जेन जी आंदोलन से उभरे बालेन शाह, कैसे पूरा करेंगे युवाओं के सपने

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संगीता थपलियाल

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की शानदार जीत ने नेपाली जनता में उम्मीद की एक नई लहर पैदा कर दी है.आरएसपी ने संसद में बहुमत हासिल किया है, जो 2015 के संविधान के बाद पहली बार देखने को मिला है. युवा नेपाली अब अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को पूर्ण बहुमत के साथ संसद तक पहुंचाने में अपनी भागीदारी महसूस कर रहे हैं. इसे राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास के एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

लोगों की अपेक्षाएं आसमान छूने लगी हैं, क्योंकि पिछली सरकार को हटाने और वर्तमान चुनाव कराने में उनकी मांगों और आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. पिछले सितंबर को याद करें, जब नेपाली युवाओं ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के के खिलाफ तीव्र आंदोलन किया था. इसे 'जेन जी आंदोलन' के नाम से जाना जाता है. काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने 'जेन जी आंदोलन' की मांगों का समर्थन किया था. जेन जी ने उनका नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में भी आगे बढ़ाया था. लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. उन्होंने सुशीला कार्की को इस पद के लिए समर्थन दिया था. शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने का श्रेय अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को जाता है.

कितने लोकप्रिय हैं बालेन शाह

बालेन शाह मेयर पद से इस्तीफा देकर आरएसपी में शामिल हो गए थे. चुनाव की शुरुआत में ही आरएसपी ने बालेन शाह को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था. जबकि रवि लामिछाने पार्टी अध्यक्ष बने रहे. शाह जेन जी के बीच अपने भ्रष्टाचार विरोधी रैप गीतों के कारण पहले से ही लोकप्रिय थे. साल 2019 में उनका रैप गीत 'बलिदान' को यूट्यूब पर करीब 1.3 करोड़ ब्यूज मिले थे. हाल के महीनों में कई दर्शकों ने कमेंट सेक्शन में उन्हें अपना अगला प्रधानमंत्री बताया. जेन जी के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें पांच मार्च को हुए चुनाव में झापा-5 जैसे पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र में केपी ओली को चुनौती देने का आत्मविश्वास दिया, जहां उन्होंने करीब 50 हजार वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की.

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आरएसपी ने देश के आम मूड को समझते हुए 40 साल से कम आयु के कई उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, क्योंकि 52 फीसदी मतदाता 18 से 40 साल के बीच के हैं. यह रणनीति सफल रही. नेपाल के 275 सदस्यीय संसद के निचले सदन में आरएसपी ने 182 सीटें जीत लीं. इसके अलावा नेपाली कांग्रेस (एनसी) को 37 और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) को 25 सीटें मिलीं. इसने उस धारणा को गलत साबित कर दिया कि वर्तमान 'फर्स्ट पास्ट द पोस्ट' और 'प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन' प्रणाली में कोई भी पार्टी बहुमत नहीं पा सकती.

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आरएसपी के लिए भी परीक्षा होगी नई सरकार

आरएसपी नेपाली राजनीति में नया दल है, लेकिन यह जेन जी के बीच बेहद लोकप्रिय है. इसका नेतृत्व पूर्व पत्रकार रवि लामिछाने करते हैं.लामिछाने अपने टीवी टॉक शो 'सीधा कुरा जनता संग' (News24) के जरिए लोगों के बीच मशहूर हुए. यह शो सामाजिक मुद्दों, भ्रष्टाचार और आम जनता की समस्याओं पर केंद्रित था. साल 2013 में उन्होंने सबसे लंबा टॉक शो होस्ट करने का 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' भी बनाया.यह 62 घंटे से अधिक समय तक चला था. उनके कार्यक्रम विदेशों में काम कर रहे नेपालियों में भी लोकप्रिय थे. लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते थे.

आरएसपी में कई पेशेवर लोग शामिल हुए. यह पारंपरिक पार्टियों से अलग तस्वीर पेश करता है. पारंपरिक नेताओं और पार्टियों की अलोकप्रियता का लाभ आरएसपी को मिला और 2022 के आम चुनाव में उसने 20 सीटें जीतीं. रवि लामिछाने प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार में उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे. भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें जेल भी जाना पड़ा, लेकिन जेन जी आंदोलन के दौरान उनकी रिहाई हुई. नेपाली जनता ने उन्हें भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था का शिकार माना. बालेन शाह को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाकर पार्टी में लाना एक रणनीतिक कदम था. इसने आरएसपी की लोकप्रियता को और बढ़ाया. नेपाली कांग्रेस और यूएमएल के भीतर आपसी कलह ने भी आरएसपी को फायदा पहुंचाया. दोनों पार्टियों में नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाने वाली आवाजों को नजरअंदाज कर दिया गया और टिकट वितरण में उन्हें हाशिए पर रखा गया. आरएसपी ने आनुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत लगभग 48 फीसदी वोट हासिल किए, जो पारंपरिक पार्टियों के प्रति मतदाताओं की अस्वीकृति को दर्शाता है.

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नेपाल में आंदोलनों से निकली पार्टियों का इतिहास कैसा रहा है

नेपाल में पहले भी आंदोलनों से निकली पार्टियों ने बहुमत हासिल किया है. साल 1990 के जनआंदोलन के बाद 1991 के चुनाव में नेपाली कांग्रेस ने 205 सदस्यीय सदन में 110 सीटें जीती थीं, लेकिन 1994 में आंतरिक कलह के कारण सरकार गिर गई. इसी तरह 2017 के चुनाव में केपी ओली की यूएमएल और प्रचंड की माओवादी पार्टी ने गठबंधन कर 174 सीटें जीतीं और 2018 में मिलकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनाई, लेकिन 2021 में आपसी विवाद के चलते यह गठबंधन टूट गया. दोनों ही मामलों में सत्ता साझेदारी और संवैधानिक पदों के बंटवारे को लेकर विवाद प्रमुख कारण रहे.

साल 2022 के चुनाव 20 सीटें जीतने वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने इस चुनाव में 182 सीटें जीती हैं.

आरएसपी के सामने अब बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अन्य पार्टियों की तरह आंतरिक मतभेदों में न उलझे और स्थिर सरकार दे. जनता ने उस पर भरोसा जताया है. यदि उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो यह निराशा में बदल सकती है. नई सरकार को सामाजिक-आर्थिक विकास, चल रही परियोजनाओं को पूरा करने और युवाओं के हित में नई योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए.

भारत और नेपाल के संबंध

बालेन शाह ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई के लिए धन्यवाद दिया और दोनों देशों के ऐतिहासिक, घनिष्ठ और बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने का भरोसा जताया. भारत ने भी प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को सफलतापूर्वक चुनाव कराने के लिए बधाई दी है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है, ''एक करीबी मित्र और पड़ोसी के रूप में भारत नेपाल की जनता और उसकी नई सरकार के साथ शांति, प्रगति और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है.''

भारत नेपाल की जनता के फैसले का सम्मान करने की अपनी नीति पर कायम है. इससे नेपाली लोगों के बीच सद्भावना बढ़ती है. नेपाल के सबसे बड़े विकास साझेदार के रूप में जमीनी स्तर पर प्रभावी विकास परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है. आर्थिक और राजनीतिक संपर्क के साथ-साथ दिलों के बीच जुड़ाव भी दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा. सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हर क्षेत्र में संबंधों को आगे बढ़ाना जरूरी है, लेकिन बिना किसी हस्तक्षेप या पक्षपात के.

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डिसक्लेमर: लेखक दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में पढ़ाती हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है. 
 

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