- मोतिहारी के केसरिया में 120 एकड़ के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा विराट रामायण मंदिर बनाया जा रहा है
- 210 मैट्रिक टन वजन और 33 फीट ऊंचाई वाले शिवलिंग को 10 वर्षों में 1008 कारीगरों ने बनाया है
- शिवलिंग को दो भारी क्रेन की मदद से 30 फीट ऊंचे गुंबद पर सफलतापूर्वक आधे घंटे में स्थापित किया गया है
आज बिहार के मोतिहारी में केसरिया के कठौलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मदिर के प्रांगण में दुनिया की सबसे बड़ी शिवलिंग की स्थापना की गई. यह मंदिर 120 एकड़ के प्रांगण में स्थापित किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे विराट रामायण मंदिर है. यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 2500 किमी और 40 दिन से ज़्यादा की यात्रा तय करके बिहार आया है. इसे बनाने में 10 साल का वक़्त लगा है, इस शिवलिंग को ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है, जिसमें 1008 छोटे शिवलिंग को उकेरा गया है और इसे बनाने में 1008 कारीगरों ने अपना योगदान दिया है.
आचार्य कुणाल किशोर का सपना था विराट रामायण मंदिर
पूर्व आईपीएस और महावीर न्यास बोर्ड के पूर्व सचिव आचार्य कुणाल का सपना था यह विराट रामायण मंदिर. इसकी नींव उन्होंने अपने जीवन में रखी थी, लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है. लेकिन उनके बेटे सयान कुणाल से आज उनके सपने को पूरा करते हुए पूरे विधि विधान से इस शिवलिंग को मंदिर प्रांगण में स्थापित किया है. उन्होंने एनडीटीवी से बात करते हुए बताया है कि इस मंदिर के बनने से इस जगह का विकास भी तेजी से होगा. अयोध्या के बाद यह सबसे बड़ा धार्मिक स्थल बनेगा. यहां होटल्स, एयरपोर्ट और हाईवे बनेंगे और इस पूरे इलाके का विकास तेजी से होगा.
कितना कठिन था शिवलिंग को स्थापित करना
इस विशाल शिवलिंग का वजन 200 मैट्रिक टन (2,00,000 किलोग्राम) है और जो 33 फीट लंबा है. इसे स्थापित करना बेहद ही मुश्किल कार्य था, लेकिन इंजीनियर्स की टीम ने इसे बेहद सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है. इस शिवलिंग को 30 फीट से ऊंचे गुंबद पर स्थापित किया गया, जिसके बाद इसके कुल उचाई 60 फीट से भी ज़्यादा हो गई है. इसे स्थापित करने में लगभग आधे घंटे का वक्त लगा है और इसे 2 भारी-भरकम क्रेन की मदद से स्थापित किया गया है. शिवलिंग को क्रेन की मदद से पहले हवा में लिफ्ट किया गया, फिर ऊंचाई पर ले जाकर इसे स्थापित किया गया. शिवलिंग बनाने वाली टीम के मॉडरेटर वेंकटेश विनायक ने एनडीटीवी को बताया कि इस शिवलिंग को 10 साल में बनाया गया और अब इसे विराट रामायण मंदिर के प्रांगण में स्थापित किया गया है.
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रामायण सर्किट का होगा विस्तार
इस विराट रामायण मंदिर के बनने की वजह से इस पूरे इलाके में सनातन का प्रचार हो रहा है. लोग रामायण और सनातन परंपरा से जुड़े और यह रामायण सर्किट के आधारशिला को भी पूरा करता है. अयोध्या और हनुमान गढ़ी से आए साधु संतों ने भी इस मंदिर निर्माण को लेकर अपनी खुशी जाहिर की है.
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विशाल शिवलिंग देखने उमड़ी हजारों की भीड़
कैथौलिया गांव में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. इस दौरान आसपास के इलाके के लोग यहां जमा हुए और इस पावर अवसर का हिस्सा बने.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को भेजा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज केसरिया में बन रहे विराट रामायण प्रांगण में शिवलिंग की स्थापना की जानकारी ली और अपने अधिकारियों से इसके निर्माण कार्य के बारे में जाना भी. इस दौरान बिहार के तमाम आला अफसर मौजूद रहे, जिसमें बिहार के मुख्य सचिव प्रत्य अमृत और डीजीपी विनय कुमार शामिल थे. प्रत्यय अमृत ने मुख्यंमंत्री नीतीश कुमार को मंदिर के डिजाइन से लेकर निर्माण कार्य की पूरी जानकारी दी है. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि यह विराट शिवलिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सनातन के सपने को पूरा कर रहा है. इसके बनने से इस पूरे क्षेत्र का विकास होगा और रामायण सर्किट की संरचना को और आधार मिलेगा.














