ईरान युद्ध में उतरा इजरायल लेबनान में कौन सा मिशन चला रहा है, क्यों लड़ रहा है हिजबुल्लाह

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गौरव कुमार द्विवेदी

पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल में जारी युद्ध के रुकने के आसार नजर नहीं रहे हैं. तेहरान समेत ईरान के शहरों पर अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक जारी है. लेकिन लेबनान पर इजरायली सेना का फॉक्स फिलहाल ज्यादा नज़र आता है. इजरायली सेना (आईडीएफ) ने दक्षिणी लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन्स को और तेज कर दिया है. फोकस मुख्य रूप से लितानी नदी के दक्षिण इलाके पर है, जहां हिजबुल्लाह के मजबूत ठिकानों को टारगेट किया जा रहा है.

आईडीएफ ने 16 मार्च को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि 91वीं डिवीजन की सेना ने 'लिमिटेड एंड टारगेटेड ग्राउंड ऑपरेशन्स' शुरू किए हैं. इसका उद्देश्य है फॉरवर्ड डिफेंस एरिया को बढ़ाना, ताकि उत्तरी इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन अटैक्स से सुरक्षा मिल सके. लितानी नदी के पास गैलिली और उत्तरी इजरायल के इलाकों में लेबनान के हमले भी जारी हैं. 

कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नेतन्याहू 'ग्रेटर इजराइल' के सपने को पूरा करने करने के मिशन में पहला पड़ाव लेबनान में ही देखते हैं.आइए जानते हैं आखिर क्या है लेबनान में इजरायल का मिशन और हिजबुल्लाह-इजरायल के संघर्ष का इतिहास.

लेबनान में इजरायल का लक्ष्य क्या है 

युद्ध भले ही ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करने या सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ शुरू हुआ, लेकिन इजरायल का एक प्लान और भी है. वो है- पूरे दक्षिण लेबनान (लितानी के नीचे) पर कंट्रोल हासिल कर हिजबुल्लाह की मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से तबाह कर देना. आईडीएफ बफर जोन बनाने की कोशिश में है, ताकि भविष्य में कोई भी रॉकेट उसकी उत्तरी बस्तियों तक न पहुंचे. लेकिन यह लंबे समय तक क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से समीकरण गड़बड़ाने वाला होगा. 

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इस युद्ध को 2006 के लेबनान युद्ध के बाद आईडीएफ का सबसे बड़ा ग्राउंड ऑपरेशन माना जा रहा है. दो दशक बाद आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान के खियाम (Khiam), कंतारा (Qantara) और अल-सावाना (As-Sawana) जैसे स्ट्रैटेजिक इलाकों पर रेड्स किए हैं. हाल के दिनों में हथियारों के गोदाम, रॉकेट लॉन्च साइट्स और हिजबुल्लाह के कमांड पोस्ट्स को निशाना बनाया गया है.

हिजबुल्लाह का ऑपरेशन 'Khaibar-1' क्या था

आईडीएफ के हमलों के जवाब में हिजबुल्लाह ने भी 'Khaibar-1' नाम से ऑपरेशन शुरू किया है. इसके तहत उसने उत्तरी इजरायल पर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन अटैक किए. रिपोर्ट्स बताती हैं कि आईडीएफ तीन आर्मर्ड और इन्फैंट्री डिवीजन्स को लेबनानी बॉर्डर पर तैनात कर चुका है. इजरायल की सेना ने सरकार से लेबनान के खिलाफ लड़ाई के लिए रिजर्व सैनिकों की संख्या साढे चार लाख तक करने की अपील की है.

