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कैदियों के लिए लिखा गया गाना, लता मंगेशकर ने गाया, बना स्कूलों का प्रार्थना गीत, 69 साल बाद भी खूब पॉपुलर

लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड हुआ यह फिल्मी गीत होने के बावजूद देशभर के स्कूलों की पहचान बन गया. आज भी कई स्कूलों में इस गाने को प्रार्थना के तौर पर गाया जाता है.

कैदियों के लिए लिखा गया गाना, लता मंगेशकर ने गाया, बना स्कूलों का प्रार्थना गीत, 69 साल बाद भी खूब पॉपुलर
कैदियों के लिए लिखा गया गाना, हर स्कूल में बजता है लता मंगेशकर का गाया यह गीत
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हिंदी सिनेमा की महान गायिका लता मंगेशकर ने अपने करियर में हजारों गीत गाए, लेकिन कुछ गाने ऐसे रहे जो फिल्मों की सीमाएं पार कर लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए. इन्हीं में से एक है ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम', जिसे आज भी देश के हजारों स्कूलों में प्रार्थना के रूप में गाया जाता है. दिलचस्प बात यह है कि यह गीत किसी स्कूल या धार्मिक आयोजन के लिए नहीं लिखा गया था, बल्कि 69 साल पहले एक हिंदी फिल्म के लिए तैयार किया गया था. समय के साथ इसकी भावनात्मक अपील और प्रेरणादायक शब्दों ने इसे ऐसा मुकाम दिलाया कि यह पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों की जुबान पर चढ़ गया. आज गीतकार भरत व्यास की पुण्यतिथि पर जानते हैं इस सदाबहार गीत की कहानी.

फिल्म के एक भावुक दृश्य के लिए लिखा गया था यह गीत

‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम' साल 1957 में रिलीज हुई क्लासिक फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ' का हिस्सा था. इस फिल्म का निर्देशन और मुख्य भूमिका दिग्गज अभिनेता वी. शांताराम ने निभाई थी. कहानी एक ऐसे जेलर की थी, जो अपराधियों को सजा से ज्यादा सुधार में विश्वास रखता है. फिल्म में एक भावुक दृश्य आता है, जब कैदी अपनी गलतियों पर पछताते हुए ईश्वर से सही राह पर चलने की प्रार्थना करते हैं. उसी मौके के लिए भरत व्यास ने इस गीत की रचना की. लता मंगेशकर की आत्मीय आवाज और संगीतकार वसंत देसाई के मधुर संगीत ने इस गीत को अमर बना दिया. बाद में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि देशभर के कई स्कूलों ने इसे अपनी दैनिक प्रार्थना का हिस्सा बना लिया.

भरत व्यास ने लिखे हिंदी सिनेमा के कई कालजयी गीत

राजस्थान के बीकानेर में जन्मे भरत व्यास हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित गीतकारों में गिने जाते हैं. 1950 और 1960 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों के लिए ऐसे गीत लिखे, जो आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद हैं. ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम' के अलावा ‘आधा है चंद्रमा रात आधी', ‘अरे जा रे हट नटखट', ‘तू छुपी है कहां', ‘तुम गगन के चंद्रमा', ‘लौट के आजा मेरे मीत' और ‘ये कौन चित्रकार है' जैसे गीत उनकी लेखनी का कमाल हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि गीतकार होने के साथ-साथ उन्होंने 1949 में ‘रंगीला राजस्थान' नाम की फिल्म का निर्देशन भी किया था. भरत व्यास के लिखे गीत आज भी यह साबित करते हैं कि अच्छे शब्द और सच्ची भावनाएं समय के साथ पुरानी नहीं पड़तीं.

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