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'साउथ जुनून से फिल्में बनाता है, बॉलीवुड कॉर्पोरेट कल्चर में फंस गया', एनडीटीवी से बोलीं नीतू चंद्रा 

अभिनेत्री नीतू चंद्रा और संजय दत्त की फिल्म “आखिरी सवाल” 8 मई को रिलीज़ होने जा रही है. इस मौके पर एनडीटीवी ने नीतू चंद्रा से खास बातचीत की.

'साउथ जुनून से फिल्में बनाता है, बॉलीवुड कॉर्पोरेट कल्चर में फंस गया', एनडीटीवी से बोलीं नीतू चंद्रा 
आखिरी सवाल में नजर आएंगी नीतू चंद्रा

अभिनेत्री नीतू चंद्रा और संजय दत्त की फिल्म “आखिरी सवाल” 8 मई को रिलीज़ होने जा रही है. इस मौके पर एनडीटीवी ने नीतू चंद्रा से खास बातचीत की. बड़े-बड़े सितारों के साथ काम कर चुकी नीतू चंद्रा ने हिंदी सिनेमा से दक्षिण सिनेमा की ओर अपने रुख और दोनों उद्योगों के बीच के अंतर पर खुलकर बात की. नीतू चंद्रा ने कहा, “दिल का फर्क है जनाब. साउथ में लोग दिल से फिल्में बनाते हैं, दिल से पैशन है, फिल्म के लिए प्यार है. हिंदी में कॉर्पोरेट कल्चर ज्यादा है. मैं यह बात संतुलन के साथ कह रही हूं ताकि किसी को बुरा न लगे. अगर वहां किसी को येलो लुंगी और येलो कुर्ता पहनकर डांस करना है और उसे यकीन है कि वह हिट होगा, तो वह पूरे कन्विक्शन के साथ करता है और वह हिट भी होता है. यहां ऐसा कम देखने को मिलता है".

नीतू ने कहा, "यहां ज्यादातर हीरो स्लो मोशन में सूट-बूट में एंट्री लेते हैं, जबकि दर्शक हीरो को हीरो की तरह देखना चाहते हैं- लार्जर दैन लाइफ, जो औरतों की रक्षा करता हुआ दिखे. भले ही आज की महिलाएं खुद मजबूत हैं, लेकिन स्क्रीन पर वह छवि अभी भी पसंद की जाती है. 1980 के दशक की हिंदी फिल्मों में जो अंदाज़ था, वही आज साउथ सिनेमा में बन रहा है, जिसे हमने कहीं न कहीं छोड़ दिया है".

नीतू आगे बोलती हैं, "मैंने साउथ के बड़े निर्देशकों के साथ काम किया है. उनका नजरिया अलग होता है. वे कहते हैं कि ऐसे कलाकारों को ढूंढो जो किरदार में फिट बैठते हों. चाहे वे लंबे समय से स्क्रीन पर न दिखे हों. वे ऐसे चेहरों की तलाश करते हैं जो वेस्टर्न और इंडियन दोनों तरह के किरदारों में ढल सकें. वहाँ विज़न को स्वीकार करने की तैयारी रहती है. यहां अक्सर पहले से तय कर लिया जाता है कि कौन सा कलाकार किस तरह दिखेगा. अगर किसी को वेस्टर्न दिखाना है, तो उसे वेस्टर्न कपड़ों में ही दिखाया जाएगा. इंडियन लुक में उसे अलग तरीके से सोचने की कोशिश कम होती है".

आखिरी में एक्ट्रेस ने कहा, "मेरे लिए हमेशा स्क्रिप्ट सबसे अहम रही है. मुझे जहां बेहतर कहानियां और निर्देशक मिले, मैंने वहां काम किया. भाषा मेरे लिए कभी बाधा नहीं रही, काम की गुणवत्ता ही सबसे महत्वपूर्ण है". अंत में बता दें कि फिल्म 'आखिरी सवाल' में नीतू चंद्रा एक समाचार संपादक की भूमिका निभा रही हैं, जो कहानी में अहम मोड़ लेकर आती है.

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