‘चांदी की दीवार न तोड़ी, प्यार भरा दिल तोड़ दिया, एक धनवान की बेटी ने निर्धन का दामन छोड़ दिया' और 'यारी है ईमान मेरा यार मेरी दोस्ती' के बोल आज भी लोगों के दिल पर राज करते हैं. ये गाने आज भी सदाबहार हैं, लेकिन उन्हें लिखने वाले प्रसिद्ध गीतकार गुलशन कुमार मेहता के संघर्ष की कहानी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. गुलशन कुमार मेहता को गुलशन बावरा (Gulshan Bawra) के नाम से भी जाना जाता है. उनके द्वारा लिखे कई प्रसिद्ध गीतों को आज भी हम सुनते हैं, लेकिन एक गीतकार बनने के लिए उनके सामने एक शर्त रखी गई थी. 12 अप्रैल को गीतकार गुलशन बावरा की जयंती है और इस मौके पर हम उनकी जिंदगी से जुड़े अनदेखे पहलुओं के बारे में बात करेंगे.
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देश के विभाजन से पहले पाकिस्तान के शेखुपुर में जन्मे गुलशन बावरा का जन्म गुलशन मेहता के रूप में हुआ था, जिन्हें विभाजन की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी. भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय उनकी आंखों के सामने ही उनके माता-पिता की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली आकर अपना आगे का जीवन व्यापन किया और रेलवे की क्लर्क की नौकरी की, लेकिन बचपन से कविता लिखने वाले बावरा को नौकरी में दिशा नहीं मिल पा रही थी, जिसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर बॉलीवुड का रुख किया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले ब्रेक मिलने से पहले ही निर्माता और निर्देशक रविंद्र दुबे ने गीतकार के सामने एक शर्त रखी थी?
निर्माता और निर्देशक रविंद्र दुबे ने गीतकार को इंडस्ट्री में पहला ब्रेक दिया है और साल 1958 और 1959 में रिलीज हुई फिल्म चंद्रसेना और सट्टा बाजार के लिए गीत लिखने का मौका दिया था, हालांकि उन्होंने पहले ही साफ कर दिया था कि वो उनकी फिल्मों में सिर्फ गीतों तक सीमित रहेंगे, कभी भी एक्टिंग नहीं करेंगे. खुद गुलशन बावरा ने इस बात का खुलासा एक पुराने इंटरव्यू में किया था.
फिल्मों में बतौर एक्टर काम करने के सवाल पर उन्होंने कहा, मैं फिल्म इंडस्ट्री में नया-नया आया था तो उम्र बहुत कम थी और दिखने में ठीक-ठाक था. उस वक्त निर्माता और निर्देशक रविंद्र दुबे ने अपनी फिल्मों के लिए गीत लिखने का ऑफर दिया, लेकिन यह भी कहा कि मैं उनकी किसी भी फिल्म में एक्टिंग नहीं करूंगा. मैंने मान लिया क्योंकि मैं एक्टर बनने आया ही नहीं था, मुझे गीतकार ही बनना था. फिल्म सट्टा बाजार के दौरान गीत लिखते वक्त उनके रंग-बिरंगे कपड़ों और गहराई से लिखने की वजह से ही फिल्म के वितरक शांतिभाई दबे ने उन्हें बावरा नाम दिया था.
मेरे देश की धरती गीत लिखने वाले बावरा ने हिंदी सिनेमा की कई फिल्मों में एक्टिंग की थी. उन्होंने साल 1967 में आई 'उपकार', 'जाने-अनजाने', 'बेईमान', 'बीवी हो तो ऐसी', 'आप के दीवाने', और 'अगर तुम न होते' जैसी कई फिल्मों में काम किया था. हालांकि यह किरदार बहुत छोटे थे.
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