बॉलीवुड में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां प्यार और करियर के बीच मुश्किल फैसले लेने पड़े. कुछ ने समझौता किया, तो कुछ ने अपनी राह खुद चुनी और उसी ने उनकी जिंदगी बदल दी. ऐसी ही एक दिलचस्प कहानी है 70-80 के दशक की एक्ट्रेस नीता मेहता की, जिन्होंने फिल्मों में पहचान बनाने के बाद एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उन्हें पूरी तरह अलग रास्ते पर ला खड़ा किया. वो अपने दौर की जानी-मानी अभिनेत्री थीं, लेकिन आज एक साध्वी के रूप में जानी जाती हैं और आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं.
परिवार के खिलाफ जाकर चुना फिल्मी सफर

नीता मेहता का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां फिल्मों से कोई नाता नहीं था. पिता वकील और मां डॉक्टर थीं, इसलिए घर में पारंपरिक करियर को महत्व दिया जाता था. लेकिन नीता का सपना कुछ और था. उन्होंने परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर मुंबई का रुख किया और एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा.
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फिल्मी करियर और पहचान

मुंबई आने के बाद उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट से एक्टिंग सीखी. उनकी पहली फिल्म ‘पोंगा पंडित' रही. इसके बाद उन्होंने ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की', ‘खून की टक्कर', ‘स्वर्ग से सुंदर', ‘मंगल पांडे' और ‘आखिरी इंसाफ' जैसी फिल्मों में काम किया. धीरे-धीरे उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना ली.
संजीव कुमार से रिश्ता और बड़ा फैसला

फिल्मों में काम करते हुए नीता मेहता की मुलाकात संजीव कुमार से हुई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं. रिश्ता सगाई तक पहुंच गया था, लेकिन एक शर्त ने सब खत्म कर दिया. बताया जाता है कि संजीव कुमार चाहते थे कि शादी के बाद नीता एक्टिंग छोड़ दें, लेकिन नीता ने अपने करियर को नहीं छोड़ा. यही वजह बनी और दोनों का रिश्ता टूट गया. बाद में नीता ने फिल्मों से दूरी बनाई, ज्वेलरी बिजनेस शुरू किया और आखिरकार साध्वी बन गईं. आज वो स्वामी नित्यानंद गिरी के नाम से जानी जाती हैं और प्रवचन देती हैं.
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