बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली से जुड़े 2019 के रेप मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. पंचोली ने अदालत में याचिका दायर कर इस FIR को रद्द करने की मांग की है. यह FIR मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी. मामले में शिकायतकर्ता एक महिला बॉलीवुड अभिनेत्री हैं. पंचोली की ओर से वकील प्रशांत पाटिल ने अदालत में दलील दी कि यह मामला झूठा और दुर्भावना से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि कथित घटना के करीब 15 साल बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जिससे इसकी मंशा पर सवाल उठता है. वकील ने सुप्रीम कोर्ट के ‘भजनलाल' फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस आधार पर FIR को रद्द किया जा सकता है.
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस की ओर से शिकायतकर्ता को जांच में शामिल होने के लिए 11 बार नोटिस भेजा गया, लेकिन वह पेश नहीं हुईं. इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता को नया नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई, जो 24 फरवरी 2026 को तय है, उस दिन अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया.
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वकील प्रशांत पाटिल ने यह भी कहा कि कथित घटना से पहले एक व्यक्ति ने पंचोली से मुलाकात की थी. उस मुलाकात की एक रिकॉर्डिंग अदालत में जमा कराई गई है. उनके अनुसार, उस रिकॉर्डिंग से यह संकेत मिलता है कि दोबारा शिकायत दर्ज कराने के पीछे गलत इरादा था. यह FIR 27 जून 2019 को दर्ज की गई थी. मुंबई पुलिस ने पंचोली के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. इनमें धारा 376 (रेप), 328 (जहर देकर नुकसान पहुंचाना), 384 (जबरन वसूली), 341 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गैरकानूनी तरीके से बंदी बनाना), 323 (मारपीट) और 506 (धमकी देना) शामिल हैं.
FIR दर्ज होने के बाद आदित्य पंचोली ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है. फिलहाल मामला अदालत में लंबित है और अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को होगी. अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं.
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