हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीत हैं, जिनकी लोकप्रियता समय बीतने के साथ और बढ़ती गई. उन्हीं में से एक है साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल से' का आइकॉनिक गीत ‘छैंया छैंया'. शाहरुख खान और मलाइका अरोड़ा पर फिल्माया गया यह गाना आज भी हर पीढ़ी की प्लेलिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है. इसकी धुन, बोल, कोरियोग्राफी और अनोखी शूटिंग ने इसे बॉलीवुड के सबसे यादगार गीतों में शामिल कर दिया. बहुत कम लोग जानते हैं कि इस मशहूर गीत की जड़ें करीब 300 साल पुराने एक सूफी कलाम से जुड़ी हैं, जिसे महान सूफी संत बाबा बुल्ले शाह ने रचा था.
बाबा बुल्ले शाह के सूफी कलाम से मिली थी प्रेरणा
‘छैंया छैंया' के पीछे की सबसे दिलचस्प बात इसकी प्रेरणा है. बताया जाता है कि गीतकार गुलजार ने इस गाने को लिखते समय बाबा बुल्ले शाह के प्रसिद्ध सूफी कलाम ‘तेरे इश्क नचाया कर थैया-थैया' से प्रेरणा ली थी. यह कलाम इश्क, समर्पण और आध्यात्मिक प्रेम की भावना को व्यक्त करता है. मान्यता है कि बुल्ले शाह ने अपने गुरु शाह इनायत कादरी को मनाने के लिए यह रचना गाई थी. फिल्म की कहानी और किरदारों के अनुरूप गुलजार ने इस भाव को नए शब्दों और नई शैली में ढाला, जिससे ‘छैंया छैंया' एक बिल्कुल अलग पहचान के साथ सामने आया.
चलती ट्रेन पर शूट हुआ था यादगार गीत
इस गीत की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह इसका फिल्मांकन भी रहा. निर्देशक मणिरत्नम ने इसे चलती ट्रेन की छत पर शूट करने का फैसला लिया, जो उस दौर में बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा था. शाहरुख खान और मलाइका अरोड़ा ने बिना किसी ग्रीन स्क्रीन के असली ट्रेन पर यह गाना फिल्माया. इसकी कोरियोग्राफी फराह खान ने की, जिसने गाने को अलग ही ऊर्जा दी. मलाइका के डांस मूव्स और शाहरुख की स्क्रीन प्रेजेंस ने इस गीत को ऐसा विजुअल ट्रीट बनाया कि रिलीज के दशकों बाद भी इसकी चर्चा होती है.
ए.आर. रहमान का संगीत और सुखविंदर की आवाज बनी पहचान
‘छैंया छैंया' को अमर बनाने में संगीतकार ए.आर. रहमान की धुन और सुखविंदर सिंह व सपना अवस्थी की दमदार आवाज का भी बड़ा योगदान रहा. रहमान ने सूफी संगीत की आत्मा को आधुनिक संगीत के साथ इस तरह जोड़ा कि यह गीत सीमाओं से परे जाकर दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया. फिल्म ‘दिल से' में शाहरुख खान, मनीषा कोइराला और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन उसका संगीत आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी धरोहरों में गिना जाता है. ‘छैंया छैंया' इसका सबसे चमकदार उदाहरण है, जिसने तीन दशक बाद भी अपनी लोकप्रियता और कल्ट पहचान बरकरार रखी है.
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