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ये थी देश की पहली एडल्ट फिल्म, इस हीरोइन ने किया था काम, खुद ही नहीं देख पाई थी फिल्म

76 साल पहले आई फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ए सर्टिफिकेट दिया था. इसी फिल्म के साथ ए सर्टिफिकेट की शुरुआत हुई थी. हालांकि इस फिल्म में काम करने वाली हीरोइन की उम्र सिर्फ 16 साल थी.

ये थी देश की पहली एडल्ट फिल्म, इस हीरोइन ने किया था काम, खुद ही नहीं देख पाई थी फिल्म
ये थी देश की पहली एडल्ट फिल्म, 16 साल की हीरोइन ने किया था काम

आज के दौर में फिल्मों और वेब सीरीज में बोल्ड सीन, किसिंग सीक्वेंस और एडल्ट कंटेंट देखना आम बात हो गई है. सिनेमाघरों से लेकर ओटीटी तक हर साल कई ए-रेटेड फिल्में रिलीज होती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा की पहली ऐसी फिल्म कौन-सी थी जिसे सेंसर बोर्ड ने ‘ए' सर्टिफिकेट दिया था? करीब 76 साल पहले आई फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ए सर्टफिकेट दिया था. मजेदार बात ये है कि वो एक कॉमेडी फिल्म थी. जिसकी लीड एक्ट्रेस की ही उम्र 16 साल थी. ए सर्टिफिकेट मिलने के बाद वो एक्ट्रेस खुद ही अपनी फिल्म नहीं देख पाई थी.

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1950 में रिलीज हुई थी फिल्म

भारत की पहली ‘ए' रेटेड फिल्म का नाम था ‘हंसते आंसू'. इस फिल्म को केबी लाल ने डायरेक्ट किया था और इसकी घोषणा 1949 में हुई थी. फिल्म 1950 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई. देखने में ये एक फैमिली कॉमेडी ड्रामा थी. लेकिन उस समय के सेंसर बोर्ड यानी सीबीएफसी ने इसे एडल्ट फिल्म माना था. फिल्म में उस दौर की मशहूर एक्ट्रेस मधुबाला लीड रोल में नजर आई थीं. खास बात ये है कि तब उनकी उम्र महज 16 साल थी. उनके साथ फिल्म में एक्टर मोतीलाल, गोप और मनोरमा भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दिए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक जब फिल्म रिलीज हुई. तब मधुबाला खुद भी इसे थिएटर में नहीं देख सकीं. वजह थी फिल्म को मिला ‘ए' सर्टिफिकेट. कहा गया कि वो अभी 17 साल की भी नहीं हुई थीं. इसलिए नियमों के मुताबिक उन्हें फिल्म देखने की परमिशन नहीं दी गई.

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डबल मीनिंग टाइटल और घरेलू हिंसा

बताया जाता है कि जब फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए सेंसर बोर्ड के पास पहुंची. तब बोर्ड ने इसमें दिखाए गए डॉमेस्टिक वायलेंस और फिल्म के डबल मीनिंग टाइटल पर आपत्ति जताई. इसी वजह से फिल्म को ‘ए' सर्टिफिकेट दे दिया गया. उस समय ये फैसला काफी चौंकाने वाला माना गया था. क्योंकि भारतीय सिनेमा में इस तरह का सर्टिफिकेशन बिल्कुल नया था. ये बात अलग है कि आज इस फिल्म को देखें तो शायद दर्शक भी सोच में पड़ जाएं कि उसे एडल्ट फिल्म क्यों माना जाए.

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