रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म रामायण (Ramayana) इन दिनों लगातार चर्चा में बनी हुई है. फिल्म के भव्य सेट, शानदार कलाकारों और करीब 4000 करोड़ रुपये के बजट को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा में रामायण की कहानी पहली बार कब बड़े पर्दे पर दिखाई गई थी? उस फिल्म को बनाने में कितने रुपये खर्च हुए थे और किसने इसका निर्देशन किया था? आज भले ही रामायण पर बड़े बजट की फिल्में बन रही हों, लेकिन 109 साल पहले भी एक फिल्मकार ने इस महाकाव्य को पर्दे पर उतारने का साहस किया था. वह फिल्म थी लंका दहन.
15 हजार रुपये में तैयार हुई थी लंका दहन
भारतीय सिनेमा के इतिहास में दादा साहेब फाल्के का नाम बेहद खास है. उन्हें भारतीय सिनेमा का जनक कहा जाता है. उन्होंने साल 1917 में रामायण की कहानी पर आधारित फिल्म लंका दहन बनाई थी. यह फिल्म उस दौर में सिनेमाघरों में आई थी, जब फिल्मों को बनाने और दिखाने का तरीका आज से बिल्कुल अलग था.
दादा साहेब फाल्के के निर्देशन में बनी इस फिल्म को तैयार करने में करीब 15 हजार रुपये खर्च हुए थे. उस समय यह रकम फिल्म निर्माण के लिए काफी बड़ी मानी जाती थी. फिल्म में रामायण के उस प्रसंग को दिखाया गया था, जिसमें हनुमान जी लंका पहुंचते हैं और वहां आग लगा देते हैं.
बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही थी फिल्म
लंका दहन सिर्फ रामायण की कहानी को पर्दे पर दिखाने के लिए ही खास नहीं थी, बल्कि इसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला था. उस दौर में धार्मिक और पौराणिक कहानियों पर आधारित फिल्मों को दर्शक काफी पसंद करते थे. लंका दहन भी इसी वजह से लोगों के बीच लोकप्रिय हुई. बताया जाता है कि इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 35 हजार रुपये से ज्यादा की कमाई की थी. उस समय के हिसाब से यह एक बड़ी सफलता थी. फिल्म की कमाई ने साबित किया कि भारतीय दर्शक अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक कहानियों को पर्दे पर देखना पसंद करते हैं.
एक ही कलाकार ने निभाए थे राम और सीता के किरदार
लंका दहन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा अभिनेता अण्णा सालुंके का भी है. उन्होंने इस फिल्म में भगवान राम और माता सीता, दोनों की भूमिका निभाई थी. उस दौर में महिला कलाकारों का फिल्मों में काम करना आम नहीं था. ऐसे में पुरुष कलाकार ही महिलाओं के किरदार भी निभाते थे.
अण्णा सालुंके का एक ही फिल्म में राम और सीता बनना भारतीय सिनेमा के इतिहास की अनोखी घटनाओं में गिना जाता है. आज जब रामायण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करके फिल्में बनाई जा रही हैं, तब 15 हजार रुपये में बनी लंका दहन की याद दिलाती है कि भारतीय सिनेमा में रामायण की कहानी दिखाने की परंपरा 109 साल पुरानी है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं