करवा चौथ आने वाला है और इस खास मौके पर हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं, जो औरतों के सोलह श्रृंगार से लेकर पति के लिए उनके प्यार को बयां करते हैं. आज हम 53 साल पुराने एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे, जिसे करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार करते हुए जब भी कोई औरत अपने पति के लिए तैयार होती है, तो ये गाना जरूर याद आ जाता है. हम बात कर रहे हैं साल 1973 में आई फिल्म सौदागर के गाने 'सजना है मुझे सजना के लिए' की, जिसमें अमिताभ बच्चन ने मोती का किरदार निभाया था. जो अपने फायदे के लिए एक विधवा से शादी करता है और फिर उसे छोड़ देता है. फिल्म की कहानी इस खूबसूरत गाने को एक दिलचस्प मोड़ देती है. तो आइए जानते हैं कौन सा है वो गाना.
53 साल बाद भी कायम है गाने का जादू
फिल्म सौदागर का गाना जिसे आइने के सामने तैयार होते हुए आपने भी जरूर गुनगुनाया होगा. जी हां, हम बात कर रहे हैं 'सजना है मुझे सजना के लिए' जो फिल्म 'सौदागर' का फेमस गाना है. इस गाने के बोल और संगीत के रविंद्र जैन ने तैयार किया था, जिसे आशा भोसले ने अपनी सुरीली आवाज से और खास बना दिया. इस गाने के हर बोल को सुनकर के इससे कनेक्ट किया जा सकता है. इस गाने में संजने-संवरने की खुशी और किस तरह से तैयार होना है इसको बेहद ही खूबसूरती से पेश किया गया है. यही वजह है कि शादी-ब्याह और सोलह श्रृंगार की बात हो, तो ये गाना आज भी लोगों की जुबान पर आ जाता है. गाने के बोल कुछ इस तरह हैं-
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सजना है मुझे सजना के लिए
सजना है मुझे सजना के लिए
ज़रा उलझी लटें संवार दूं
हर अंग का रंग निखार लून
के सजना है मुझे सजना के लिए
सजना है मुझे सजना के लिए
पानी पड़े तन पे तो शोले निकले
जाने कैसे आँगन में बदन जल
पानी पड़े तन पे तो शोले निकले
जाने कैसे आँगन में बदन जल
दिन भर की थकान उतार लूँ
हर अंग का रंग निखार लून
के सजना है मुझे सजना के लिए
सजना है मुझे सजना के लिए
अमिताभ बच्चन बने थे ऐसे पति, जिसे कोई नहीं चाहेगा
बात करें फिल्म 'सौदागर' की कहानी की तो इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ नूतन और पद्मा खन्ना ने लीड रोल प्ले किया था. सुधेंदु रॉय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अमिताभ ने मोती का किरदार निभाया था, जो गुड़ बेचने का काम करता है. लेकिन उसे फूलबानों (पद्मा खन्ना) से प्यार हो जाता है. लेकिन शादी करने के लिए उसके पास पैसे उतने पैसे नहीं होते हैं. इस वजह से वो महजुबीन (नूतन) जो एक विधवा होती है उससे शादी कर लेता है. वो उसके साथ काम में मदद करती है, मोती उससे मेहनत करवाकर पैसे जमा करता है और फिर उसको तलाक दे देता है. असल जिंदगी में कोई भी औरत इस तरह का पति नहीं चाहेगी.
रविंद्र जैन के संगीत ने गाने को बनाया यादगार
फिल्म 'सौदागर' को खास बनाने में सिर्फ इसकी कहानी ही नहीं, बल्कि इसका संगीत भी काफी अहमियत रखता है. फिल्म के साउंडट्रैक की बात करें तो इसमें कुल 7 गाने हैं. रविंद्र जैन ने ही इसका संगीत तैयार किया और गाने भी लिखे. वहीं इन गानों को आवाज दी किशोर कुमार, आशा भोसले, मोहम्मद रफी, आरती मुखर्जी, मन्ना डे और लता मंगेशकर ने. इसके सात गाने कुछ इस तरह थे 'सजना है मुझे सजना के लिए', 'तेरा मेरा साथ रहे', 'क्यों लायो सइया पान', 'हुस्न है या कोई कयामत है', 'दूर है किनारा', 'तेरा-मेरा साथ रहे' , 'मै हूं फूलबानो' और 'हर हसीन चीज का मैं तलबगार हूं'.
फिल्म सौदागर की कहानी बंगाली लेखक नरेंद्रनाथ मित्र की कहानी 'रस' पर बेस्ड थी. इसकी हानी भले ही एक स्वार्थी पति की थी, लेकिन उसका यह गाना प्यार और सजने-संवरने का खूबसूरत एहसास बनकर आज भी लोगों के दिलों में बसा है.
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