आपस में मर्ज कर नए और सरल ग्रेड बनाने का सुझाव है.
इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि कर्मचारियों का करियर प्रमोशन सुचारू चलता रहे और एक ही पद पर लंबे समय तक बने रहने (Stagnation) की समस्या खत्म हो.
फैमिली यूनिट में माता-पिता भी हों शामिल
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक भावुक और महत्वपूर्ण मांग यह रखी गई है कि 'फैमिली यूनिट' की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 की जाए. इसमें सबसे खास बात यह है कि अब माता-पिता को भी फैमिली यूनिट का हिस्सा बनाने की मांग की गई है. इसके अलावा, वेतन आयोग के इतिहास में पहली बार पुरुष और महिला की यूनिट वैल्यू की असमानता को खत्म कर, दोनों को समान रूप से 1-1 यूनिट देने का प्रस्ताव रखा गया है.
पेंशन और भत्तों पर विशेष जोर
पेंशनभोगियों के लिए मेमोरेंडम में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग को दोहराया गया है. इसके साथ ही प्रस्ताव दिया गया है कि
- रिटायरमेंट के समय अंतिम आहरित वेतन (Last Drawn Pay) का 67% पेंशन के रूप में मिले.
- फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% तय किया जाए.
- हर 10 साल के बजाय हर 5 साल में पेंशन रिवीजन किया जाए.
- HRA (मकान किराया भत्ता) को बढ़ाकर न्यूनतम स्तर पर 30% करने की मांग
- मेट्रो शहरों के लिए HRA को और भी ज्यादा रखने की मांग की गई है.
- ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग
- लीव एनकैशमेंट यानी छुट्टियों के बदले पैसों की सीमा हटाने का भी सुझाव है.
महिलाओं और अवकाश के लिए नए प्रावधान
महिला कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) को बढ़ाकर 240 दिन करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, 'पैरेंट केयर लीव' (माता-पिता की देखभाल के लिए छुट्टी) और पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) की अवधि बढ़ाने जैसे आधुनिक सुझाव भी दिए गए हैं. कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग की सभी सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए.
इस मेमोरेंडम पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है. यदि सरकार इन मांगों को आंशिक रूप से भी स्वीकार करती है, तो ये आजादी के बाद का सबसे बड़ा वेतन संशोधन साबित हो सकता है. फिलहाल, लाखों कर्मचारी 2026 की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं.
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