मौजूदा दौर में किसी फिल्म का 500 या 1000 करोड़ कमाना बड़ी खबर बन जाती है. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब न सोशल मीडिया था, न मल्टीप्लेक्स और न ही एडवांस बुकिंग का शोर. इसके बावजूद एक फिल्म ने ऐसा तूफान मचाया कि सिनेमाघरों के बाहर टिकट के लिए लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं. दर्शक कई-कई दिनों तक टिकट का इंतजार करते थे और थिएटर मालिकों को एक्स्ट्रा शो तक चलाने पड़े थे. इस फिल्म के गाने तक भी लोगों की जुबान पर चढ़ गए थे. रिलीज के बाद महीनों तक भी इसका क्रेज कम नहीं हुआ. हालात ऐसे हो गए थे कि बढ़ती मांग को देखते हुए टिकटों के दाम तक बढ़ाने पड़े. उस दौर में जब फिल्मों का थिएटर में टिकना ही बड़ी बात होती थी, यह फिल्म लगातार रिकॉर्ड बनाती चली गई. अगर अभी भी आपको नाम याद नहीं आया है, तो बता दें कि जिस फिल्म की बात हो रही है, उसका नाम क्रांति है.
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मल्टी स्टारर फिल्म ने मचा दिया था तहलका
साल 1981 में रिलीज हुई क्रांति को हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म में दिवंगत सुपरस्टार दिलीप कुमार के साथ मनोज कुमार, हेमा मालिनी, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा और परवीन बाबी जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे. देशभक्ति, एक्शन और दमदार ड्रामे से भरपूर इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी.
67 हफ्तों तक थिएटरों में चली फिल्म
क्रांति की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह फिल्म कई सिनेमाघरों में 67 हफ्तों तक चली. वहीं एक थिएटर में यह लगातार 96 दिनों तक टिकी रही. उस समय किसी फिल्म का इतने लंबे समय तक थिएटर में बने रहना अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जाता था.
बजट से कई गुना ज्यादा की कमाई
इस फिल्म को बनाने में लगभग 3 से 5 करोड़ रुपये का खर्च आया था. लेकिन रिलीज के बाद इसने बॉक्स ऑफिस पर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जो उस दौर में बेहद बड़ी उपलब्धि थी.
आज भी कायम है फिल्म का जादू
चार दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी क्रांति को हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है. इसके गाने और कहानी आज भी दर्शकों को पसंद आते हैं. दिलीप कुमार की इस ऐतिहासिक फिल्म को आज भी यूट्यूब पर देखा जा सकता है. यही वजह है कि क्रांति केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय भी मानी जाती है.
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