क्‍या 14.2 किलो वाले सिलेंडर में अब 10 किलो गैस ही मिलेगी? सरकार ने बताया अफवाह, एक गुड न्‍यूज भी दी

एक तरफ सरकार ने अफवाहों पर लगाम लगाई है, वहीं दूसरी ओर शिपिंग मंत्रालय ने एलपीजी की आपूर्ति को लेकर सकारात्मक जानकारी दी है.

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LPG को लेकर फैल रही अफवाहों पर सरकार ने ध्‍यान न देने की अपील की है.

रसोई गैस (LPG) की किल्लत और सिलेंडरों के वजन को लेकर सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म था. इन चर्चाओं के बीच सोमवार को केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आम जनता को बड़ी राहत दी है. सरकार ने न केवल सिलेंडर का वजन घटाने की खबरों को 'भ्रामक' बताया है, बल्कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से दो भारतीय जहाजों के रवाना होने की पुष्टि भी की है.

सिलेंडर का वजन घटने की खबर सिर्फ अफवाह: पेट्रोलियम मंत्रालय

पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें तैर रही थीं कि सरकार सीमित स्टॉक को ज्यादा घरों तक पहुंचाने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर में गैस की मात्रा 14.2 किलोग्राम से घटाकर 10 किलोग्राम करने पर विचार कर रही है. हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है.

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "यह कहना कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर का वजन 14.2 किलो से घटाकर 10 किलो किया जा रहा है, पूरी तरह से अटकलबाजी (Speculative) है. कृपया ऐसी किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें. सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है." सरकार के इस स्पष्टीकरण से उन करोड़ों उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है जो सिलेंडर छोटा होने और कीमतों में बदलाव की आशंका से चिंतित थे.

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समंदर से आई खुशखबरी: भारत पहुंच रहे हैं दो बड़े गैस टैंकर

एक तरफ सरकार ने अफवाहों पर लगाम लगाई है, वहीं दूसरी ओर शिपिंग मंत्रालय ने एलपीजी की आपूर्ति को लेकर सकारात्मक जानकारी दी है. पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण फंसे हुए दो भारतीय एलपीजी टैंकर, 'जग वसंत' और 'पाइन गैस', अब सुरक्षित रास्ते से भारत की ओर बढ़ रहे हैं.

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने बताया कि इन दो टैंकरों में लगभग 93,000 मीट्रिक टन (MT) एलपीजी होने का अनुमान है. उन्होंने पुष्टि की कि जहाजों ने मूवमेंट शुरू कर दिया है और मंगलवार तक इस पर अधिक विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और भारत की कूटनीति

बता दें कि फरवरी के अंत में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. यह रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील है. रणनीतिक बातचीत के बाद, ईरान ने भारत जैसे चुनिंदा देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है.

शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 'जग वसंत' (जिसने कुवैत से गैस लोड की है) और 'पाइन गैस' (यूएई से लोड) ने अपनी यात्रा शुरू कर दी है. ये जहाज सोमवार शाम तक ओमान की खाड़ी पहुंच सकते हैं. इन जहाजों के भारत पहुंचने से घरेलू बाजार में रसोई गैस की किल्लत काफी हद तक कम होने की उम्मीद है.

सरकार के स्पष्टीकरण और गैस टैंकरों की सफल रवानगी ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल एलपीजी के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं.

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