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इस पूरे तनाव की पृष्ठभूमि लेबनान-इजरायल तनाव से जुड़ी हुई है. जब साल 1948 में अरब-इजरायल युद्ध से शुरू हुआ, तब लेबनान ने सीमित भूमिका निभाई. 1960-70 के दशक में  पीएलओ के नाम से मशहूर फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (Palestine Liberation Organization) ने दक्षिणी लेबनान से हमले शुरू किए. इसके बाद 1978 में ऑपरेशन लितानी हुआ. आईडीएफ ने लितानी तक पहुंचकर पीएलओ को पीछे धकेला था. इसके कई साल बाद 1982 में पहला लेबनान युद्ध हुआ. यह युद्ध बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.इसमें इजरायल ने बेरूत तक पहुंचकर पीएलओ को बाहर निकाला. 

साबरा-शतिला नरसंहार और हिजबुल्लाह का गठन 

कताएब नाम की दक्षिणपंथी ईसाई पार्टी से संबंध रखने वाले राष्ट्रपति बचीर गेमायल और उनके 25 समर्थकों की मौत 14 सितंबर 1982 को हुए एक बम धमाके में हो गई थी. इसका आरोप फिलस्तीनी विद्रोहियों पर लगा था. इस हत्याकांड का बदला लेने के लिए बेरूत के साबरा और शतिला में बने फिलस्तिनियों के दो शरणार्थी शिविरों पर 16-18 सितंबर के बीच हमला हुआ. इसमें हमलों में 3500 से ज्यादा शरणार्थी फलस्तीनियों की मौत हो गई थी. इस हमले के लिए कताएब पार्टी से संबंध रखने वाली मिलिशिया और इजरायली सेना को जिम्मेदार ठहराया गया था. इस हमले से लेबनान के शिया लड़ाके भड़के गए थे.ईरान समर्थित इन शिया लड़ाकों ने हिजबुल्लाह नाम की राजनीतिक पार्टी का गठन किया.यह एक ऐसा रेसिस्टेंस ग्रुप है, जिसे ईरान का समर्थन हासिल है.

हिजबुल्लाह ने 1985-2000 तक गोरिल्ला वॉरफेयर की रणनीति अपनाई. उसने आईडीएफ और साउथ लेबनान आर्मी को टारगेट किया. इजरायल ने 1993 (ऑपरेशन अकाउंटेबिलिटी) और 1996 (Operation Grapes of Wrath) जैसे ऑपरेशन्स किए. साल 2000 में आईडीफ ने संयुक्त राष्ट्र रेजोल्यूशन 425 के तहत दक्षिण से पूरी वापसी की. इजरायली सेना की वापसी को हिजबुल्लाह ने अपनी जीत बताया था.

कहां कहां हमले कर रहा है हिजबुल्लाह 

साल 2006 का दूसरा लेबनान युद्ध (34 दिन का) सबसे बड़ा था. हिजबुल्लाह ने आईडीएफ के सैनिकों को बंधक बनाया, इजरायल ने एयरस्ट्राइक्स और जमीनी ऑपरेशन (लितानी तक) किया. इस दौरान हजारों रॉकेट दागे गए. फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत सीजफायर हुआ, लितानी के दक्षिण में डीमिलिटराइज्ड जोन के साथ ही लेबनानी आर्मी और संयुक्त राष्ट्र का शांति मिशन (UNIFIL) तैनात किया गया. लेकिन हिजबुल्लाह ने हथियार नहीं छोड़े. इसके बाद भी हालात नहीं बदले और 2006 के बाद भी शेबा फार्म्स विवाद (गोलान हाइट्स और लेबनान सीमा पर स्थित भूभाग) और कम स्तर के हमले जारी रहे.

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सात अक्टूबर 2023 को हमास ने गाज़ा पट्टी से इजरायल पर 'ऑपरेशन अल-अक़्सा' के तहत अचानक और भीषण हमला किया. इस हमले में लगभग 12 सौ लोग मारे गए और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया. इसके बाद हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर रॉकेट दागना शुरू कर दिया. नवंबर 2024 में सीजफायर हुआ, लेकिन इजरायल ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी. अब ईरान युद्ध के साथ ही हिजबुल्लाह और इजरायल के हमले एक-दूसरे के खिलाफ बढ़ गए हैं.

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