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तन्हाई, दर्द, प्यार और अकेलापन को कुछ ऐसे बयां करती थीं मीना कुमारी, आज की पीढ़ी भी हो जाएगी उनकी फैन

हिंदी सिनेमा की ‘ट्रेजेडी क्वीन’ का जिक्र हो तो बेहिसाब खूबसूरत और अभिनय में पारंगत अदाकारा मीना कुमारी का जिक्र जरूरी है. वह सिर्फ प्रतिभाशाली अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक गहरी संवेदनशील उर्दू कवयित्री भी थीं.

तन्हाई, दर्द, प्यार और अकेलापन को कुछ ऐसे बयां करती थीं मीना कुमारी, आज की पीढ़ी भी हो जाएगी उनकी फैन
तन्हाई, दर्द, प्यार और अकेलापन को कुछ ऐसे बयां करती थीं मीना कुमारी

हिंदी सिनेमा की ‘ट्रेजेडी क्वीन' का जिक्र हो तो बेहिसाब खूबसूरत और अभिनय में पारंगत अदाकारा मीना कुमारी का जिक्र जरूरी है. वह सिर्फ प्रतिभाशाली अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक गहरी संवेदनशील उर्दू कवयित्री भी थीं. उन्होंने ‘नाज' उपनाम से कई कविताएं लिखीं, जिनमें जीवन की तन्हाई, दर्द, प्रेम की लालसा, अकेलापन और भावनात्मक संघर्ष साफ झलकते हैं. मीना कुमारी की कविताएं फिल्मी चमक-दमक से परे उनकी आत्मा को उजागर करती हैं. उनके अंदर की छिपी कवयित्री को आज की पीढ़ी भी चाव के साथ पढ़ती है. 

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'मीना कुमारी द पोएट: ए लाइफ बियॉन्ड सिनेमा' लेखक नूरुल हसन अनुवादित व रोली बुक्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में मीना कुमारी की चुनिंदा उर्दू कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद शामिल है. किताब में ऐसी कविताएं हैं, जिनमें दिवंगत अभिनेत्री ने प्यार, अकेलापन, इच्छाएं, भ्रम, सपनों की खिड़की, मौन और मासूमियत जैसे विषयों को बड़ी मार्मिकता से व्यक्त किया है. दिवंगत संगीतकार नौशाद अली ने मीना कुमारी की लेखनी को लेकर बताया था, “उनकी कविताओं में उनकी पीड़ा स्पष्ट रूप से झलकती थी.”

जीवन भर के दर्द को लेकर वह इतनी हताश हो गईं कि शराब और कविता उनका सहारा बन गई. उन्होंने खुद कहा था कि “विश्वासघात की भावना से लड़ने के लिए मैं शराब पीने और कविता लिखने लगी थी.” मीना कुमारी की कविताएं मार्मिक, सरल और बातचीत जैसी हैं. इनमें अद्भुत तात्कालिकता है, जो पाठक को तुरंत अपनी गिरफ्त में ले लेती है. लेखक नूरुल हसन कहते हैं, “बहुत कम लोग जानते हैं कि मीना कुमारी की कलम में भी कमाल की कला थी. उनकी कविताएं फिल्मों में दिखने वाले व्यक्तित्व से कहीं ज्यादा संवेदनशील और आत्म-जागरूक हैं.”

1972 में उनकी मृत्यु के तुरंत बाद गुलजार ने ‘हिंद पॉकेट बुक्स' के जरिए उनकी कविताओं का संग्रह प्रकाशित करवाया था. हसन बताते हैं कि उन्हें हावड़ा रेलवे स्टेशन पर संयोग से यह पतली सी किताब मिली थी, जिसे उन्होंने बार-बार पढ़ा. उनकी कविताओं में व्यक्तिगत अनुभव और दार्शनिक गहराई दोनों हैं. ‘द डंब चाइल्ड', ‘खाली दुकान' और ‘आखिरी ख्वाहिश' जैसी कविताएं बेहद हृदयविदारक हैं.

कविता मीना कुमारी के लिए सार्वजनिक छवि से दूर हटकर खुद को व्यक्त करने का माध्यम थी. उनकी रचनाएं फिल्म इंडस्ट्री और अपनी आंतरिक दुनिया दोनों को दर्ज करती हैं. मीना कुमारी की कविताएं डायरी के अंशों की तरह लगती हैं. इनमें अकेलेपन और अपूर्ण प्रेम की पीड़ा बार-बार उभरती है. “जिंदगी सिर्फ मोहब्बत से नहीं चलती नाज…” जैसी पंक्तियां उनके वैवाहिक जीवन और व्यक्तिगत संघर्षों को दर्शाती हैं.

‘आखिरी ख्वाहिश' में उन्होंने लिखा: “आज रात, यह अकेलापन, दिल की धड़कनों की ये आवाज, यह विचित्र सन्नाटा, गजलों की यह मौन प्रस्तुति, डूबते तारे, यह आखिरी कंपन, प्रेम का… मृत्यु की यह सर्वव्यापी सिम्फनी, एक पल के लिए आइए, मेरी बंद आंखों में प्रेम के सपने सजाओ.”

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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आईएएनएस
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