रेसिप्रोकल अमेरिकी टैरिफ से भारत-अमेरिका बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट वार्ता पर छाया संकट, जानें अंदर की कहानी...

79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने 15 अगस्त को कहा, "भारत के किसान, पशुपालक और मछुआरे, ये हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं, उनसे जुड़ी किसी भी नुकसान वाली पॉलिसी के आगे मोदी दीवार बन कर खड़ा है.

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  • भारत और अमेरिका के बीच बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट की छठी बातचीत टल गई है
  • अमेरिका ने कृषि और डेयरी उत्पादों पर ड्यूटी घटाने की मांग की, जिसे भारत ने जीएम फूड्स की वजह से मना कर दिया
  • मार्च 2025 में शुरू हुई बातचीत का लक्ष्य अक्टूबर-नवंबर तक समझौते के पहले फेज को पूरा करना है
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India-US bilateral trade agreement talks: भारत और अमेरिका के बीच होने वाला बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट की फ्रेमवर्क बनाने के लिए छठे दौर की बातचीत टल गयी है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी डेलिगेशन ने 25 अगस्त, 2025 को भारत की अपनी निर्धारित यात्रा स्थगित कर दी है. ये टीम 25 से 29 अगस्त के बीच बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत के लिए भारत आने वाली थी. अमेरिकी ट्रेड डेलीगेशन ने ये फैसला ऐसे समय पर किया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लगाए भारत पर 50% रेसिप्रोकल टैरिफ के फैसले की तारीख 27 अगस्त पास आ रही है. वहीं, दूसरी तरफ अलास्का में डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच बातचीत का भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.

एग्रीकल्चर और डेरी प्रोडक्ट्स पर फंसा हुआ है मामला

इसके पहले भारत और अमेरिका के बीच "मिनी" ट्रेड डील को लेकर कोई जरूरी समझौता नहीं हो सका, जिसकी एक बड़ी वजह एग्रीकल्चर और डेरी प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी घटाने की अमेरिका की मांग रही. इसे भारत ने नहीं माना. भारत साफ कर चुका है कि वो जीएम फूड्स के आयात को अनुमति नहीं दे सकता.

पीएम ने कहा- मैं किसानों के साथ खड़ा हूं

79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने 15 अगस्त को कहा, "भारत के किसान, पशुपालक और मछुआरे, ये हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं, उनसे जुड़ी किसी भी नुकसान वाली पॉलिसी के आगे मोदी दीवार बन कर खड़ा है. भारत अपने देश के खिलाफ कभी भी कोई समझौता नहीं स्वीकार करेगा."

बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत मार्च 2025 में हुई थी शुरू

बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट के लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया, "अमेरिकी ऑफिसर्स ने मौखिक रूप से भारत नहीं आ पाने की बात कही है. इसके बाद दोनों देशों ने तय किया है कि जल्दी ही छठे दौर की बातचीत के लिए टाइम फिर से डिसाइड किया जाए." बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच एक बैलेंस और प्रॉफिटेबल बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी. इसका टारगेट अक्टूबर-नवंबर 2025 तक समझौते के पहले फेज को पूरा करना है. दोनों देशों के बीच कई वर्चुअल बैठकें हो चुकी हैं.

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रेसिप्रोकल टैरिफ का लेबर-इंटेंसिव सेक्टर पर पड़ेगा प्रेशर

भारत से अमेरिका का सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट, मोबाइल फोन, कट एंड पॉलिश्ड जेमस्टोन, टेक्सटाइल और फार्मा प्रोडक्ट्स का होता है. 50% रेसिप्रोकल टैरिफ का सबसे ज्यादा असर इन 4 सेक्टरों पर पड़ेगा. टेक्सटाइल जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर काफी प्रेशर में रह सकता है.

टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स ने रिलीफ पैकेज का रखा सुझाव

कुछ दिन पहले देश के बड़े टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के साथ कपडा मंत्री गिरिराज सिंह ने मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने एनडीटीवी से कहा, "स्टेकहोल्डर का आत्मविश्वास बढ़ाना जरूरी है. सभी ने एक प्रस्ताव पास किया है कि हम देश के प्रधानमंत्री के साथ खड़े हैं. बैठक में एक्सपोर्टरों ने कहा है कि वो मार्केट के दूसरे ऑप्शन को भी देखेंगे." बैठक में अमेरिका के लगाए गए टैरिफ के असर से निपटने के लिए जरूरी प्लानिंग बनाने पर चर्चा हुई थी. साथ ही टेक्सटाइल एक्सपोर्टरों ने वित्तीय मदद की मांग भी की, जिसके लिए एक रिलीफ पैकेज का सुझाव रखा गया.

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