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Dhurandhar 2 के सफलता के बीच दुबई से उजैर बलोच की गिरफ्तारी से जुड़ा 12 साल पुराना पोस्ट वायरल, खौफ का दूसरा नाम था रहमान का भाई

Dhurandhar 2 : उजैर बलोच को ल्यारी गैंग का सरगना माना जाता था और वह कराची में हिंसक अपराधों से जुड़े सबसे ज़्यादा वांछित लोगों में से एक था. 'धुरंधर 2' में दानिश पंडोर ने बलोच का किरदार निभाया है.

Dhurandhar 2 के सफलता के बीच दुबई से उजैर बलोच की गिरफ्तारी से जुड़ा 12 साल पुराना पोस्ट वायरल, खौफ का दूसरा नाम था रहमान का भाई
उजैर बलोच की गिरफ्तारी से जुड़ी 12 साल पुरानी पोस्ट वायरल

Dhurandhar 2 की सफलता के बाद दुबई से उजैर बलोच की गिरफ्तारी पर 12 साल पुरानी पोस्ट वायरल हो गई है. उजैर बलोच को ल्यारी गैंग का सरगना माना जाता था और वह कराची में हिंसक अपराधों से जुड़े सबसे ज्यादा वांछित लोगों में से एक था. जैसे-जैसे फिल्म रिकॉर्ड तोड़ सफलता की ओर बढ़ रही है, फिल्म के असल किरदारों को लेकर चर्चा बढ़ गई है.  29 दिसंबर, 2014 की इस पोस्ट में लिखा था, "उजैर बलोच को  Interpol ने Dubai Airport पर गिरफ्तार कर लिया है. Layari Gangsters के लिए बुरी खबर."

 कौन था उजैर बलोच?
उजैर बलोच को ल्यारी गैंग का सरगना माना जाता था और वह कराची में हिंसक अपराधों से जुड़े सबसे ज़्यादा वांछित लोगों में से एक था. 'धुरंधर 2' में दानिश पंडोर ने बलोच का किरदार निभाया है. 2014 में उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि दुबई में मौजूद पाकिस्तानी दूतावास ने की थी, जिसने बताया था कि उसे दुबई हवाई अड्डे पर इंटरपोल ने हिरासत में लिया था. बताया जाता है कि गिरफ्तारी के समय वह मस्कट से दुबई की यात्रा कर रहा था. अधिकारियों ने बताया कि वह 'अब्दुल गनी' नाम से ईरानी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रहा था. इससे पहले, उसे पाकिस्तान में जेल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन वह गिरफ्तारी से बचने में कामयाब रहा था.

पाकिस्तानी सरकार ने उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुरोध पर इंटरपोल ने भी उसके खिलाफ 'रेड वारंट' जारी किया था.

कराची में अपराध का राज
कराची में बढ़ती हिंसा की घटनाओं, फिरौती के लिए अपहरण, जबरन वसूली और लूटपाट पर लगाम लगाने के लिए जब एक बड़ा अभियान चलाया गया, तो बलूच पाकिस्तान छोड़कर भाग गया. उसकी गतिविधियां ल्यारी में फैली हिंसा से गहराई से जुड़ी हुई थीं. ल्यारी करांची के सबसे पुराने और आर्थिक रूप से सबसे पिछड़े इलाक़ों में से एक है.

2012 में एक पुलिस मुठभेड़ में अब्दुल रहमान यानी 'रहमान डकैत' के मारे जाने के बाद गैंग की कमान संभालने के साथ ही बलूच का दबदबा बढ़ गया. बलूच के नेतृत्व में इस गैंग ने अपने प्रभाव और गतिविधियों का और भी विस्तार किया. अपनी कुख्यात छवि के बावजूद, बलोच ने एक स्थानीय मददगार के तौर पर अपनी एक अलग छवि बना रखी थी. बताया जाता है कि वह इलाक़े के लोगों की शिक्षा, इलाज और शादियों के लिए पैसे देता था. उसका दावा था कि उसकी आमदनी उसके पिता से विरासत में मिले ट्रांसपोर्ट और रियल एस्टेट के कारोबार से होती है.

राजनीतिक संबंध और परिणाम
समय के साथ, बलोच ल्यारी में एक राजनीतिक हस्ती के रूप में उभरा और उसे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का समर्थन प्राप्त हुआ. उसने ल्यारी अमन कमेटी का गठन किया. हालांकि, आपराधिक गतिविधियों के आरोप बढ़ने पर पार्टी ने समूह से दूरी बना ली और अंततः कमेटी पर प्रतिबंध लगा दिया गया. प्रतिद्वंद्वी गिरोह के सरगना अरशद पप्पू की कथित हत्या के साथ उनकी बदनामी और बढ़ गई.  

गिरोह प्रतिद्वंद्विता और निरंतर हिंसा
सितंबर 2013 में शुरू किए गए एक सुरक्षा अभियान के बाद बलूच के नेटवर्क के भीतर आंतरिक दरारें उभरने लगीं.  ल्यारी जल्द ही प्रतिद्वंद्वी समूहों के बीच युद्धक्षेत्र बन गया.   इस बीच, गिरोह के सदस्यों द्वारा बड़े पैमाने पर जबरन वसूली और अपहरण की गतिविधियों ने शहर में भय का माहौल पैदा कर दिया. रिपोर्टों से पता चला कि ल्यारी से आने वाली एक कॉल भी व्यापारियों को सचेत करने के लिए काफी थी, जिसके कारण वे अक्सर फिरौती की मांग मान लेते थे. बलोच पर मुत्तहिदा कौमी आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को यातना देने और उनकी हत्या करने में संलिप्त होने का भी आरोप लगाया गया था.
 

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