सैकड़ों छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से प्रदर्शन जारी था. आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही थी, जिसने लगातार मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई थी. इस्तीफे की खबर सामने आते ही प्रदर्शन स्थल पर जश्न का माहौल बन गया. छात्रों और कार्यकर्ताओं ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया. सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की चर्चा तेज हो गई, जहां कई कलाकारों और कॉमेडियंस ने छात्रों के संघर्ष की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी और इसे लोकतांत्रिक आंदोलन की सफलता बताया.
समय रैना, वरुण ग्रोवर और वीर दास ने दी प्रतिक्रिया
इस्तीफे के बाद सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वालों में कॉमेडियन समय रैना भी शामिल रहे. उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि छात्रों को आगे भी इसी तरह हिम्मत और ताकत मिलती रहे. वहीं, वरुण ग्रोवर ने जंतर-मंतर पर जश्न मनाते छात्रों और CJP कार्यकर्ताओं का वीडियो साझा किया.

उन्होंने अपने पोस्ट में आंदोलन से जुड़े लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं की एकजुटता और लगातार बने रहे दबाव ने सत्ता को फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया. दूसरी ओर, कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए छात्रों को बधाई दी और अपने अंदाज में तंज कसते हुए इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने पोस्ट पर 'FRAAANDS!!!!' लिखा.
अभिजीत दिपके बोले- अभी दो मांगें बाकी हैं
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस्तीफे को आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि उनकी सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं. उन्होंने कहा कि आंदोलन यहीं खत्म नहीं होगा और बाकी मुद्दों को लेकर भी संघर्ष जारी रहेगा. दिपके ने यह भी कहा कि अक्सर कहा जाता था कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन छात्रों के दबाव ने यह धारणा बदल दी. प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं और छात्रों ने नारेबाजी करते हुए इस फैसले का स्वागत किया और इसे संगठित जनदबाव की जीत बताया.
6 जून से शुरू हुआ था आंदोलन, NTA पर भी उठे सवाल
नीट पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर 6 जून 2026 से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था. इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए. बाद में सोनम वांगचुक भी इस अभियान से जुड़े और 28 जून से उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी.
DEMOCRACY WINS! 🇮🇳🇮🇳🇮🇳 pic.twitter.com/HpCaqBkPxc
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 25, 2026
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें कई छात्र घायल हुए. इसी बीच 24 जुलाई की रात राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को निलंबित किए जाने की खबर भी सामने आई. इसके कुछ घंटे बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया और आंदोलनकारी छात्रों ने इसे अपने संघर्ष की अहम सफलता करार दिया.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं